जो दूसरा काम-धंधा या नौकरी करने की वजह से शेयर बाज़ार को सुबह से शाम तक बराबर वक्त नहीं दे सकते, वे इंट्रा-डे ट्रेडिंग का चौकन्नापन नहीं बरत सकते तो उनके लिए मुफीद होती है स्विंग, मोमेंटम या पोजिशनल ट्रेडिंग। यह तीन-चार दिनों से लेकर महीने-डेढ़ महीने की हो सकती है। इंट्रा-डे ट्रेडरों की तरह इन सौदौं में ब्रोकर से उधार या लीवरेज़/मार्जिन की सुविधा नहीं मिलती तो ज्यादा पूंजी लगानी पड़ती है। लेकिन मार्जिन का रिस्कऔरऔर भी