सरपट जीडीपी, घटती आय बढ़ता कर्ज!
2026-09-28
यह आभास नहीं, जिसका कोई विरोधाभास हो। यह एक साथ मौजूद सच्चाई भी नहीं कि उसे विडम्बना कह दिया जाए। यह कोई अद्भुत, अकल्पनीय व अनदेखी स्थिति भी नहीं, जिसमें कबीर की उलटबांसियों की तरह कोई सत्य या गूढ़ रहस्य छिपा हो। इसे अधिक से अधिक मोदी-जाल कहा जा सकता है कि एक तरफ भारत दुनिया की सबसे तेज़ गति से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है, दूसरी तरफ अपना काम-धंधा या नौकरी करने वाले 80% भारतीयों की वास्तविकऔरऔर भी
