नाजुक मौके

अब कहें, तब कहें, कब कहें, कैसे कहें – हम इसी उधेड़बुन में लगे रहे। वो शान से आया। तपाक से हाथ पकड़ा। बोला भी कुछ नहीं। बस, आंखों से हल्का-सा इशारा किया और वह उसके साथ झूमते-झामते चली गई।

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  1. वाह।

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