यहां हर दूसरे ट्रेडर से होड़, टकराता है स्वार्थ!
शेयर बाज़ार के ट्रेडर को हमेशा होश रहना चाहिए कि उसे दिमाग का योद्धा बनना है। इसमें अगर वह महारथी बन गया तो न केवल उसकी पूंजी हमेशा सलामत रहेगी, बल्कि नियमित रूप से बढ़ती भी रहेगी। हम अपना युद्ध अपनी सोच के दम पर लड़ते हैं, न कि तेज़ इंटरनेट कनेक्शन या शानदार ट्रेडिंग टर्मिनल के दम पर। यह भी याद रहे कि यहां हर किसी के अपने स्वार्थ हैं और हर कोई हर दूसरे काऔरऔर भी
वहां मांग-आपूर्ति असीमित, यहां बंधी आपूर्ति!
कुछ लोग कमोडिटी या जिंस बाज़ार को शेयर बाज़ार से जोड़कर देखते हैं। वे भूल जाते हैं कि कमोडिटी बाज़ार में भाव सीधे-सीधे मांग व आपूर्ति के संतुलन से तय होते हैं और इसमें मांग व आपूर्ति की कोई सीमा नहीं होती। वे असीमित हद तक जा सकती हैं। लेकिन शेयर बाज़ार में हर कंपनी के शेयरों की चुकता पूंजी सीमित है। उसकी आपूर्ति नहीं बढ़ाई जा सकती है। मगर, मीडिया में माहौल बनाकर उसके शेयर कीऔरऔर भी
सीधा जो सोचा बाज़ार तो ट्रेडर का बेड़ा गरक
कुछ लोगों का दिमाग बड़े रैखिक तरीके से चलता है। वे हिसाब लगाते हैं कि कोई शेयर या सूचकांक महीने में 10% बढ़ा तो छह महीने में 60% और दस महीने में 100% बढ़ जाएगा। लेकिन यह सांख्यिकी तक का भ्रमजाल है और शेयर बाज़ार में तो ऐसा हिसाब-किताब चलता ही नहीं। अब तक ऐसा हुआ है तो आगे उसी दिशा में ऐसा-ऐसा होगा, कोई ट्रेडर अगर ऐसा सोचकर चले तो समझ लीजिए कि उसका विनाशकाल शुरूऔरऔर भी
धन की बाढ़ से लड़ना संभव है, प्रवाह से नहीं
भारत जैसे उभरते देशों के शेयर बाज़ार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश बनकर आ रहे धन का प्रवाह कुछ महीनों में टूट सकता है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व द्वारा बॉन्ड की खरीद कम किए जाने से सिस्टम में धन की उपलब्धता घटेगी और ब्याज दर बढ़ेगी। नतीजतन, उसका प्रवाह धीमा पड़ेगा। फिर भी विदेशी धन ज्यादा रिटर्न की चाह में निश्चित रफ्तार से आता रहा तो भारत जैसे शेयर बाज़ार पहले की तरह कुलांचे मारते रहऔरऔर भी






