ट्रेडिंग का आसान सूत्र है कि आप सामनेवाले से थोड़ा-सा भी बेहतर हुए तो जीतेंगे। बेहतरी तीन चीजों से बनती हैं – सूचनाएं, विश्लेषण व भावनात्मक बर्ताव। पहली दो चीजें आपको बाहर से मिल सकती हैं, जबकि तीसरी व निर्णायक चीज़ के मालिक आप हैं। आप कहेंगे कि भावना तो हर इंसान में होती है, उससे कैसे बचा जा सकता है! सही बात है। इसीलिए पोजिशन साइज़िंग व स्टॉप-लॉस का अनुशासन है। अब छलांग बजट के बवंडरऔरऔर भी

प्रभु का रेल बजट देश व भारतीय रेल की अर्थव्यवस्था के लिए कितना अच्छा है या बुरा, यह तो बाद में पता चलेगा। लेकिन इतना तो साफ है कि रेल से जुड़ी तमाम कंपनियों – टीटागढ़ वैगन्स, टेक्समैको रेल, केरनेक्स माइक्रो, कंटेंनर कॉरपोरेशन, स्टोन इंडिया व कालिंदी रेल के शेयर और ज्यादा गिर गए। इसीलिए नियम है कि कोई लाख कहे, जिन दिन खबर हो, उस दिन कतई ट्रेड नहीं करना चाहिए। अब करते हैं शुक्रवार काऔरऔर भी

चलनेवाले मॉल में रोज़ाना हज़ारों चीज़ें बिकती है और रोज़ वहां हज़ारों लोग जाते हैं। लेकिन आप न तो वहां हर चीज़ खरीदते और न ही रोज़ाना जाते हो। इसी तरह हर दिन और हर स्टॉक में ट्रेडिंग कतई ज़रूरी नहीं। कुछ सफल ट्रेडर साल में पांच-दस स्टॉक में दस-बीस दिन की ट्रेडिंग से जमकर कमाते हैं। प्रत्येक स्टॉक का अलग स्वभाव होता है और हमें माफिक स्टॉक्स छांटकर उनमें ट्रेड करना चाहिए। अब गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार की ट्रेडिंग में सबसे बड़ी आस्ति हैं आप और आपका माइंटसेट। टेक्निकल एनालिसिस, ट्रेडिंग की सलाह, सूचनाओं व ज्ञान का नंबर बाद में आता है। आप इसलिए क्योंकि स्टॉप लॉस या किसी अन्य वजह से हिल गए हैं तो आप सही व संतुलित फैसला ले ही नहीं पाएंगे। माइंडसेट इसलिए क्योंकि आपको भीड़ से उल्टा सोचने की आदत डालनी है। औरों से पहले खरीदें और औरों से पहले बेचें। अब आजमाते हैं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

बाज़ार में सभी पैसा बनाने के लिए आते हैं। मगर कड़वी हकीकत यह है कि यहां 95% लोग पैसा गंवाते हैं और केवल 5% कमाते हैं। इसका कारण सूचनाओं या पूंजी का अभाव नहीं। दरअसल, ट्रेडिंग में भावों की सूचना सबसे अहम है जो छोटे-बड़े सभी को उपलब्ध है। हरेक सौदे में जीतना संभव नहीं। लेकिन हम ‘गंवाएं तो पैसा, कमाएं तो रुपया’ का अनुशासन अपनाएं तो बराबर फायदे में रहेंगे। अब पकड़ते हैं मंगलवार की आहट…औरऔर भी