शेयर बाज़ार निवेशकों के बल पर चलता है, चाहे वे देशी हों या विदेशी। विदेशी निवेशक लगातार देश से भागे जा रहे हैं। इस साल ही वे जनवरी से अब तक ₹1.75 लाख करोड़ निकाल चुके हैं। इनके निकलने की भरपाई देशी निवेशक संस्थाएं, खासकर म्यूचुअल फंड करते हैं। उनके पास धन का मुख्य प्रवाह एसआईपी का है। देश में एसआईपी खातों की संख्या मार्च में 9.72 करोड़ पर पहुंच गई, जिनमें मार्च महीने में ₹32,087 करोड़औरऔर भी

दुनिया के तमाम देश जीडीपी की गणना इसलिए करते हैं ताकि विकास की माकूल रणनीति बनाई जा सके। पर मोदी सरकार के नेतृत्व में चल रहा भारत शायद दुनिया का इकलौता देश है जहां जीडीपी को प्रचार व भौकाल का साधन बना दिया गया है। विकास का सही डेटा देश के नीति-नियामकों और उद्योग-धंधों को ऐसा आधार देता है जिस पर खड़े होकर वे मांग, निवेश की संभावनाओं और मौद्रिक व आर्थिक नीति का समुचित आकलन करऔरऔर भी

सच्चाई कभी धारणाओं में बंधकर नहीं चलती। वो धारणाओं को तोड़ देती है। 27 फरवरी को जीडीपी की नई सीरीज़ जारी करते वक्त सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा था कि देश के रीयल जीडीपी की विकास दर वित्त वर्ष 2023-24 में 7.2%, 2024-25 में 7.1% और 2025-26 में 7.6% रही है। इसका 7% से ऊपर रहना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि कम से कम इतनी विकास दर से ही भारत 2047 तक विकसितऔरऔर भी

भारत के पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन को सही मानें तो देश का जीडीपी सरकारी अनुमान से 22% कम हो सकता है। अभी जीडीपी की नई सीरीज़ के मुताबिक बीते वित्त वर्ष 2025-26 में हमारा रीयल जीडीपी 322.58 लाख करोड़ रुपए और नॉमिनल जीडीपी 345.47 लाख करोड़ रुपए रहने का अनुमान है। इससे 22% कम तो रीयल जीडीपी 251.61 लाख करोड़ रुपए और नॉमिनल जीडीपी 269.47 लाख करोड़ रुपए निकलता है। सुब्रमण्यन के आकलन को एकऔरऔर भी