एक्ज़िट पोल को सही मानें तो मोदी सरकार फिर सत्ता में आने जा रही है। वैसे, असली नतीजे कल मतगणना के बाद ही सामने आएंगे। जो भी हो, मोदी सरकार रहे या इंडिया गठबंधन की सरकार आ जाए, देश की अर्थव्यवस्था को कोई फर्क नहीं पड़नेवाला। आर्थिक उदारवाद का जो सिलसिला 33 साल पहले 1991 में शुरू हुआ था, वह बदस्तूर जारी रहेगा। हां, इतना ज़रूर होगा कि मोदी सरकार अर्थव्यवस्था को लेकर जो झांकी बनाती रहीऔरऔर भी

ब्रोकरेज़ फर्म देशी हो या विदेशी, उनका समान धंधा है कि वे उन्हीं स्टॉक्स को खरीदने की सिफारिश करती हैं जो पहले से काफी चढ़ चुके होते हैं। कुछ ही दिन पहले जानी-मानी विदेशी ब्रोकरेज़ फर्म सीएलएसए ने 54 स्टॉक्स की लिस्ट जारी की है जिसे उसने मोदी स्टॉक्स का नाम दिया है। इनमें लार्सन एंड टुब्रो, एनटीपीसी, एनएचपीसी, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन, ओएनजीसी, इंद्रप्रस्थ गैस, महानगर गैस, भारती एयरटेल, इंडस टावर्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज़, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक,औरऔर भी

देश की अर्थव्यवस्था हो, चुनाव हों या शेयर बाज़ार, सत्ता और धंधे के सूत्र ने इन सबको जोड़ रखा है। सत्ता की आहट से ये सभी हिल जाते हैं। कल 18वीं लोकसभा के अंतिम चरण का मतदान है। फिर शाम को एक्जिट-पोल और मंगलवार को अंतिम नतीजे। इससे पहले आज आखिरी ट्रेडिंग दिन है तो शेयर बाज़ार में सनसनी मची हुई है। अभी दो दिन पहले अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी एस एंड पी ग्लोबल ने दस साल बादऔरऔर भी

साल 2009 के आम चुनावों में कांग्रेस को 206 और भाजपा को 116 सीटे मिली थीं। शनिवार, 16 मई को नतीजों की घोषणा के बाद सोमवार, 18 मई को शेयर बाजार खुला तो मनमोहन सरकार के दोबारा सत्ता में आने की खुशी में बल्लियों उछल गया। उस दिन निफ्टी 17.74% और सेंसेक्स 17.34% बढ़कर बंद हुआ। क्या इस बार मंगलवार, 4 जून को नतीजों की घोषणा के बाद मोदी सरकार तीसरी बार सत्ता में आई तो बाज़ारऔरऔर भी

देश में जब भी लोकसभा चुनाव होते हैं तो उनके नतीजों को लेकर शेयर बाज़ार की धुकधुकी बढ़ जाती है। पिछले चार चुनावों पर नज़र डालें तो इस दौरान बाज़ार में उतार-चढ़ाव का आना बड़ा स्वाभाविक है। इस बार 19 अप्रैल से 1 जून तक सात चरणों में मतदान हो रहा है। इस दौरान 18 अप्रैल से कल 28 मई तक निफ्टी 4.06% और सेंसेक्स 3.70% बढ़ा है। 4 जून को नतीजे घोषित तक अगले पांच दिनोंऔरऔर भी

शेयर बाज़ार को न तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बार-बार किए जा रहे 400 पार के दावे पर यकीन है और न ही गृहमंत्री अमित शाह की इस गणना पर कि भाजपा छह चरण में 300-310 सीटें जीत चुकी है, जबकि सातवे व अंतिम चरण में 57 सीटों पर वोटिंग अभी होनी है। बाज़ार में छाई अनिश्चितता 1 जून को अंतिम चरण के मतदान और शाम को एक्जिट पोल के नतीजों से साथ शायद खत्म या थोड़ीऔरऔर भी

सेंसेक्स व निफ्टी ऐतिहासिक शिखर पर। सीधा मतलब कि शेयर बाज़ार में लालच चरम पर है। लेकिन खास मतलब टेढ़ा है। चालू वित्त वर्ष 2024-25 के पहले दिन से ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) बेचे जा रहे हैं। उन्होंने कैश सेगमेंट से 1 अप्रैल से 24 मई के बीच स्टॉक एक्सचेंज द्वारा जारी अनंतिम आंकडों के मुताबिक शुद्ध रूप से 70,152 करोड़ रुपए निकाले हैं। बीते हफ्ते उन्होंने 1165.54 करोड़ रुपए की जो शुद्ध खरीद की, वोऔरऔर भी

जो अड़ता है, वो टूट जाता है और जो ढलता है, वही लम्बा चलता है। परिस्थितियां हमेशा एक-सी नहीं होतीं। हमें उनसे निपटने के लिए उनके हिसाब से ढलना पड़ता है। कुदरत का यह नियम शेयर बाज़ार पर ही लागू होता है। बाज़ार के हर चक्र में एक ही रणनीति नहीं चल सकती। इस समय बाज़ार में अनिश्चितता का जो आलम है, उसके हिसाब से हमें अपनी निवेश रणनीति को ढालना होगा। यकीनन, नज़र अल्पकालिक नहीं, बल्किऔरऔर भी

सरकार में बैठे लोग साफ जानते है कि किसे लूटना और किसे छोड़ना है। हालांकि वे व्यापक अवाम के वोटों से चुनकर ही सरकार में आ सकते हैं तो खुद को हमेशा जनता का सबसे बड़ा हितैषी दिखाते रहते हैं। कितनी विचित्र बात है कि देश और जनता की बात करनेवाली मोदी सरकार सबसे ज्यादा धन देश की संस्थाओं और टैक्स जनता से वसूल रही है। रिजर्व बैंक ने 2017-18 से 2022-23 तक के छह साल मेंऔरऔर भी

संघ प्रचारक से भारत के प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी का खास गुण है झूठ बोलना और मोदी सरकार का खास अंदाज़ है सच को झुठला देना। जब विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट आई कि दुनिया भर कोरोना महामारी के कुल लगभग 1.5 करोड़ लोम मारे गए, जिसमें से सर्वाधिक एक तिहाई से भी ज्यादा 47 लाख मौतें अकेले भारत में हुई हैं तो मोदी सरकार ने झूठ-झूठ चिल्लाना शुरू कर दिया। हमारा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय 20 मार्चऔरऔर भी