दस साल से बनाया गया आर्थिक विकास का तिलिस्म अंततः ताश के पत्तों की तरह भरभराकर गिरने लगा है। सरकारी संस्थान राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) का चालू वित्त वर्ष 2024-25 के बारे में पहला अग्रिम अनुमान है कि इस बार जीडीपी के विकास की दर 6.4% रह सकती है जो चार साल की न्यूनतम दर है। इस बार जुलाई 2024 में चालू वित्त वर्ष का बजट पेश करते हुए नॉमिनल या सतही विकास के 10.5% रहने काऔरऔर भी

नए साल में हम सभी देशवासियों को अर्थव्यवस्था पर और भी ज्यादा सावधान रहने की ज़रूरत है क्योंकि जल्दी ही बहुत सारे ऑप्टिक्स के साथ अनार व फुलझड़ियां छूटनेवाली हैं। कल सरकार की तरफ से पेश पहले अग्रिम अनुमान के मुताबिक मार्च 2025 तक हमारी अर्थव्यवस्था का आकार सतही या नॉमिनल स्तर पर ₹3,24,11,406 करोड़ का हो सकता है जो प्रति डॉलर 85.76 रुपए की मौजूदा विनिमय दर से करीब 3.78 ट्रिलियन डॉलर बनता है। विश्व बैंकऔरऔर भी

इस समय देश की मुख्यधारा कहा जाने वाला मीडिया जो भी दिखाता है, वो या सनसनी है या तो झूठ और नहीं तो विशुद्ध सरकारी प्रचार। आरटीआई से सूचनाएं मांगो तो उसे राष्ट्रहित व राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला बताकर छिपा लिया जाता है। सोशल मीडिया पर लिखने या यूट्यूब चैनल चलानेवालों के पास बेहद सीमित संसाधन हैं। वे खोजकर कुछ लाते भी हैं तो सरकारी धन पर पल रही ट्रोल लॉबी उसे झूठ-झूठ का हल्ला मचाकर दबानेऔरऔर भी

बड़े खतरनाक दौर से गुजर रहा है भारत और हम भारत के लोग। ऐसे में यकीन उसी पर करें, जिसे साफ-साफ देख सकें, छूकर पुष्टि कर सकें। अनदेखे के चक्कर में पड़े, tangible को दरकिनार करके intangible के झांसे में आए तो कहीं के नहीं रहेंगे। न बचेगा देश, न हमारा भविष्य। किसी ज़माने में ठगों का गिरोह गाय के बछड़े को कुत्ता बताकर लूट लेता था। फिर पटना रेलवे स्टेशन को निजी संपत्ति बताकर ठग बैंकोंऔरऔर भी

शेयर बाज़ार धन के लिए मारा-मारी कर रहे सतत युद्ध का मैदान है। इसमें घुसते वक्त हमें छोटे सामान्य रिटेल निवेशक व ट्रेडर होने की अपनी हैसियत याद रखनी चाहिए। याद रखना चाहिए कि इसमें हम जैसे कम पूंजी व पहुंच वाले लोग ही नहीं, एचएनआई (हाई नेटवर्थ इंडीविजुअल) या बेहद धनवान लोग और देशी-विदेशी सस्थाएं, बीमा कंपनियां, म्यूचुअल फंड व बैंक जैसे दिग्गज तक दांव लगाते हैं। ट्रेडिंग में तो हम यकीनन ऐसे बड़ों की राहऔरऔर भी