महिंद्रा एंड महिंद्रा समूह का हिस्सा बन चुकी महिंद्रा सत्यम तीन साल पुराने उस दाग को पूरी तरह निकाल देने में लगी है, जब उसका नाम सत्यम कंप्यूटर सर्विसेज हुआ करता था और उसके मूल प्रवर्तक रामालिंगा राजू ने कंपनी के खातों में करीब 14,000 करोड़ रुपए की गड़बड़ी की थी। राजू ने 7 जनवरी 2009 को किए गए खुलासे में खातों में करीब 7800 करोड़ के घपले की बात मानी थी। लेकिन बाद में यह रकमऔरऔर भी

सहारा समूह को सुप्रीम कोर्ट से फौरी राहत मिल गई है। अदालत ने सैट (सिक्यूरिटीज अपीलेट ट्राब्यूनल) के उस आदेश पर रोक लगा दी है जिसमें उसने सहारा समूह की दो कंपनियों को 17,400 करोड़ रुपए निवेशकों को लौटाने के लिए कहा था। सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश एस एच कापड़िया की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सहारा समूह की याचिका को स्वीकार कर लिया और मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 जनवरी की तारीख मुकर्रर कीऔरऔर भी

एक तरफ खाद्य सुरक्षा विधेयक को संसद में रखने की तैयारी हो चुकी है, दूसरी तरफ खाद्यान्नों की खरीद व रखरखाव की सबसे बड़ी सरकारी एजेंसी भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने स्वीकार किया है कि अप्रैल 2000 से लेकर मार्च 2011 तक के दस सालों में विभिन्न वजहों से 7.42 लाख टन अनाज बरबाद हो गया है। इस अनाज की कीमत 330.71 करोड़ रुपए आंकी गई है। एफसीआई ने सूचना का अधिकार कानून के तहत सामाजिक कार्यकर्ताऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सहारा समूह को फौरी राहत दे दी। उसने सिक्यूरिटीज अपीलीय ट्राइब्यूनल (सैट) के 18 अक्टूबर 2011 के उस आदेश पर स्टे दे दिया जिसमें सहारा समूह की दो कंपनियों – सहारा इंडिया रीयल एस्टेट (वर्तमान नाम, सहारा कमोडिटी सर्विसेज) और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन को ओएफसीडी (ऑप्शनी फुली कनर्टिबल डिबेंचर) इश्यू के 2.3 करोड़ निवेशकों को छह हफ्ते के भीतर उनके द्वारा जमा कराए गए करीब 17,400 करोड़ रुपए लौटाने को कहाऔरऔर भी

2जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाले में फंसी पांच कॉरपोरेट हस्तियों को सुप्रीम कोर्ट की ओर से जमानत मिल गई है। बुधवार को देश की सर्वोच्च अदालत ने पांच-पांच लाख रुपये के दो मुचलकों पर इन आरोपियों को रिहा करने का आदेश दिया। जमानत पानेवाले पांच आरोपी अधिकारी हैं – स्‍वान टेलिकॉम के विनोद गोयनका, यूनिटेक वायरलेस के संजय चंद्रा और रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी समूह के गौतम दोशी, सुरेंद्र पिपारा और हरि नायर। ये आरोपी पिछले सात महीनेऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया जिसमें पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के चेयरमैन के पद पर यू के सिन्हा की नियुक्ति को चुनौती दी गई है। यह याचिका भारतीय वायुसेना के पूर्व प्रमुख एस कृष्णास्वामी, रिटायर्ड आईपीएस अफसर जुलियो रिबेरो और सीबीआई के पूर्व निदेशक बी आर लाल की तरफ से दायर की गई है। याचिका पर गौर करते हुए मुख्य न्यायाधीश एस एच कापड़िया की पीठ नेऔरऔर भी

हमारे शेयर बाजार और यहां के उस्तादों की बलिहारी है। जो कंपनी सिर्फ एक खनिज, कोयला निकालती है, उस कोल इंडिया का शेयर 34.54 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है और जो कंपनी लौह अयस्क ही नहीं, तांबा, रॉक फॉस्फेट, लाइमस्टोन, डोलोमाइट, जिप्सम, टिन, टंगस्टेन, बेंटानाइट और मैग्नेसाइट से लेकर हीरे तक का खनन करती है, उसका शेयर मात्र 14.66 के पी/ई पर डोल रहा है। वह भी तब, जब कर्नाटक में अवैध खनन परऔरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश मार्कन्डेय काटजू को केंद्र सरकार ने भारतीय प्रेस परिषद का अध्यक्ष मनोनीत कर दिया है। इस बारे में बुधवार को बाकायदा अधिसूचना जारी कर दी गई। जस्टिस काटजू भ्रष्टाचारियों को लैंप-पोस्ट से लटकाने जैसे दो-टूक फैसले सुनाकर आम लोगों में काफी लोकप्रिय हो चुके हैं। वे मूलतः कश्मीरी हैं। लेकिन उनकी शिक्षा-दीक्षा इलाहाबाद में हुई है। जस्टिस मार्कन्‍डेय काटजू का जन्‍म 20 सितम्‍बर, 1946 को हुआ था। वे इलाहाबाद विश्व विद्यालय मेंऔरऔर भी

करीब दो हफ्ते से देश में छिड़ा 32-26 का विवाद आखिरकार अपना रंग ले आया। तय हुआ है कि अभी गरीबी रेखा का जो भी पैमाना है और योजना आयोग राज्यवार गरीबी का जो भी अनुमान लगाए बैठा है, आगे से उसका कोई इस्तेमाल ग्रामीण इलाकों में गरीबों की आर्थिक मदद के लिए बनी केंद्र सरकार की योजनाओं या कार्यक्रमों में नहीं किया जाएगा। योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोटेंक सिंह अहूवालिया और केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयरामऔरऔर भी

केंद्रीय गृह मंत्री पी चिदंबरम हर तरफ से घिर गए हैं। लेफ्ट से लेकर राइट तक उनके इस्तीफे और 2जी घोटाले में उनकी भूमिका की सीबीआई जांच की मांग कर रहा है। सूचना अधिकार के तहत हासिल वित्त मंत्रालय द्वारा इसी साल मार्च में प्रधानमंत्री को लिखे हुए उस पत्र से बवाल मचा हुआ है जिसमें कहा गया है कि तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम चाहते तो पहले आओ पहले पाओ की नीति पर 2जी स्पेक्ट्रम काऔरऔर भी