सरकार ने मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का फैसला तब तक टाल दिया है, जब तक इससे जुड़े सभी पक्षों में सहमति नहीं बन जाती। सरकार ने बुधवार को सुबह सर्वदलीय बैठक के बाद यह घोषणा की। इसके बाद नौ दिन से हंगामे की शिकार संसद की कार्यवाही सामान्य तरीके से चल पड़ी। सीपीआई नेता गुरुदास दासगुप्ता ने बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कहा, “यह रिटेल व्यापार में एफडीआई कोऔरऔर भी

रिटेल में एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) के मुद्दे पर संसद के दोनों सदनों में सोमवार को भी विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। हंगामे के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही मंगलवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इससे पहले दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित की गई थी। इस बीच पता चला है कि संसद में जारी गतिरोध को दूर करने के लिए सरकार सर्वदलीय बैठक बुला सकती है। इस सिलसिलेऔरऔर भी

अण्णा हज़ारे के नौ दिनों के अनशन ने कांग्रेस ही नहीं, सभी राजनीतिक पार्टियों की नींद हराम कर दी है। उन्होंने बुधवार को हुई सर्वदलीय बैठक में अण्णा से अनशन खत्म करने की अपील तो की है। लेकिन उन्हें न तो टीम अण्णा की शर्तें मंजूर हैं और न ही जन लोकपाल बिल। यही वजह है कि राजधानी दिल्ली में सात रेस कोर्स स्थित प्रधानमंत्री आवास पर हुई सभी दलों की बैठक बेनतीजा साबित हुई। असल मेंऔरऔर भी

सरकार आखिरकार अण्णा हज़ारे के नेतृत्व में चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी जन आंदोलन के आगे झुक गई लगती है। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की चिट्ठी के बाद टीम अण्णा के साथ सरकार की बातचीत की राह खुल गई। लेकिन सरकार यहां भी अपनी चालाकी से बाज नहीं आई है। वह जन लोकपाल विधेयक को भी संसद की स्थाई समिति को सौपने को तैयार है। लेकिन स्थाई समिति के लिए अन्य तमाम सुझावों की तरह यह भी एक सुझावऔरऔर भी

गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हज़ारे के पक्ष ने अपने जन लोकपाल विधेयक में फोन टैप करने, अनुरोध पत्र जारी करने और भ्रष्टाचार कम करने के लिए कामकाज के तरीकों में बदलाव लाने की सिफारिशें करने संबंधी अधिकार लोकपाल को देने का जिक्र किया है जबकि सरकार के मसौदे में ऐसे किसी भी प्रावधान का जिक्र नहीं है। दोनों मसौदों पर विचार के लिए सरकार ने 3 जुलाई को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। हज़ारे पक्ष ने लोकपाल विधेयकऔरऔर भी