शेयर बाज़ार में सफल ट्रेडर बनने की कुछ अपरिहार्य शर्तें व नियम हैं। अगर आप हमेशा आकुल-व्याकुल रहते हैं तो आपको ट्रेडिंग से दूर रहना चाहिए। अगर आपको बहुत जल्दी गुस्सा आ जाता है, अक्सर तैश में आकर काम करते हैं, भविष्य व वर्तमान को लेकर हमेशा भयभीत रहते हैं तो आपको ट्रेडिंग नहीं करनी चाहिए। शेयर बाज़ार समेत समूचे वित्तीय बाज़ार में वही ट्रेडर नियमित रूप से कामयाब होता है जिसने अपना स्वभाव बड़ा संयत बनाऔरऔर भी

पुरानी कहावत है। पुरुष बली नहीं होत है, समय होत बलवान। भीलन छीनीं गोपियां, वही अर्जुन वही बाण। भीलों के झुंड ने गोपियां छीन लीं और धुरंधर धनुर्धर अर्जुन उनको नहीं रोक पाए। जीवन में भी यही होता है। सबसे तेज़ धावक दौड़ जीत जाए, सबसे ताकतवर योद्धा जीत जाए, ज़रूरी नहीं। इसी तरह शेयर बाज़ार में ट्रेडर को हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि यहां बहुत सारे कारक काम करते हैं, जिन पर उसका कोई वश नहीं।औरऔर भी

शेयर बाज़ार में सक्रिय दूसरे खिलाड़ियों का दिमाग पढ़ने के साथ-साथ ट्रेडर को खुद अपने मनोविज्ञान पर बड़ा काम करना होता है। किसी सौदे में जमकर कमा लिया या किसी दिन बड़ा घाटा लग गया, दोनों ही स्थितियों में भावनाओं के अतिरेक पर जाने से बचना है। अक्सर होता यह है कि बड़ा फायदा होने पर हम इतना उन्माद में आ जाते हैं कि सब रंगीन ही रंगीन दिखता है। वहीं, बड़ा घाटा होने पर अंदर सेऔरऔर भी

शेयर बाज़ार में निवेशकों और ट्रेडरों का सारा खेल दिमाग का है, प्रायिकता की समझ और रिस्क उठाने की क्षमता का है। लेकिन निवेशक को जहां अपना सारा दिमाग बाज़ार, उद्योग व कंपनी को समझने पर लगाना चाहिए। वहीं, ट्रेडर को सारा दिमाग बाज़ार के साथ-साथ दूसरे ट्रडरों के दिमाग को समझने में लगाना चाहिए। बाज़ार को समझने के लिए उनके पास टेक्निकल एनालिसिस का टूल है, वहीं दूसरों के दिमाग को समझने के लिए लालच वऔरऔर भी

जिस तरह लम्बे समय में हर किसी का मरना तय है, उसी तरह लम्बे समय में अच्छे बिजनेसवाली कंपनी के शेयर का बढ़ना तय है। लेकिन सालों-साल में होनेवाली यह बढ़त दिन-प्रतिदिन के उतार-चढ़ाव में विभाजित है। सालों-साल में निवेशक कमाता है, जबकि दिन-प्रतिदिन में ट्रेडर। दोनों की मानसिकता व रणनीति अलग होती है और अलग होनी भी चाहिए। मसलन, 27 मार्च 2020 को डाबर का शेयर 385 में खरीदकर जो ट्रेडर हफ्ते भर में 445 परऔरऔर भी