राजस्थान के बाडमेर इलाके में बड़े पेट्रोलियम तेल भंडार की मालिक, केयर्न इंडिया शेयर बाजार से डीलिस्ट हो सकती है। समाचार एजेंसी प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीओ) के अनुसार वेदांता समूह केयर्न इंडिया की 51 फीसदी हिस्सेदारी 800-850 करोड़ डॉलर (37250 करोड़ रुपए से 39590 करोड़ रुपए) में खरीदने जा रहा है। इस सौदे की औपचारिक घोषणा अगले हफ्ते सोमवार को हो सकती है। कंपनी में नियंत्रकारी स्थिति हासिल करने के बाद वेदांता समूह केयर्न इंडिया कोऔरऔर भी

बिलकेयर लिमिटेड (बीएसई कोड-526853) दवा उद्योग के लिए पैकेजिंग सामग्री वगैरह बनाती है। उसने इसी 2 अगस्त को घोषित किया कि उसकी जर्मन सब्सिडियरी ने अमेरिका, जर्मनी, इटली व भारत में सक्रिय कंपनी इनिओस के ग्लोबल फिल्म बिजनेस का अधिग्रहण कर लिया है। इनिओस के इस डिवीजन का कारोबार 24 करोड़ यूरो (1458 करोड़ रुपए) का है, जबकि बिलकेयर ने इसे 10 करोड़ यूरो (607 करोड़ रुपए) में हासिल किया है। बिलकेयर से अभी देश-विदेश की कुलऔरऔर भी

सी अच्युतन कमिटी की तरफ से पेश किए गए नए टेकओवर कोड को अपनाने में अभी वक्त लगेगा। यह भी संभव है कि पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी 31 अगस्त तक प्रतिक्रियाएं मिलने के बाद इसमें फेरबदल कर दे। लेकिन अगर इसकी मूल सिफारिशों को अपना लिया गया तो इससे देश की कम से कम 76 बड़ी सूचीबद्ध कंपनियों के विदेशी अधिग्रहण का खतरा बढ़ जाएगा। ब्रोकर फर्म एसएमसी कैपिटल्स के एक अध्ययन के अनुसार बीएसई-500 मेंऔरऔर भी

पिरामल हेल्थकेयर के जेनरिक दवा व्यवसाय को अमेरिकी कंपनी एब्बॉट द्वारा खरीदे जाने के लगभग एक महीने बाद ही भारतीय दवा उद्योग में एक और बड़ा सौदा होने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज अपना फॉर्मूलेशन बिजनेस बहुराष्ट्रीय दवा कंपनी फाइजर को 250 करोड़ डॉलर (लगभग 11,560 करोड़ रुपए) में बेचने जा रही है। इसके तहत कंपनी के चेयरमैन व प्रवर्तक के. अंजी रेड्डी की पूरी की पूरी 25.77 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी फाइजर कोऔरऔर भी

आईओएल नेटकॉम देश में आईपीटीवी (इंटरनेट प्रोटोकॉल टेलीविजन) और वीओडी (वीडियो ऑन डिमांड) सेवा शुरू करनेवाली पहली कंपनी है। आईपीटीवी सेवा वह एमटीएनएल के लिए मुंबई और कोलकाता में उपलब्ध कराती है। वह ब्रॉडबैंड से लेकर म्यूजिक ऑन डिमांड, ई-लर्निंग, ई-कॉमर्स वगैरह में भी अपने पैर फैला रही है। लेकिन इसी सारे विस्तार के बीच उस पर रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) की नजर पड़ गई है। बाजार में जबरदस्त चर्चा उठी हुई है कि मुकेश अंबानी टेलिकॉम क्षेत्रऔरऔर भी

अभी रिलायंस समूह के दोनों धड़ों में 23 मई को नो-कम्पीट करार के खात्मे की घोषणा को महीने भर भी नहीं बीते हैं कि मुकेश अंबानी ने बड़े पैमाने पर दूरसंचार सेवाओं में उतरने का एलान कर दिया। शुरुआत ब्रॉडबैंड सेवाओं से होगी। मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ने देश के 22 सर्किलों में ब्रॉडबैंड वायरलेस एक्सेस (बीडब्ल्यूए) स्पेक्ट्रम लाइसेंस जीतनेवाली इकलौती कंपनी इनफोटेल ब्रॉडबैंड की 95 फीसदी इक्विटी खरीदकर उसे अपनी सब्सिडियरी बना लिया है।औरऔर भी

शुक्रवार, 28 मई को बाजार बंद होने के बाद हमने कर्नाटक बैंक के बारे में लिखा था कि कैसे वह अधिग्रहण के लिए बहुत सस्ता लक्ष्य हो सकता है। तब उसका बंद भाव बीएसई में 150.75 रुपए था। कर्नाटक बैंक के बारे में ऐसी कोई सूचना या कयास किसी भी मीडिया में मैंने नहीं देखा। लेकिन सोमवार को यह शेयर बीएसई में 13.17 फीसदी बढ़कर 170.60 पर बंद हुआ। ऊपर में तो यह करीब 16.5 फीसदी बढ़करऔरऔर भी

जिस तरह आईसीआईसीआई बैंक ने राजस्थान बैंक को खरीद लिया है, उसी तरह कर्नाटक बैंक भी किसी दिन बिक सकता है। बस दिक्कत यह है कि इसके सौदे को अंजाम देने के लिए किसी भी मर्चेंट बैंकर को बड़ी मशक्कत करनी पड़ेगी क्योंकि इसका कोई प्रवर्तक ही नहीं है। इसकी सारी की सारी 133.99 करोड़ रुपए की इक्विटी 82,043 शेयरधारकों में विभाजित है। बड़े शेयरधारकों में 16 देशी-विदेशी संस्थाएं ऐसी हैं जिनके पास कर्नाटक बैंक की 31.37औरऔर भी

शिवालिक बाईमेटल कंट्रोल्स का शेयर आज, गुरुवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) में 12.20 फीसदी उछला है। दिन में यह 35.80 रुपए पर भी गया जो इसके 52 हफ्ते का उच्चतम स्तर जो इसने 27 अप्रैल 2010 को हासिल किया था। वैसे, करीब दो महीने से इसमें इसी तरह ऊपर-नीचे हो रहा है। 5 अप्रैल को जब हमने इसकी चर्चा की थी, तब इसका भाव था 29.95 रुपए। उसी समय बाजार में सुगबुगाहट चल रही थी किऔरऔर भी