हमारे विशाल देश भारत में रोज़गार की समस्या विकट सच्चाई है। इसे सुलझाना विकास की किसी भी रणनीति के केंद्र में होना चाहिए। लेकिन 2047 तक विकसित भारत का नारा उछाल रही मोदी सरकार इसे महज जुमले या हवाबाज़ी से हल करने का स्वांग रच रही है। हमारी आबादी की मीडियन या मध्यमान आयु मात्र 28 साल है। हमें यह भी समझना होगा कि लोग सरकार से नौकरियां नहीं, बल्कि ऐसी नीतियां चाहते हैं जिनसे रोज़ी-रोज़गार केऔरऔर भी

भारत जैसी युवा आबादी से लबालब भरे देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन न जाने क्यों मुद्रास्फीति और बेरोज़गारी को एक निगाह से नहीं देखते। उन्होंने आर्थिक सर्वेक्षण में 2011 से लेकर अब तक की मुद्रास्फीति का सालाना डेटा देकर बताया है कि कैसे मुद्रास्फीति बराबर घटती रही है। लेकिन वो बेरोजगारी का ऐसा कोई डेटा नहीं देते। अगर इन्हीं 15 सालों के दौरान रही बेरोज़गारी का डेटा दे देते तो यह सच उजागर होऔरऔर भी