कौन है बे!
आज के जमाने में अतीत की धौंस का कोई मतलब नहीं है। आप क्या थे या क्या रह चुके हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मायने यह रखता है कि आप अभी क्या हैं और आगे क्या हो सकते हैं।और भीऔर भी
आज के जमाने में अतीत की धौंस का कोई मतलब नहीं है। आप क्या थे या क्या रह चुके हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। मायने यह रखता है कि आप अभी क्या हैं और आगे क्या हो सकते हैं।और भीऔर भी
सब धान बाइस पसेरी तौलनेवाले पंसारी की दुकान चला सकते हैं, नया नहीं ला सकते। समाज, संस्था या कहीं भी बदलाव लाना हो तो पहले उसके आज को बड़ी बारीकी से गहना-समझना पड़ता है।और भीऔर भी
भूत, वर्तमान और भविष्य की अनुभूति के बीच सही संतुलन जरूरी है। अतीत मिट जाए तो हम शब्दहीन, वर्तमान खो जाए तो अवसादग्रस्त और भविष्य न दिखे तो निर्जीव मशीन बन जाते हैं।और भीऔर भी
पैर वर्तमान में और नापते हैं भविष्य को! कैसे संभव है? हम बहकने लगते हैं कि ये होगा तो वो करेंगे, ऐसा होगा तो वैसा करेंगे; जबकि तैयारी यह होनी चाहिए कि ये हुआ तो क्या करेंगे, वो हुआ तो क्या करेंगे।और भीऔर भी
जो धारा की सतह को देखते-समझते हैं, आज उनका है। लेकिन जो सतह के नीचे चल रही अंतर्धाराओं को अभी से देख लेते हैं, कल उन्हीं का है। भविष्य कहीं आसमान से नहीं टपकता। वह वर्तमान के गर्भ से ही उपजता है।और भीऔर भी
हम सभी अपने वर्तमान से दुखी, अतीत पर मुग्ध और भविष्य को लेकर डरे हुए क्यों रहते हैं? क्या हम आज को लेकर मगन, बीत चुके पल के प्रति निर्मम और आनेवाले कल को लेकर बिंदास नहीं हो सकते?और भीऔर भी
आज के जरूरी खर्च हम कल पर नहीं टाल सकते और कल का निवेश आज रोक नहीं सकते क्योंकि उपभोग तो आज की जरूरत पूरा करने के लिए ही है जबकि निवेश आज की नहीं, कल की सोचकर आज किया जाना है।और भीऔर भी
© 2010-2025 Arthkaam ... {Disclaimer} ... क्योंकि जानकारी ही पैसा है! ... Spreading Financial Freedom