भावों ने जो चाल पकड़ रखी है, वो ज़रूरी नहीं कि आगे भी जारी रहे। यही टेक्निकल एनालिसिस की सीमा है। किस भाव पर कोई शेयर ट्रेड हुआ, यह महत्वपूर्ण है। लेकिन किस भाव पर ट्रेड नहीं हो सका या हुआ भी तो बहुत थोड़े समय, यह देखना कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। हम संस्थाओं की डिमांड व सप्लाई के असंतुलन को समझकर इन्हीं नाजुक भावों को पकड़ने की कोशिश करते हैं। अब परखते हैं गुरुवार की दशा-दिशा…औरऔर भी

आदर्श बाज़ार के बारे में मान्यता है कि वहां सारी सूचनाएं सबको समान रूप से समान समय पर उपलब्ध होती हैं और वो एकदम दक्षता से सही मूल्य खोज निकालता है। लेकिन आदर्श और व्यवहार का फर्क जीवन की अमिट सच्चाई है। 24 नहीं, 22 या उससे कम कैरेट के सोने से ही गहना बनता है। सूचनाओं, खबरों तक पहुंच के इसी अभाव को हम टेक्निकल एनालिसिस जैसे तरीकों से भरते हैं। अब आजमाएं बुधवार की बुद्धि…औरऔर भी

वित्तीय बाज़ार में भाव हमेशा बराबरी पर छूटते हैं। बेचने और खरीदने वालों की संख्या अलग-अलग हो सकती है। लेकिन किसी भाव पर जितने शेयर बेचे जाते हैं, उतने ही खरीदे जाते हैं, तभी जाकर सौदा संपन्न होता है। मगर, भाव/बाज़ार की दशा इससे तय होती है कि वहां बेचने की व्यग्रता ज्यादा है या खरीदने की। अभी तो जो हाल है, उसमें अधिकांश लोग फटाफट मुनाफा कमाकर निकल लेना चाहते हैं। अब परखें मंगल की दृष्टि…औरऔर भी

हमारे एक परिचित दोस्त ने, जो दूसरों से कैश सेगमेंट ही नहीं, ऑप्शंस व फ्यूचर्स तक में ट्रेडिंग कराते थे, खुद अचानक ट्रेडिंग छोड़ दी। कहने लगे: यह मोटी पूंजीवालों का काम है, अपना नहीं। बात सही है। लेकिन पूंजी के साथ दो चीजें वित्तीय बाज़ार में सफल ट्रेडिंग के लिए बहुत ज़रूरी हैं। एक, स्पष्ट ट्रेडिंग रणनीति। दो, उस पर अनुशासनबद्ध अमल। ये दोनों चीज़ें हरेक को खुद विकसित करनी पड़ती हैं। अब सोमवार का व्योम…औरऔर भी

न ज़िंदगी में सब दिन एकसमान होते हैं, न अर्थव्यवस्था में। मजबूती और कमज़ोरी का छोटा-बड़ा चक्र बराबर चलता रहता है। ऐसे में संयत नज़रिए से काम करनेवाला इंसान ही सफल होता है। इसी तरह कंपनियां भी वही कामयाब होती हैं जो बदलाव के चक्र के हिसाब से अपनी नीतियों को संवारती रहती हैं। तथास्तु में आज ऐसी ही एक कंपनी पेश है जो अर्थव्यवस्था के चक्र के चलते फिलहाल थोड़ा दबी है, लेकिन आगे चमकेगी ज़रूर…औरऔर भी