बड़ी आम-सी बात हो गई है कि जब दुनिया के बाजार बढ़ते हैं तो हमारे बाजार में करेक्शन आ जाता है। भारतीय शेयर बाजार कल काफी बढ़े। लेकिन आज जब दुनिया के बाजार बढ़त पर थे तब हम कमोबेश ठंडे पड़े रहे। यह काफी समय से हो रहा है। हो सकता है कि यह इंट्रा-डे ट्रेडरों को छकाने की चाल हो। व्यापक तौर पर माना जा रहा है कि निफ्टी का 5500 के ऊपर जाना बेहद मुश्किलऔरऔर भी

मुझे पहले से आभास था और अब मैं सुन भी रहा हूं कि रिलांयस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) अपने 4 करोड़ ट्रेजरी शेयर (बगैर वोटिंग अधिकार वाले शेयर) 1098 रुपए के भाव से बेचेगी और हो सकता है कि ऐसा कल सुबह ही हो जाए। इससे बाजार में चहक बनी रह सकती है। बाजार अब गति पकड़ रहा है क्योंकि पहली तिमाही के लगभग सारे नतीजे जा चुके हैं और बस पूंछ बाकी रह गई है। अगला आवेग यहऔरऔर भी

रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति से ज्यादा उम्मीद करने जैसा कुछ था ही नहीं। रेपो दर में चौथाई फीसदी की वृद्धि बाजार की लय को नहीं तोड़ सकती थी। बाजार अब तेजी के दौर में जा पहुंचा है। मजाक बहुत हो चुका है। अभी तक ऑपरेटरों ने रिटेल निवेशकों पर सवारी गांठी है और शेयर भावों को अपने हिसाब से तोड़ा-मरोड़ा है। पहले भारती एयरटेल को डाउनग्रेड किया गया और फिर अपग्रेड। अब मारुति को डाउनग्रेड कियाऔरऔर भी

विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई), एलआईसी और म्यूचुअल फंड हमारे बाजार के बड़े खिलाड़ी हैं। रिलायंस समूह का ऑपरेटिंग तंत्र धीरूभाई के जमाने से ही सक्रिय है। लेकिन सात अन्य बड़े ऑपरेटर हैं जिनके हाथ बड़े लंबे हैं, जिन पर सेबी हाथ नहीं रख पाती। ये हैं – आरजे (राकेश झुनझुनवाला), केपी (केतन पारेख उर्फ पिंक पैंथर उर्फ वन मैन आर्मी), आरके/जीएस (राधाकृष्ण दामाणी उर्फ ओल्ड फॉक्स), आरडी (रमेश दामाणी),  एके (अजय कयान), एमएम (मनीष मारवाह) और एडीऔरऔर भी

यह सच है कि हाथी के दांत दिखाने के और, खाने के और होते हैं। लेकिन यह बात मुझे अभी-अभी पता चली है कि हमारे पूंजी बाजार में भी ऊपर-ऊपर जो दिखाया जाता है, हकीकत उससे काफी जुदा होती है। जैसे, यह कि बहुत सारी कंपनियों के आईपीओ फंडेड होते हैं। इस अर्थ में ही नहीं कि उनमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशन खरीदार (क्यूआईबी), एंकर इनवेस्टर और एचएनआई पहले से ही इश्यू के मर्चेंट बैंकर से बातचीत के बादऔरऔर भी

आखिरकार रोलओवर जाते-जाते थोड़ी तकलीफ दे ही गया। हालांकि निफ्टी खुद को 5300 के स्तर पर टिकाए रखने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसमें दम नहीं दिख रहा। वैसे तो हमने कल ही शॉर्ट कॉल (बेचने की सलाह) हटा दी थी, लेकिन निफ्टी के 5140 पर जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसी के मद्देनजर हमने कुछ ऐसी लांग कॉल (खरीदने की सलाह) दी हैं जिन्हें सबसे ज्यादा रक्षात्मक माना जाता है। जोऔरऔर भी