धन की बाढ़ से लड़ना संभव है, प्रवाह से नहीं

भारत जैसे उभरते देशों के शेयर बाज़ार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश बनकर आ रहे धन का प्रवाह कुछ महीनों में टूट सकता है। अमेरिका के केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व द्वारा बॉन्ड की खरीद कम किए जाने से सिस्टम में धन की उपलब्धता घटेगी और ब्याज दर बढ़ेगी। नतीजतन, उसका प्रवाह धीमा पड़ेगा। फिर भी विदेशी धन ज्यादा रिटर्न की चाह में निश्चित रफ्तार से आता रहा तो भारत जैसे शेयर बाज़ार पहले की तरह कुलांचे मारते रह सकते हैं। याद रहे कि हम धन की बाढ़ से लड़ सकते हैं, लेकिन धन के नियमित प्रवाह से नहीं। सावधानी बरतते हुए यही किया जा सकता है कि हम बीच-बीच में रह-रहकर मुनाफावसूली करते रहें। अब मंगलवार की दृष्टि…

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