प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर उनके तमाम मंत्री-संत्री दावा कर रहे हैं कि 2014 से पहले भारत दुनिया की उन पांच नाजुक अर्थव्यवस्थाओं में गिना जा रहा था जो विकास की फंडिंग के लिए अविश्सनीय विदेशी निवेश पर निर्भर थे। लेकिन साथ ही उनका दावा है कि 2014 से 2023 के बीच देश में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) दोगुना होकर 596 अरब डॉलर रहा है। इतना नकलीपना क्यों? पहले जो विदेशी निवेश कमज़ोरी की निशानी था, वहीऔरऔर भी

बजट की झांकी निकल गई। अब आम चुनावों की रैलियां निकलने लगी हैं। प्रधानमंत्री कहते हैं कि अयोध्या में राम मंदिर बनने से पीढ़ियों का इंतज़ार खत्म हुआ। उन्होंने 17वीं लोकसभा का अंतिम सत्र राम के नाम कर दिया। दरअसल, राम को घोड़ा बनाकर भाजपा चुनावों का अश्वमेध यज्ञ पूरा करना चाहती है। लेकिन उसे भरोसा नहीं कि राम का सिक्का कितना चल पाएगा। इसीलिए 2004 से 2014 तक कांग्रेस के राज में अर्थव्यवस्था के हाल परऔरऔर भी

इस समय अपनी अर्थव्यवस्था ही नहीं, शेयर बाज़ार तक का हाल विचित्र है। अर्थव्यवस्था में 17% का योगदान करनेवाली केंद्र व राज्य सरकारों का हाल दुरुस्त है। मगर, बाकी 83% योगदान करनेवाले छोटे-बड़े उद्योगों व आम घरों का हाल पस्त है। शेयर बाज़ार में उन कंपनियों के शेयर चमकते ही जा रहे हैं, जिनका धंधा सरकारी खपत पर टिका है। आईआरबी इंफ्रा जैसी कंपनी का शेयर साल भऱ तीन गुना हो चुका है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकरऔरऔर भी

सरकार पिछले कई सालों से अपने बूस्टर डोज़ से अर्थव्यवस्था से चलाए जा रही है, जबकि उद्योग, कॉरपोरेट और हाउसहोल्ड या आम लोगों की खपत व निवेश में ठंडक दिखाई दे रही है। हकीकत यह है कि अर्थव्यवस्था में उद्योग के निवेश और आम लोगों की खपत का योगदान 83% है। वहीं, केंद्र व राज्य सरकारों का योगदान बमुश्किल 17% है। ऐसे में पूंजीगत व्यय और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च का कितना भी हल्ला सरकार मचा ले, वोऔरऔर भी

बजट अंतरिम हो या पूरा, उसमें सरकार की प्राप्तियों व व्यय का व्यापक ब्योरा होता है और व्यय प्राप्तियों से जितना ज्यादा होता है, सरकार उसे राजकोषीय घाटा दिखाकर देशी-विदेशी उधार से पूरा करती है। लेकिन इस बार के अंतरिम बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्राप्तियों में गजब की ‘कलाकारी’ की है। उन्होंने चालू वित्त वर्ष 2023-24 की कुल प्राप्तियां बजट अनुमान और संशोधित अनुमान में कमोबेश बराबर दिखाई हैं। बजट अनुमान ₹45,03,097 करोड़ औरऔरऔर भी