21 की मौत, 150 से ज्यादा घायल। आज इनसे जुड़े हजार-दो हजार लोगों की ज़िंदगी यकीनन ठहर गई होगी। लेकिन मुंबई के बाकी करीब 205 लाख लोंगों की ज़िंदगी की जंग चलती रहेगी। आतंकवाद की यही सीमा है। यह हमारे जीवन में इतना खलल भी इसीलिए डाल पाता है क्योंकि इसके पीछे खास किस्म की राजनीति काम करती है। इसे सिर्फ खुफिया व सुरक्षा तंत्र की कमजोरी मानना गलत होगा। खैर, इस तरह के पत्थर फेंकने सेऔरऔर भी

इनफोसिस को भाईलोग धुने पड़े हैं। मौका मिला नहीं कि पीट डाला। पिछले महीने 20 जून 2011 को 2660.55 रुपए पर इसने 52 हफ्ते की तलहटी पकड़ी थी। कल नतीजों की घोषणा के बाद इसका पांच रुपए अंकित मूल्य का शेयर बीएसई (कोड – 500209) में 4.27% गिरकर 2794.25 रुपए पर और एनएसई (कोड – INFY) में 4.44% गिरकर 2791.55 रुपए पर बंद हुआ है। लगता है अभी और गिरेगा। [आगे बढ़ूं, इससे पहले एक छोटी-सी बात।औरऔर भी

गोकलदास एक्सपोर्ट्स का शेयर लंबे अरसे से 90-95 कर रहा है। बीच-बीच में कुछ हल्ला मचाकर इसे उठाया जाता है। फिर यह ठंडा पड़ जाता है। चार महीने पहले 10 मार्च को अचानक हल्ला उठा कि ब्लैकस्टोन ग्रुप कंपनी का प्रबंधन अपने हाथ में लेने जा रहा है। शेयर खटाक से उसी दिन 20 फीसदी ऊपरी सर्किट तक बढ़कर 94.95 रुपए से 113.90 रुपए पर पहुंच गया। अगले दिन 11 मार्च को 129.40 रुपए पर जाने केऔरऔर भी

कुछ कंपनियां ऐसी होती हैं जिनमें लंबे समय के निवेश को लेकर ज्यादा कुछ आगा-पीछा सोचने की जरूरत नहीं होती। बस यही देखना पड़ता है कि उन्हें सस्ते में पकड़ने का वक्त है कि नहीं। एचडीएफसी ऐसी ही कंपनी है। हाउसिंग फाइनेंस की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी कंपनी। हमारे यहां 30-32 साल के नए-नए नौकरी करनेवाले लोग भी जो लोन लेकर खटाक से घर के मालिक बन जा रहे हैं, वो पूरी सहूलियत और इस धंधेऔरऔर भी

सिंडीकेट बैंक का शेयर साल भर पहले आज ही के दिन 7 जुलाई 2010 को 91.65 रुपए की तलहटी पर था। इसके बाद 16 नवंबर 2010 को 164.20 रुपए के शिखर पर पहुंच गया। पिछले एक महीने में 118.60 रुपए से घटकर 115.40 रुपए पर आ गया है। लेकिन ब्रोकरेज फर्म आईसीआईसीआई सिक्यूरिटीज का कहना है कि अगले दस महीनों में यह 137 रुपए तक जा सकता है। यानी, इसमें 19 फीसदी से ज्यादा रिटर्न मिल सकताऔरऔर भी

सेबी के कार्यकारी निदेशक जे एन गुप्ता ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए गए एक इंटरव्यू में भारतीय पूंजी बाजार नियामक संस्था को अमेरिका जैसे विकसित पूंजी बाजार की नियामक संस्था से बेहतर बताया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या सेबी का भारतीय बाजार पर अमेरिका के एसईसी (सिक्यूरिटीज एक्सचेंज कमीशन) की तुलना में ज्यादा नियंत्रण है तो उनका कहना था – यकीकन। श्री गुप्ता का कहना था कि सेबी ने तमाम ऐसे उपाय करऔरऔर भी

एवीटी नेचुरल प्रोडक्ट्स का शेयर लगातार कुलांचे मार रहा है। 28 सितंबर 2010 से 28 जून 2011 के बीच के नौ महीनों में वह 88.40 रुपए के न्यूनतम स्तर से 287.90 रुपए के उच्चतम स्तर तक पहुंच गया। साल भर से भी कम वक्त में 225 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न! बीते जून माह में ही यह दोगुना हो गया है। एक जून को नीचे में 140.15 रुपए पर था और 28 जून को ऊपर में 287.90औरऔर भी

आंध्रा शुगर्स सिर्फ चीनी नहीं बनाती। वह इसके अलावा एल्कोहल व उससे संबंधित रसायन, एस्पिरिन, क्लोरो एल्कली – सल्फ्यूरिक एसिड, सुपर फॉस्फेट व कॉस्टिक सोडा और बिजली तक बनाती है। इन सभी रसायनों से उसे फायदा हो रहा है, जबकि चीनी उसके गले का कंटक बन गई है। वित्त वर्ष 2010-11 के नतीजों के अनुसार चीनी से हुई उसका बिक्री साल भर पहले के 211.42 करोड़ रुपए से 51.75 फीसदी घटकर 102.01 करोड़ रुपए रह गई औरऔरऔर भी

कुछ कंपनियों का दायरा इतना बड़ा होता है कि स्टैंड-अलोन नतीजे उनकी पूरी स्थिति बयां नहीं करते। टाटा मोटर्स ऐसी ही एक कंपनी जिसका दायरा वाहनों के हर सेगमेंट से लेकर देश-विदेश तक फैला हुआ है। ट्रक, सेना के विशाल ट्रक, मिनी ट्रक, बस और बड़ी कार से लेकर नैनो तक। टाटा सफारी से लेकर जैगुआर और लैंड रोवर तक। इसका शेयर 6 दिसंबर 2010 को 1381.40 रुपए का शिकर पकड़ने के बाद नीचे का रुख किएऔरऔर भी

वायेथ लिमिटेड का शेयर 2 जून से 30 जून के बीच 875 रुपए से 965 रुपए पर पहुंच गया। लेकिन महीने भर में 10.28 फीसदी बढ़ जाने के बावजूद यह बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों में सबसे सस्ता शेयर है। फिलहाल 18.52 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। हालांकि नोवार्टिस का शेयर इससे भी कम 18.15 के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है, लेकिन वो कंपनी तो विदेशी प्रवर्तक की 76.42 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी के साथऔरऔर भी