जिस पश्चिग बंगाल में ममता बनर्जी मां, माटी, मानुष के नारे पर सत्तासीन हुई हैं, उसी के एक इलाके की माटी हजारों मानुषों के लिए श्राप बन गई है। सुंदरवन के गोसाबा में हजारों किसानों के लिए आने वाला मानसून बारिश की बूंदें भले ही ले आए, लेकिन खारी धरती की फसलें तब भी हरी नहीं होंगी। दो साल पहले आए आइला चक्रवात से खारी हुई मिट्टी का अभिशाप झेलने को विवश हैं ये किसान। एक ओरऔरऔर भी

बाल दिवस। चाचा नेहरू का जन्मदिन। पत्र-पत्रिकाओं में सरकारी विज्ञापन। सब शोशेबाजी है, नारा है। हकीकत यह है कि इन दिनों देश में बच्चों का पलायन तेजी से बढ़ रहा है और उसी अनुपात में उनके साथ उत्पीड़न की घटनाएं और आंकड़े भी। खास तौर से मजदूरी के लिए बच्चों को एक राज्य से दूसरे राज्य में आदान-प्रदान किए जाने का सिलसिला जोर पकड़ता जा रहा है। विभिन्न शोध-सर्वेक्षणों और रिपोर्टों से यह जाहिर भी हो रहाऔरऔर भी