कहर कोरोना की दूसरी लहर! लपेटती भंवर

कोरोना संक्रमण में भारत एक बार फिर तेज़ी से छलांग लगा रहा है। अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर। समूची दुनिया में खबर लिखे जाने के वक्त 13.72 करोड़ मामले जिसमें से 1.37 करोड़ (लगभग 10%) अकेले भारत में। हमारी करीब 1% आबादी कोविड-19 वायरस की चपेट में आ चुकी है। सबसे ज्यादा महाराष्ट्र और इसमें भी सबसे ज्यादा आर्थिक राजधानी मुंबई में। फाइनेंस की दुनिया बदस्तूर धड़क रही है। शेयर बाज़ार अपनी रफ्तार से सूं-सां कर रहा है। लेकिन अवाम की दुनिया रोती-बिलखती, सिसकती दिख रही है। कामगार एक बार फिर हताशा व निराशा में वापस मुलुक लौटने लगे हैं…

भारतीय अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने की उम्मीद मिटने लगी है। नेताओं की सत्ता-दमन की आशा कुलांचे मार रही है। लेकिन बेरोज़गारों की सारी आशा दूर कहीं बंगाल की खाडी या हिंद महासाघर में जाकर डूबने लगी है। तीज़-त्योहार की खुशियां धूमिल हो गई हैं। असम का रोंगाली बिहु त्योहार फीका पड़ गया है। बंगाल में चुनावी रैलियों के शोर के बीच कोरोना संक्रमण की सिसकियां भले ही अभी दब गई हों। लेकिन चुनावों का शोर थमने और धूल जमने के बाद महामारी का कोहराम जरूर सुनाई देगा। हालांकि, राजनीति और धर्म के धंधेबाज़ों को शायद तब भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हरिद्वार महाकुंभ में एक-एक दिन में 400 से ज्यादा लोग कोरोना पॉजिटिव पाए जा रहे हैं।

कौन दोषी है? जनता को दोषी ठहरा देना बड़ा आसान है। लेकिन याद रखें कि जानलेवा महामारी के सामने निपट अकेला छोड़ दिया शख्स जान पर खेलकर लापरवाही नहीं बरत सकता। मैं भी पिछले साल 22 मार्च 2020 से सावधानी बरतते हुए साल भर घर से बाहर नहीं निकला था। केवल 20 मार्च 2021 को वैक्सीन लगवाने निकला। फिर 23 मार्च को एक स्वजन के अंतिम संस्कार में जाना पड़ा। बस, वहीं कहीं से सारी सावधानी के बावजूद कोरोना ने घात लगाकर हमला कर दिया। अंततः 6 अप्रैल 2021 को कोरोना पॉजिटिव होने की रिपोर्ट आ गई।

उसी दिन से दवा चालू हो गई। दोस्तों! कोरोना के चंगुल में फंसे होने के कारण यह कॉलम 7 अप्रैल से नहीं लिख पाया। 11 अप्रैल का ‘तथास्तु’ भी इस बार मिस हो गया। यहां तक कि हर दिन नए विचार का क्रम ‘ऋद्धि-सिद्धि’ भी टूटा पड़ा है। लेकिन ज़िंदगी आखिर कब तक स्थगित रखी जा सकती है! ‘अर्थकाम’ पर सब कुछ 15 अप्रैल (गुरुवार) से पूर्ववत चालू हो जाएगा। इस बीच ‘ट्रेडिंग बुद्ध’ और ‘तथास्तु’ के मौजूदा सब्सक्राइबरों का सब्सक्रिप्शन एक-एक हफ्ते बढ़ा दिया जा रहा है।

2 Comments

  1. Dear Sir Ji

    हमें आप की बहुत जरुरत है,

    Take care

  2. Author

    धन्यवाद प्रसाद जी।

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