नहीं समझ में आता कि शेयर बाजार में यह किसके करमों की गति और कौन-सी होनी है जो सब कुछ अच्छा होते हुए भी किसी कंपनी के शेयर के साथ बुरा हो जाता है। सही संदर्भ के लिए पहले संत कबीर का पूरा पद, “करम टारे नाहिं टरी। मुनि वसिष्ठ से पण्डित ज्ञानी साधि के लगन धरी। सीता हरन मरन दसरथ को, वन में बिपत परी। कहं वह फन्द कहां वह पारिधि, कहं वह मिरग चरी। कोटिऔरऔर भी

ज़िंदगी कभी एकसार नहीं हो सकती। उसमें उतार-चढ़ाव आते ही हैं। इसी तरह शेयर बाजार और अलग-अलग शेयरों के साथ उतार-चढ़ाव बड़ा स्वाभाविक है। यहां से कमाने के लिए बड़ा धैर्य रखना पड़ता है। खासकर तब, मामला लांग टर्म या लंबे समय का है। हमने इसी कॉलम में ग्रेफाइट इंडिया के बारे में सबसे पहले 4 मई 2010 को लिखा था। तब इसका दो रुपए अंकित मूल्य का शेयर 104 रुपए के आसपास चल रहा था औरऔरऔर भी

रिजर्व बैंक गवर्नर डी सुब्बाराव ने साफ कह दिया है कि ब्याज दरों के बढ़ने का चक्र अब पूरा हो गया है और आगे इनमें कमी ही आएगी। ऊपर से लगता है कि ब्याज दर ऊंची रहने से बैंकों को फायदा होता है। लेकिन हकीकत यह है कि ब्याज घटने से बैंकों का धंधा बढ़ता है। ब्याज घटने और धंधा बढ़ने की इसी उम्मीद में बैंकों के शेयर अब बढ़ने लगे हैं। कल सेंसेक्स 1.46 फीसदी बढ़ाऔरऔर भी

मैं कोई लंबी-चौड़ी बात नहीं करता। क्या करूं! लंबी नहीं, छोटी नजर है अपनी। साल-दो साल भी नहीं, दस-पंद्रह दिन की सोचता हूं। किसी की टिप्स नहीं, ठोस खबरों पर काम करता हूं। इन्हीं के आधार पर आपको बता रहा हूं कि जागरण प्रकाशन में तेजी आनेवाली है। इसका शेयर दस-पंद्रह दिन में 110 रुपए को पार कर सकता है। यानी, इसमें खटाखट दस फीसदी तक का रिटर्न मिल सकता है। पांच फीसदी तो कहीं नहीं गया।औरऔर भी

इंडसइंड बैंक, लगता है जैसे सीधे सिंधु घाटी सभ्यता से निकला चला आ रहा हो। ऊपर से हिंदुजा समूह से वास्ता। 1994 में शुरुआत हुई अनिवासी भारतीयों से जुटाई गई 100 करोड़ रुपए की पूंजी के साथ, जिसमें से 60 करोड़ रुपए प्राइवेट प्लेसमेंट और बाकी 40 करोड़ रुपए सीधे सहयोग से आए। बैंक लगातार बढ़ रहा है। बड़े ग्राहकों के चुनिंदा समूहों को पकड़ने की उसकी रणनीति है। मसलन, देश के दोनों प्रमुख स्टॉक एक्सचेंजों बीएसईऔरऔर भी

रिलायंस इंडस्ट्रीज को बाजार का किंग यूं ही नहीं कहा जाता। धीरूभाई के जमाने से ही कंपनी अपने शेयरों को ज्यादा दबने नहीं देती। इसलिए उसके लाखों शेयरधारक हमेशा खुश ही रहते आए हैं। इधर उसका शेयर चालू वित्त वर्ष 2011-12 की तीन तिमाहियों में 35.5 फीसदी का गोता लगा गया तो यह रिलायंस की शेयरधारक संस्कृति के खिलाफ था। सो, धीरूभाई की विरासत के अनुरूप मुकेश अंबानी ने तय कर लिया कि कंपनी अपने शेयर वापसऔरऔर भी

प्रकाश की गति से भी तेज कोई गति निकल आए तो शायद भविष्य को पहले से देख लेना संभव हो जाए। लेकिन अभी तो भविष्य को लेकर सारी ‘वाणियां’ मूलतः कयासबाजी हैं। फिर भी शेयर बाजार भविष्य को समेटकर चलता है तो बड़ी उहापोह है कि यहां किसकी ‘वाणी’ को सही माना जाए? साल भर पहले प्रमुख ब्रोकरेज फर्म एसएमसी ग्लोबल ने 2011 के टॉप 11 पिक्स में क्रॉम्प्टन ग्रीव्स को शुमार किया था। उसका कहना थाऔरऔर भी

बौद्धिक संपदा के मामले में हैदराबाद की दवा कंपनी सुवेन लाइफ साइंसेज बड़ी समृद्ध कंपनी है। वह बायोफार्मा कंपनी है। सीधे बाजार में नहीं, बल्कि नई-नई दवाएं खोजकर उनके व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए दुनिया भर की कंपनियों को बेचती है। वह खोजे गए नए-नए रासायनिक यौगिकों के पेटेंट लेती रहती है। पिछले ही महीने उसे ऑस्ट्रेलिया व कनाडा से चार उत्पादों के पेटेंट मिले हैं। ये उत्पाद अल्ज़ाइमर, अटेंशन डेफिसिएंट हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर, पार्किन्सन, सिज़ोफ्रेनिया व हटिंग्टनऔरऔर भी

शेयर बाजार में भले ही छोटे समय में ऑपरेटरों और उस्तादों की चलती हो, लेकिन लंबे समय में हमेशा निवेशकों की ही चलती है। बस जरूरत है तो मजबूत व संभावनामय कंपनियों के चयन की। और, बाजार में ऐसी कंपनियों की कोई कमी नहीं है। एक ताजा अध्ययन में बाजार में लिस्टेड ऐसी 500 कंपनियों की सूची पेश की गई है, जिन्होंने पिछले दस सालों (नवंबर 2001 से लेकर नवंबर 2011) में निवेशकों को लाभांश व शेयरोंऔरऔर भी

यहां कुछ भी अकारण नहीं होता। जो कुछ भी होता है, उसके पीछे कोई न कोई कारण जरूर होता है। यह हमारी ही सीमा है कि हम उस कारण को देख नहीं पाते। सुज़लॉन एनर्जी का शेयर बीते साल अप्रैल में 58.45 रुपए पर जाने के बाद गिरना शुरू हुआ तो गिरता ही चला गया। नए साल के पहले कारोबारी दिन 2 जनवरी को यह मुंह के बल 17.25 रुपए तक गिर गया। करीब नौ महीने मेंऔरऔर भी