शेयर बाज़ार कठिन दौर से गुजर रहा है। भारी अनिश्चितता है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम इसे और बढ़ा सकते हैं। शेयरों की चाल दिशाहीन है। मजबूत शेयर गिरने पर खरीदो तब भी गिर जाते हैं। ऐसे में ट्रेडिंग में कुछ दिन का विराम ज़रूरी हो गया। इसे देखते हुए सोमवार, 26 नवंबर से दस दिन की विपश्यना साधना पर जा रहा हूं। इसलिए अगला कॉलम सोमवार, 10 दिसंबर को आएगा। कल 25 नवंबर के बादऔरऔर भी

पीपल की पत्तियां जरा-सी हवा पर उछलने-कूदने लगती हैं। वहीं बरगद और उसकी पत्तियां बड़े से बड़ा तूफान भी शांति से झेल जाती हैं। लेकिन जीवन में दोनों की अपनी जगह है, अपनी अहमियत है।और भीऔर भी

जिस काम को करने से मन को शांति मिले, जिसे करते हुए मन में शांति हो और जिसे करने के बाद मन में शांति रहे, वही काम हमारे लिए सही काम है। लेकिन काम चुनने की यह आजादी मिले तो सही।और भीऔर भी

शेयर बाजार इस समय सर्द-गर्द हो चुका है। बाजार के लोगों में प्रति निवेशक 10,000 रुपए के भी स्टॉक खरीदने की चाह नहीं रह गई है। यही दिखाता है कि रिटेल निवेशक सचमुच दीवालिया होने की किस हालत में पहुंच चुके हैं। बाजार अब सुपर एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल्स), डीआईआई व एफआईआई के लिए ही रह गया है और इस सूरत में आखिरकार होगा यह कि बहुत सारे सुपर एचएनआई आनेवाले सालों में सामान्य निवेशक बनकर रहऔरऔर भी

डीएमके के छह मंत्रियों का केंद्र सरकार से बाहर निकलना एक नौटंकी है जो सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस की रजामंदी से रची जा रही है। सारे मंत्रियों के हटने के बावजूद यूपीए सरकार को डीएमके का बाहर से समर्थन जारी है, जारी रहेगा। इसलिए केंद्र सरकार के वजूद को कोई खतरा नहीं है। हां, संसद के भीतर समीकरण थोड़े जरूर बदल जाएंगे। डीएमके के 18 सांसद जाएंगे तो मुलायम की समाजवादी पार्टी के 22 सांसद सरकार को मिलऔरऔर भी