करीब 146 करोड़ आबादी वाले जिस देश में केंद्र व राज्य सरकारों के साथ ही सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों को मिलाकर बमुश्किल ढाई करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा मिल रही हो, जिसे देखकर हर युवा इन्हीं नौकरियों की तरफ भागता हो और आरक्षण को लेकर मारा-मारी होती है, वहां केद्रीय श्रम व रोज़गार मंत्री मनसुख मंडाविया का दावा है कि मोदी सरकार ने 94 करोड़ लोगों या 64.3% आबादी को मजबूत सामाजिक सुरक्षा दे रखी है। क्या इस सुरक्षा में महीने में पांच किलो मुफ्त राशन पानेवाले 81.35 करोड़ लोग और साल भर में 6000 रुपए पानेवाले 9.45 करोड़ किसान भी शामिल हैं? बाकी अटल पेंशन और आयुष्मान जैसी तमाम सरकारी योजनाएं तो झंडू बाम हैं! मंडाविया से भी बड़े नमूने सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन हैं, जिन्होंने हाल ही में कहा कि भारत आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की दौड़ और मैन्यूफैक्चरिंग आधारित रोज़गार सृजन में काफ़ी पीछे रह गया है तो युवाओं को अब कुकिंग, कारपेंट्री, प्लम्बिंग व केयर-गिविंग जैसी नौकरियों पर अधिक ध्यान देना चाहिए। इन नमूनों को नौकरी देनेवाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो पहले ही पकौड़े तलने और रील बनाकर रोज़गार पाने की सलाह दे चुके हैं। ऐसे में देश में गलगोटिया जैसे विश्वविद्यालय फल-फूल रहे हैं। बाकी विश्वविद्यालय संघी घुसपैठ से त्रस्त हैं। अब बुधवार की बुद्धि…
यह कॉलम सब्सक्राइब करनेवाले पाठकों के लिए है.
'ट्रेडिंग-बुद्ध' अर्थकाम की प्रीमियम-सेवा का हिस्सा है। इसमें शेयर बाज़ार/निफ्टी की दशा-दिशा के साथ हर कारोबारी दिन ट्रेडिंग के लिए तीन शेयर अभ्यास और एक शेयर पूरी गणना के साथ पेश किया जाता है। यह टिप्स नहीं, बल्कि स्टॉक के चयन में मदद करने की सेवा है। इसमें इंट्रा-डे नहीं, बल्कि स्विंग ट्रेड (3-5 दिन), मोमेंटम ट्रेड (10-15 दिन) या पोजिशन ट्रेड (2-3 माह) के जरिए 5-10 फीसदी कमाने की सलाह होती है। साथ में रविवार को बाज़ार के बंद रहने पर 'तथास्तु' के अंतर्गत हम अलग से किसी एक कंपनी में लंबे समय (एक साल से 5 साल) के निवेश की विस्तृत सलाह देते हैं।
इस कॉलम को पूरा पढ़ने के लिए आपको यह सेवा सब्सक्राइब करनी होगी। सब्सक्राइब करने से पहले शर्तें और प्लान व भुगतान के तरीके पढ़ लें। या, सीधे यहां जाइए।
अगर आप मौजूदा सब्सक्राइबर हैं तो यहां लॉगिन करें...
