वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने पेट्रोलियम उत्पादों के दाम में की गई वृद्धि को वापस लेने की संभावना से इनकार कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि कच्चे तेल व पेट्रोलियम उत्पादों पर कस्टम व एक्साइज शुल्क में कटौती से सरकार के राजकोषीय घाटे पर कोई असर नहीं होगा। यह पूछे जाने पर कि डीजल, घरेलू गैस व केरोसिन की कीमतों में वृद्धि में कुछ कमी की जाएगी, मुखर्जी ने समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडियाऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि भारत के लिए मुद्रास्फीति सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि महंगाई दर इस साल 6.5 फीसदी से अधिक रहने का अनुमान है। सोमवार को वॉशिंगटन में ‘भारत-अमेरिका आर्थिक व वित्तीय सहयोग’ पर आयोजित सम्मेलन में मुखर्जी ने कहा, ‘‘भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने कई समस्याएं हैं और सबसे बड़ी चुनौती मुद्रास्फीति है।’’ सम्मेलन का आयोजन सीआईआई ने वॉशिंगटन के शोध संस्थान ब्रुकिंग इंस्टीट्यूट के साथ मिलकर किया है। भारत-अमेरिकाऔरऔर भी

अमेरिकी वित्त मंत्री टिमोथी गेटनर ने कहा है कि भारत की आर्थिक वृद्धि से अमेरिका को कोई खतरा नहीं है बल्कि इससे देश की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मदद मिल रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका की वही कंपनियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं जिन्हें भारत के साथ निर्यात वृद्धि से फायदा पहुंचा है। वॉशिंगटन में ‘अमेरिका-भारत आर्थिक व वित्तीय भागीदारी’ पर आयोजित सम्मेलन में गेटनर ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘अमेरिका में उनऔरऔर भी

चालू सीजन के दौरान सामान्य से कम मानसून के अनुमान पर आशंकाओं को खारिज करते हुए वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि ये अनुमान केवल एक आभास भर हैं। मुखर्जी ने बुधवार को मानसून से जुड़े सवाल पर संवाददाताओं को बताया, ‘‘हमें कुछ समय और इंतजार करना चाहिए।’’ भारतीय मौसम विभाग ने कल कहा था कि मानसून दीर्घकालिक अवधि के औसत का 95 फीसदी रहने की संभावना है जो सामान्य से कम है। सामान्य सेऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने भले ही पिछले साल सितंबर में नॉर्थ ब्लॉक स्थित अपने कार्यालय की सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। लेकिन जांच के बाद सुरक्षा में सेंध जैसा कोई मामला नहीं पाया गया है। इंडियन एक्सप्रेस में उस पत्र की खबर छपने के बाद वित्त मंत्री ने मंगलवार को कहा कि जांच एजेंसियों को नॉर्थ ब्लाक में उनके कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था में कथित सेंध की जांच में कुछ नहीं दिखा है।औरऔर भी

मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए पिछले डेढ़ साल में दस बार नीतिगत दरों में वृद्धि करने के बाद रिजर्व बैंक ने कहा है कि महंगाई थामने के लिये उसके पास कोई जादू की छड़ी नहीं है। शुक्रवार को दिल्ली में उद्योग संगठन एसोचैम के एक कार्यक्रम में रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर के सी चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘आप सभी चाहते हैं कि मुद्रास्फीति नीचे आनी चाहिए। न तो वित्त मंत्रालय और न ही रिजर्व बैंक केऔरऔर भी

सदियों पहले बौद्ध भिक्षुओं का रिवाज था कि वे बारिश के चार महीनों में यायावरी छोड़, कहीं एक जगह ठेहा जमाकर बैठकर जाते थे। लगता है हम निवेशकों को भी कुछ महीनों के लिए हाथ-पैर बांधकर, लेकिन दिमाग खोलकर बैठ जाना चाहिए। असल में बाजार कहीं जा नहीं रहा। बस कदमताल किए जा रहा है। जानकारों का कहना है कि अभी जिस तरह ब्याज दरों के बढ़ने का सिलसिला चल रहा है, आर्थिक विकास दर में सुस्तीऔरऔर भी

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में शेयर हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया को चुस्त दुरूस्त बनाने व तेज करने के लिए सरकार ने एक नियमावली (हैंडबुक) पेश की है। यह हैंडबुक केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उप्रकमों (सीपीएसई) और इससे जुड़े विभागों के लिए विनिवेश संबंधी नियमावली है। वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने गुरुवार को राजधानी दिल्ली में इस ‘पब्लिक इश्यू के जरिए विनिवेश पर नियमावली’ शीर्षक की हैंडबुक को जारी किया। उन्होंने कहा कि यह हैंडबुक सीपीएसई, प्रशासित मंत्रालयों औरऔरऔर भी

पेट्रोलियम मंत्री एस जयपाल रेड्डी ने कुर्सी का धर्म निभाते हुए पेट्रोलियम तेल की मार्केटिंग में लगी सरकारी कंपनियों की शिकायत ऊपर तक पहुंचा दी है। उन्होंने मंगलवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलकर डीजल व रसोईं गैस के दाम बढ़ाने का फैसला जल्द करने की मांग की। ये दोनों उत्पाद राजनीतिक व आर्थिक दृष्टि से संवेदनशील माने जाते हैं। रेड्डी ने पिछले हफ्ते इसी मामले में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी से भी मुलाकात की थी। गौरतलबऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने बैंकिंग गोपनीयता को समाप्त करने और ट्रांसफर प्राइसिंग के दुरूपयोग या परस्पर सम्बद्ध फर्मों के बीच अंतराष्ट्रीय सौंदों के बिलों में घपलेबाजी को रोकने के लिए सभी देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। वित्त मंत्री का आरोप है कि बैंकों की गोपनीयता और सौदों में भुगतान के बिलों में हेराफेरी कर के विकासशील देशों के दुर्लभ प्राकृतिक संसाधनों को लूटा जा रहा है। मुखर्जी ने राजधानी दिल्ली में सोमवारऔरऔर भी