बराबरी के स्तर पर लड़ाई हो तो रिंग में हो रही बॉक्सिंग की तरह हार या जीत महज एक सहज व स्वाभाविक खेल है। लेकिन हमारे शेयर बाज़ार में बराबरी का यह स्तर देशी-विदेशी संस्थाओं और प्रोफेशनल ट्रेडरों के दायरे से बाहर निकलते ही भेड़ियाधसान बन जाता है। यहां रिटेल ट्रेडर सबसे असहाय जीव है। बाज़ार के इर्दगिर्द हर शाख पर इतने शिकारी बैठे हैं जो उसकी हड्डी तो छोड़िए, चमड़ी तक निचोड़ डालते हैं। लालच कोऔरऔर भी