वित्त वर्ष 2014-15 का आखिरी दिन। बैंकों से लेकर म्यूचुअल फंडों व तमाम वित्तीय संस्थाओं के लिए खातों को अंतिम रूप देने का दिन। सो, आज उनके ट्रेडिंग व्यवहार पर खास ध्यान देना चाहिए। खुद कुछ न करके उनकी हरकतों को देखना, समझना भविष्य में ज्यादा काम का साबित हो सकता है। असल में ट्रेडिंग में सही समझ ही हमारा सबसे बड़ा हथियार है। बाकी सब में तो संस्थाएं बलशाली हैं। अब परखते हैं मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

ट्रेन्ड के साथ चलनेवाले कम कमाते हैं। वहीं, ट्रेन्ड के खिलाफ चलनेवाले या तो जमकर कमाते हैं या डूब जाते हैं। डूबते तब हैं, जब दुस्साहसी भावुकता में आंख मूंदकर रिस्क लेते हैं। गंवाते कम और कमाते तब ज्यादा हैं जब रिस्क को बांधकर चलते हैं। लेकिन जीवन की तरह ट्रेडिंग में भी लीक के खिलाफ चलने के लिए भरपूर माद्दा चाहिए। ऐसे लोग बड़ा नाम और नामा कमाते हैं, बशर्ते समझदारी अपनाएं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

बाज़ार में गिरावट का आलम हो तो अच्छी कंपनियों के शेयर भी गिर जाते हैं, लेकिन उनका अंतर्निहित मूल्य नहीं गिरता। सो, बुद्धिमान निवेशक गिरावट के ऐसे मौकों की बेसब्री से बाट जोहते हैं क्योंकि तब उन्हें अच्छी कंपनियों के शेयर सस्ते में खरीदने का मौका मिल जाता है। वैसे भी समय के साथ अपने उत्पाद व सेवाओं को अपग्रेड करती कंपनियां निवेश के लिए हमेशा माकूल रहती हैं। तथास्तु में आज एक ऐसी ही मजबूत कंपनी…औरऔर भी

निफ्टी कल गिरता-गिरता शाम तीन बजे के ठीक बाद 2.41% नीचे में 8325.35 तक चला गया और अंत में वहां से ज़रा-सा उठकर 2.21% की गिरावट के साथ 8342.15 पर बंद हुआ। वैसे, निफ्टी के पिछले पैटर्न को देखकर हमने सोमवार को सुबह ही कह दिया था: निफ्टी को थोड़ा समर्थन 8550 के आसपास मिल सकता है, लेकिन वहां से गिरने पर निफ्टी 8300 के आसपास जाकर ही ठहर सकता है। अब करते हैं शुक्रवार का अभ्यास…औरऔर भी

ज्यादा रिटर्न का लालच किसे नहीं खींचता! लेकिन हमें याद नहीं रहता कि रिटर्न के साथ रिस्क का आनुपातिक रिश्ता होता है। रिटर्न ज्यादा तो रिस्क ज्यादा। रिस्क कम तो रिटर्न कम। इसे बावजूद हर कोई न्यूनतम रिस्क में अधिकतम रिटर्न कमाना चाहता है। हम इसी काम में आपकी मदद करने की कोशिश करते हैं। फिर भी हर सौदे से पहले आपको सोच लेना चाहिए कि उसमें आप कितना गंवाने को तैयार हैं। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी