हर चमकती चीज़ सोना नहीं होती। इसी तरह हर चर्चित और चढ़ा हुआ शेयर अच्छा नहीं होता। हमें हर चमक को समझने का सलीका विकसित करना होता है। साथ ही पहले से चढ़े हुए शेयरों की फांस से बचना चाहिए। निवेश की दुनिया में हमें विश्वास नहीं, संदेह से शुरू करना चाहिए। उन्हीं कंपनियों में निवेश करें जिनका बिजनेस मॉडल हमें अच्छी तरह समझ में आ जाए। मुफ्त के तमाम सलाहकार बताते फिरते हैं कि यह मल्टी-बैगरऔरऔर भी

टैरिफ युद्ध पर दुनिया के सबसे ज्यादा आयात करनेवाले देश अमेरिका और सबसे ज्यादा निर्यात करनेवाले देश चीन के बीच वार-पलटवार जारी है। अमेरिका के 54% के जवाब में चीन में 84% टैरिफ लगाया तो अमेरिका ने उसे पहले बढ़ाकर 104% और फिर 125% कर दिया। 27 देशों के यूरोपीय संघ ने अमेरिका के 20% आयात शुल्क के जवाब में 25% आयात शुल्क का ऐलान कर दिया। लेकिन हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अभी तक खामोश हैं, जबकिऔरऔर भी

चीन ने सारे अमेरिकी आयात पर 34% शुल्क लगाकर जवाब दे दिया। फिर ट्रम्प ने पलटकर उस पर 50% टैरिफ बढ़ाकर 104% कर डाला। लेकिन जवाबी टैरिफ पर अभी तक भारत का कोई जवाब नहीं आया है। मोदी जी चुप हैं। देश के आम लोग तो औरंगजेब की कब्र के बाद वक्फ की जमीन के कब्जे में उलझे हैं। लेकिन कॉरपोरेट क्षेत्र टैरिफ युद्ध पर सरकार के पस्त रवैये से परेशान है। उसे लगता है कि अमेरिकाऔरऔर भी

शेयर बाज़ार का साफ संदेश है कि डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा जवाबी टैरिफ लगाना न अमेरिका के लिए अच्छा है, न बाकी दुनिया या भारत के लिए। फिर भी हमारे देश का गोदी मीडिया और सरकार के बिके हुए अर्थशास्त्री शोर मचाए जा रहे हैं कि अमेरिका का टैरिफ लगाना भारत के लिए लाभप्रद है। खुद सरकार में बोलने की हिम्मत नहीं तो सूत्रों के हवाले खबरें चलाई जा रही हैं। ये वही सूत्र व अर्थशास्त्री हैं जोऔरऔर भी