बिड़ला कॉरपोरेशन को भले ही एम पी बिड़ला समूह की फ्लैगशिप कंपनी कहा जाए। लेकिन हकीकत में वह आर एस लोढ़ा के दिवंगत हो जाने के बाद पूरी तरह उनके बेटों हर्ष व आदित्य लोढ़ा के नियंत्रण में है। माधव प्रसाद बिड़ला ने यह कंपनी 1919 में बनाई थी। उनके मरने के बाद इसका मालिकाना उनकी विधवा प्रियंवदा के हाथ में आ गया है। निःसंतान प्रियंवदा ने वसीयत अपने चार्टर्ड एकाउंटेंट आर एस लोढ़ा के नाम लिखऔरऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) को लघु व मध्यम स्तर की कंपनियों (एसएमई) के लिए अलग एक्सचेंज शुरू करने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। बीएसई के प्रबंध निदेशक व सीईओ मधु कन्नन ने बुधवार को यह जानकारी देते हुए कहा, “हमें खुशी है कि सेबी से हमें लघु व मध्यम उद्यमों के लिए नया एक्सचेंज शुरू करने का सैद्धांतिक अनुमोदन मिल गया है। यह भारत के निवेशकों को बेहतर उत्पाद वऔरऔर भी

टेक्समैको रेल एंड इजीनियरिंग लिमिटेड पहले के.के. बिड़ला समूह की कंपनी टेक्समैको लिमिटेड में समाहित थी। लेकिन अक्टूबर 2010 से हैवी इंजीनियरिंग व स्टील फाउंड्री डिवीजन को अलग कर नई कंपनी टेक्समैको रेल एड इंजीनियरिंग बना दी गई। अब मूल कंपनी टेक्समैको के पास रीयल एस्टेट व मिनी हाइडेल पावर प्लांट का धंधा ही बचा है। इस तरह टेक्समैको से निकली टैक्समैको रेल एंड इंजीनियरिंग ही एक तरह से असल कंपनी है जो मुख्यतः भारतीय रेल केऔरऔर भी

आईटीसी सिर्फ सिगरेट बनाती है, से सिगरेट भी बनाती है के सफर पर कायदे से बढ़ रही है। उसके धंधे का 57 फीसदी हिस्सा सिगरेट से इतर कामों से आने लगा है, हालांकि मुनाफे का 82 फीसदी हिस्सा अब भी सिगरेट से आता है। बाजार ने उसे सर-आंखों पर बिठा रखा है। इस साल सेंसेक्स का सबसे उम्दा स्टॉक बना हुआ है। पिछली तिमाही में सेंसेक्स गिरा है तो यह बढ़ा है। इस समय यह एक नहीं,औरऔर भी

अमर रेमेडीज इमामी, निरमा व घडी डिटरजेंट जैसी देशी कंपनी है जो फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) के बाजार में हिंदुस्तान यूनिलीवर व कॉलगेट जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों को टक्कर देने की कोशिश में लगी है। इसकी शुरुआत 1984 में स्वामी औषधालय प्रा. लिमिटेड के रूप में हुई जिसने आयुर्वेदिक मेडिसिनल रिसर्च व डेवलपमेंट का बीड़ा उठाया। यहीं से उसका मौजूदा नाम निकला जो उसने 1995 से अपना रखा है। कंपनी के बारे में और जानने से पहलेऔरऔर भी

चेन्नई की कंपनी जेमिनी कम्युनिकेशंस ने 13 मई को अपने सालाना नतीजे घोषित किए। कंपनी ने बढ़-चढ़कर बताया कि वित्त वर्ष 2010-11 में उसकी कुल आय 51 फीसदी बढ़ी और शुद्ध लाभ बढ़ा 98 फीसदी। प्रति शेयर लाभ (ईपीएस) हो गया अब 6.04 रुपए। मार्च 2011 की तिमाही में कुल आय में 116 फीसदी और शुद्ध लाभ में 227 फीसदी इजाफा। नतीजों के हो-हल्ले के बीच 13 मई को यह शेयर एकबारगी 19.90 रुपए से 18.34 फीसदीऔरऔर भी

एमआरएफ अलग है और एसआरएफ अलग। एमआरएफ टायर बनाती है, जबकि एसआरएफ टायर कॉर्ड फैब्रिक बनाती है जो साइकिल से लेकर भारी वाहनों तक के टायरों में इस्तेमाल होता है। एसआरएफ दुनिया में ‘नाइलोन 6’ टायर कॉर्ड और बेल्टिंग फैब्रिक की दूसरी सबसे बड़ी निर्माता है। बेल्टिंग फैब्रिक का उपयोग कनवेयर बेल्ट बनाने में होता है। कंपनी कोटेड फ्रैबिक्स भी बनाती है जो कृषि व रक्षा क्षेत्र में इस्तेमाल किए जाते हैं। रसायनों में वह फ्लूरो-केमिकल्स वऔरऔर भी

यह शेयर बाजार है प्यारे। यहां बड़ा अजब-गजब चलता रहता है। चांदी भले ही इधर पिटने लगी हो, लेकिन सोने की चमक अभी बाकी है। फिर भी सोने के धंधे में लगी कंपनियों को बाजार से कायदे का भाव नहीं मिल रहा। ज्यादातर कंपनियों के शेयर इस समय 10 से कम के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहे हैं। जैसे, गीतांजलि जेम्स का पी/ई अनुपात इस समय 7, श्रीगणेश ज्वैलरी का 5.9, सु-राज डायमंड्स का 2.8, वैभवऔरऔर भी

किसी कंपनी के होने का मूल मकसद होता है नोट बनाना और कंपनी को स्टॉक एक्सचेंजों में लिस्ट कराने का मकसद होता है, उसके स्वामित्व को जनता में बिखेर कर पूंजी की सुलभता व लाभ सुनिश्चित करना और कमाए गए लाभ को लाभांश या अन्य तरीकों से अपने शेयरधारकों तक पहुंचाना। अगर कोई लिस्टेड कंपनी लाभ नहीं कमा रही है तो उसके शेयरों में मूल्य खोजना खुद को धोखे में रखना या भयंकर रिस्क लेना है। किसीऔरऔर भी

एम्फैसिस बड़ी ठसक वाली कंपनी है। नाम तक सीधे नहीं लिखती। खुद को MphasiS लिखती है। लेकिन नाम से क्या! हमें तो काम से मतलब है। मुख्यतः बीपीओ (बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग) और रिमोट इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट या इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्नोलॉजी आउटसोर्सिंग (आईटीओ) सेवाओं सक्रिय है। दुनिया के 14 देशों में 29 ऑफिस हैं। धंधा अच्छा करती है। लेकिन उसका वक्त अभी अच्छा नहीं चल रहा है। पिछले कुछ महीनों से एडेलवाइस जैसी देशी और सीएलएसए जैसी विदेशी निवेश फर्मेंऔरऔर भी