प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आगाह किया है कि भ्रष्टाचार को बर्दाश्त करने का जनता के सब्र का बांध अब टूट चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार इस दुराचार की चुनौती से सख्ती से निपटने को प्रतिबद्ध है क्योंकि जनता इसके खिलाफ तुरत और कठोर कार्रवाई चाहती है। गुरुवार को उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से संसद के मानसून सत्र में भ्रष्टाचार की नकेल कसने के लिए चर्चित लोकपाल विधेयक पेश कर दिए जाने की उम्मीद है।औरऔर भी

आर्थिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए भारत, चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका (ब्रिक्स) एक दूसरे को अपनी स्थानीय मुद्रा में कर्ज और अनुदान के लेनदेन पर सहमत हो गए हैं। ब्रिक्स देशों के बीच इस आशय के एक समझौते में चीन के शहर सान्या में हस्ताक्षर किए गए। इस पहल को अमेरिकी मुद्रा डॉलर पर निर्भरता और उसके वर्चस्व को घटाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। समझौतेऔरऔर भी

वैश्विक स्तर पर जारी अनिश्चितता से आर्थिक वृद्धि के परंपरागत स्रोतों पर दबाव बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ममनमोहन सिंह ने इस बढ़ते दबाव को लेकर सतर्क करते हुए कहा है कि पांच देशों के संगठन ब्रिक्स को विकास के प्रमुख क्षेत्रों में समन्वय करना जरूरी है और यह सारी दुनिया के लिए लाभकारी होगा। बता दें कि ब्रिक्स देशों में शामिल पांच देश हैं – ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका। इन पांचों देशों की अर्थव्यवस्थाऔरऔर भी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अण्णा हजारे का खुला पत्र। भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने आंदोलन पर कांग्रेस-नीत यूपीए सरकार की प्रतिकूल टिप्पणियों ने सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हजारे को आहत कर दिया है। इसके बाद उन्होंने बुधवार, 6 अप्रैल को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नाम दो पन्नों का एक खुला पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने प्रधानमंत्री ने गुजारिश की है कि वे आंदोलन में दोष निकालने और इसके पीछे किसी साजिश के संदेह से बचें। उनका कहना है किऔरऔर भी

राष्ट्रीय ज्ञान आयोग के अध्यक्ष और पब्लिक इनफॉर्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर व इनोवेशंस पर प्रधानमंत्री के सलाहकार सैम पित्रोदा का मानना है कि सतत वृद्धि के लिए शोध की जरूरत है। उन्होंने कहा कि हमें कल की चुनौतियों का सामना करने के लिए स्वास्थ्य, ऊर्जा, प्रशासन और बुनियादी ढांचे समेत जीवन के तमाम क्षेत्रों में शोध को बढ़ावा देना होगा। शोध की जरूरत पर बल देते हुए पित्रोदा ने देश में पब्लिक इनफार्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए 20 अरब अमेरिकीऔरऔर भी

स्टैंप ड्यूटी का ज्यादा होना देश के रीयल एस्टेट क्षेत्र में काले धन के पैदा होने का बड़ा कारण है। यह कहना देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का। उनके मुताबिक रीयल एस्टेट सौदों में पारदर्शिता लाने की राह में स्टैंप ड्यूटी बहुत बड़ी बाधा है और इस क्षेत्र में काले धन को आने से रोकने के लिए ऐसे शुल्क की दरों को कम करना जरूरी है। राजधानी दिल्ली में आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में प्रधानमंत्री ने कहा,औरऔर भी

लोकसभा में जुलाई 2008 में विश्वास मत के दौरान ‘वोट के बदले नोट घोटाले’ संबंधी विकिलीक्स के खुलासों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को खीझ और बचाव की मुद्रा में ला खड़ा दिया है। वे जहां संसद में विपक्ष को जनता द्वारा खारिज किए जाने की दुहाई देते रहे, वहीं संसद से बाहर उन्होंने खुद अपने पाक-साफ होने की दलील थी। उनका सांसदों की खरीद-फरोख्त से साफ इनकार नहीं किया। बस इतना कहते रहे कि उनका इससे कोईऔरऔर भी

मंगलवार से द हिंदू अखबार में विकीलीक्स के सहयोग से किए जा रहा खुलासा आज, गुरुवार को संसद में हंगामे का सबब बन गया। हिंदू की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2008 में यूपीए की पिछली सरकार को बचाने और विश्वास मत हासिल करने के लिए सांसदों 50 से 60 करोड़ रुपए दिए गए थे। इस मसले पर विपक्ष ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफे की मांग को लेकर लोकसभा में भारी हंगामा किया। संसद मेंऔरऔर भी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबे समय से आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हजारे को लोकपाल विधेयक पर चर्चा करने के लिए आमंत्रित किया है। अन्ना हजारे ने सशक्त लोकपाल विधेयक बनाए जाने में सरकार के विफल होने की स्थिति में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर जाने की धमकी दे रखी है। प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री ने हजारे को इस विधेयक से संबंधित चर्चा के लिए बुलाया है। इस संबंध मेंऔरऔर भी

आर्थिक समीक्षा ने अच्छे बजट की जमीन तैयार कर दी है। वित्त वर्ष 2011-12 में 9 फीसदी आर्थिक विकास की दर। कृषि और इंफ्रास्ट्रक्टर पर जोर। चालू खाते के घाटे को कम करने की चिंता जो वित्त मंत्री को विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) को खुश रखने को मजबूर किए रहेगी। मल्टी ब्रांड रिटेल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की इजाजत। बीमा व बैंकिंग क्षेत्र के सुधार। काले धन और भ्रष्टाचार के खिलाफ ठोस कदम। ऊपर से हल्के सेऔरऔर भी