पहले घर एक-मंजिला हुआ करते थे। अब बहु-मंजिला होते हैं। पहले धन-दौलत सोने-चांदी के सिक्कों या बर्तनों के रूप में जमीन या दीवार में गाड़कर बचाई जाती है। अब लोग अपनी बचत बैंक एफडी, म्यूचुअल फंड या शेयरों जैसे अनाकार माध्यमों में लगाते हैं। पहले मुद्रास्फीति नहीं थी तो बचत जितना रखो, उतनी ही रहती थी। अब खोखली होती जाती है। इसलिए आप कमाकर बचाते हैं, यह पर्याप्त नहीं। आपकी बचत को भी कमा पड़ेगा। कम याऔरऔर भी

बाजार में मिथ है कि एफआईआई जिस शेयर को खरीदते हैं, उसके भाव अपने-आप बढ़ जाते हैं। लेकिन सिर्फ यही कारक किसी शेयर को नहीं बढ़ा सकता। जैसे, मार्च 2011 के अंत तक अल्सटॉम प्रोजेक्ट्स इंडिया में एफआईआई की इक्विटी हिस्सेदारी 2.56 फीसदी थी, जबकि जून 2011 के अंत तक यह बढ़कर 4.10 फीसदी हो गई। जाहिर है कि एफआईआई की यह सारी खरीद 1 अप्रैल से 30 जून 2011 के बीच हुई होगी। लेकिन 1 अप्रैलऔरऔर भी

इंडिया सिक्यूरिटीज एस्सार समूह की फाइनेंस कंपनी है। केवल बीएसई (कोड – 500204) में लिस्टेड हैं। फिलहाल ऑपरेटर इसे ठोंके पड़े हैं ताकि एकदम नीचे गिराकर इसे बटोरा जा सके। कल, गुरुवार को ही इसे 10.98 फीसदी धुना गया है और यह बुधवार के बंद भाव 49.65 रुपए से सीधे 44.20 रुपए पर पहुंच गया। धुनाई तो इसकी पिछले कई महीनों से चल रही है। अभी महीना भर पहले 8 जून को एक रुपए अंकित मूल्य काऔरऔर भी