अवैध खनन से 15,245 करोड़ डूबे, पर कर्नाटक में सीबीआई जांच नहीं!

केंद्रीय उच्चाधिकार-प्राप्त समिति (सीईसी) ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी अपनी ताजा रिपोर्ट में कर्नाटक हो रहे अवैध खनन की भयावह सच्चाई बताते हुए कहा कि इससे सरकारी खजाने को 2003 के बाद से 15,245 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। लेकिन आश्चर्य की बात है कि कर्नाटक में सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का तैयार नहीं है।

गौरतलब है कि सीईसी का गठन सुप्रीम कोर्ट ने ही किया है। उसने कल, शुक्रवार को अपनी सात खंडों वाली अंतरिम रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश एस एच कापडिया की अध्यक्षयता वाली पीठ को सौंपी है। पीठ के अन्य दो सदस्य हैं – जस्टिस आफताब आलम व जस्टिस के एस राधाकृष्णन। रिपोर्ट में खासतौर पर कर्नाटक में लौह अयस्क के अवैध खनन का ब्योरा दिया गया है। कहा गया है कि राज्य की हर खान में वन संरक्षण कानून का उल्लंघन किया जा रहा है। लौह अयस्क से भरपूर बेल्लारी जिले में तो बड़े पैमाने पर अवैध खनन हो रहा है।

लेकिन कर्नाटक के मुख्यमंत्री बी एस येदुरप्पा ने शनिवार को अपने पुराने रुख पर कायम रहते हुए जोर देकर कहा कि अवैध खनन मामले की सीबाआई से जांच नहीं कराई जाएगी। हां, सीईसी द्वारा उठाए गए मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट में एक रिपोर्ट जरूर पेश की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट को सीईसी द्वारा अपनी अंतरिम रिपोर्ट सौंपने के एक दिन बाद मुख्यमंत्री ने बैंगलोर में शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक की।

इस बैठक में मुख्य सचिव एसवी रंगनाथन, खनन और भूगर्भ विभाग के अधिकारी और लोक स्वास्थ्य मंत्री सीएम उदासी ने हिस्सा लिया। इस बैठक में सीईसी रिपोर्ट पर चर्चा की गई, जिसमें वर्ष 2003-04 और 2009-10 के दौरान बिना लाइसेंस के 304.91 लाख टन लौह अयस्क निर्यात की बात कही गई है। बैठक के बाद येदुरप्पा ने कहा, “जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट खुद देख रहा है तो सीबीआई जांच की क्या जरूरत है।”

बता दें कि कर्नाटक की 266 लौह अयस्क खदानों में से 134 जंगल के इलाके में हैं। सीईसी का कहना है कि अभी राज्य में जिस रफ्तार से खनन चल रहा है, उससे 20 सालों के अंदर यहां का खनिज भंडार खत्म हो जाएगा। अगर इसमें अवैध खनन को भी जोड़ दें तो यह संकट बहुत जल्दी आ जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि सीईसी ने पिछले नौ सालों में हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छ्त्तीसगढ़ व उड़ीसा में अवैध खनन की जांच की है। लेकिन कर्नाटक जैसी भयंकर स्थिति कहीं नहीं है। दूसरे राज्यों में हो रहा अवैध खनन कर्नाटक के आगे फीका पड़ जाता है।

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