हर शेयर अपने आप में एक कहानी कहता है। उसका भाव बीते कल का ही नहीं, आनेवाले कल का भी संकेत देता है। लेकिन एक बात तमाम कोशिशों के बावजूद परदे में रह जाती है। और, वो है कि कंपनी में कॉरपोरेट गवर्नेंस की स्थिति। मतलब यह कि प्रबंधन कैसा चल रहा है? प्रवर्तकों का रवैया क्या है? वे कंपनी को लोकतांत्रिक तरीके से चला रहे हैं या इतने सारे शेयरधारकों के साथ लिस्टेड होने के बावजूदऔरऔर भी

बड़े लोग पैसे को दांत से दबाकर रखते हैं। बहुत सोच-समझकर चुनिंदा माध्यमों में लगाते हैं। वहीं, समझदार से समझदार नौकरीपेशा लोग भी शेयर बाजार के लंबा फासला बनाकर चलते हैं। किसान को तो हवा ही नहीं कि यह बाजार चलता कैसे है। बाकी जो लोग बचे हैं, जो कभी यहां से तो कभी वहां से थोड़ी-बहुत कमाई कर लेते हैं, वे उड़ती-उड़ती खबरों की तलाश में रहते हैं ताकि शेयर बाजार से ‘पक्की’ कमाई की जाऔरऔर भी

शेयर बाजार में निवेश करना है तो हमें लॉटरी खेलने की मानसिकता से मुक्त होना होगा। शेयरों के भाव कभी भी वर्तमान या अतीत से नहीं, बल्कि कंपनी के कामकाज व नकदी प्रवाह के भावी अनुमानों से तय होते हैं। और, भविष्य को कोई भी ठीक-ठीक नहीं जान सकता। इसलिए शेयर बाजार के निवेश में जमकर जोखिम है। दिक्कत यह है कि हम शेयरों में निवेश करते वक्त रिटर्न की बात सोच-सोचकर लार तो टपकाते हैं। मगर,औरऔर भी

शेयर बाजार में इस वक्त निवेशकों का नहीं, ट्रेडरों का बोलबाला है। 3 अक्टूबर को बाजार खुलने से पहले हमने ज्यादा कुछ न बताकर इतना कहा था कि नेस्को बहुत ही मजबूत और संभावनामय कंपनी है। इसमें बढ़त का रुझान भी है। बस क्या था? संकेत मिला नहीं कि ट्रेडरों की मौज हो गई। रण बीच चौकड़ी भरने लगे। एकदम चेतक की तरह, जिसके बारे में कविता है कि राणा की पुतली फिरी नहीं, तब तक चेतकऔरऔर भी

वोकहार्ट का स्टॉक/शेयर सोमवार, 8 अक्टूबर से बीएसई के मिड कैप सूचकांक से बाहर निकाल दिया जाएगा। इस खबर के आने के बाद यह थोड़ा-सा गिरकर बीएसई (कोड – 532300) में 1277.80 रुपए और एनएसई (कोड – WOCKPHARMA) में 1275.95 रुपए पर बंद हुआ है। लेकिन इससे न तो इस स्टॉक और न ही कंपनी पर कोई फर्क पड़ता है। किसे पता था कि इसी साल 6 जनवरी 2012 को पांच रुपए अंकित मूल्य का जो शेयरऔरऔर भी

काश! ऐसा होता कि अर्थशास्त्र और राजनीति दोनों एकदम अलग-अलग होते। ऐसा होता तो अपने यहां सेंसेक्स बहुत जल्द छलांग लगाकर 23000 अंक तक पहुंच जाता। हाल में बहुत-सी ब्रोकर फर्मों ने रिपोर्ट जारी कर भविष्यवाणी भी की है कि इस नहीं, अगली दिवाली तक जरूर सेंसेक्स 23,000 के पार चला जाएगा। लेकिन राजनीति और अर्थशास्त्र अलग-अलग हैं नहीं। इसीलिए राजनीतिक अर्थशास्त्र की बात की जाती है। इसी से बनता है पूरा सच और वो सच यहऔरऔर भी

मित्रों! बड़े विनम्र अंदाज में आज से वापसी कर रहा हूं। कोई शोर-शराबा नहीं। कोई धूम-धड़ाका नहीं। दूसरों के कहे शेयरों को आंख मूंदकर आपको बताने की गलती अतीत में हमसे जरूर हुई है। सूर्यचक्र पावर इसका आदर्श नमूना है। लेकिन जहां भी औरों की सलाह को सोच-समझ कर पेश किया, वहां आपका फायदा ही हुआ है। जैसे, ठीक साल भर पहले हमने अपोलो हॉस्पिटल्स में निवेश की सलाह थी। तब वो शेयर 455.65 रुपए था औरऔरऔर भी

मुश्किलें मुझ पर पड़ीं इतनी कि आसां हो गईं – ग़ालिब का ये शेर अभी तक अपुन पर पूरा फिट नहीं बैठा है। कारण, मुश्किलें तो पड़ती जा रही हैं, लेकिन आसां नहीं हो रहीं। इस चक्कर में फिर से आपकी सेवा में हाज़िर नहीं हो पा रहा। एक वजह यह भी है कि पेड सर्विस शुरू करने का मन नहीं बना पा रहा हूं। मेरा मानना है कि ज्ञान किसी की बपौती नहीं है और इसेऔरऔर भी

मित्रों! तैयारी जारी है। जल्दी ही हम फिर से आपके बीच इस कॉलम में निवेश की सलाह लेकर हाज़िर हो जाएंगे। इस बीच हम भी अक्सर बेचैन हो जाते हैं क्योंकि कुछ सूचनाएं मिलती हैं जिनके आधार पर आम निवेशक कमाई कर सकते हैं। लेकिन अर्थकाम का काम फिलहाल रुकने से हम वो सूचना आपके साथ बांट नहीं पाते। हमारा मकसद आपको शेयर बाजार से कमाई के अच्छे अवसरों से परिचित कराना है। लेकिन इसके लिए हमारीऔरऔर भी

वोकहार्ट ने बीते महीने 22 मई को वित्त वर्ष 2011-12 के सालाना और चौथी तिमाही के नतीजे घोषित किए। पता चला कि मार्च तिमाही में उसे जबरदस्त घाटा हुआ है। स्टैंड-एलोन स्तर पर 69 करोड़ रुपए और सब्सिडियरी व सहायक इकाइयों को मिलाकर कंसोलिडेटेड स्तर पर 192 करोड़ रुपए। जबकि, साल भर पहले की मार्च तिमाही में उसे स्टैंड-एलोन रूप से 32 करोड़ रुपए और कंसोलिडेटेड रूप से 162 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हुआ था। यहीऔरऔर भी