हम हिंदुस्तानी जुगाड़ तंत्र में बहुत उस्ताद हैं। फाइनेंस और शेयर बाज़ार दुनिया में उद्योगीकरण में मदद और उसके फल में सबकी भागीदारी के लिए विकसित हुए। लेकिन हमने उसे भोलेभाले अनजान लोगों को लूटने का ज़रिया बना लिया। इसलिए शेयर बाज़ार की ठगनेवाली छवि हवा से नहीं बनी है। पिछले हफ्ते हमारे एक सुधी पाठक के एस गुप्ता जी ने एक किस्सा लिख भेजा कि शेयर बाज़ार में पैसा कैसे डूबता है। वो किस्सा यूं है…औरऔर भी

दिसंबर महीने के दूसरे पखवाड़े में आम लोगों के लिए ऐसे सरकारी बांड जारी कर दिए जाएंगे जिसमें बचत को महंगाई की मार से सुरक्षित रखा जा सकता है। इन बांडों का नाम है इनफ्लेशन इंडेक्स्ड नेशनल सेविंग्स सिक्यूरिटीज – क्यूमुलेटिव (आईआईएसएस-सी)। इन्हें रिजर्व बैंक केंद्र सरकार से सलाह-मशविरे के बाद लांच कर रहा है। शुक्रवार को रिजर्व बैंक ने आधिकारिक जानकारी दी कि इन्हें दिसंबर माह के दूसरे हिस्से में पेश कर दिया जाएगा। बता देंऔरऔर भी

दो पाटों के बीच फंसा है अपना शेयर बाज़ार। आज शाम आंकड़ा आएगा कि भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में कितनी बढ़ी है। उम्मीद से ज्यादा तो शेयर बाजार चहक उठेगा। वहीं अमेरिकी अर्थव्यवस्था अगर उम्मीद से ज्यादा बढ़ गई तो हमारा शेयर बाज़ार सहम जाएगा क्योंकि इससे यहां सस्ते धन का आना थम सकता है। आर्थिक बढ़त के दो अलग असर। कुछ यूं ही चले है शेयर बाज़ार। अब हफ्ते की आखिरी ट्रेडिंग…औरऔर भी

अपने शेयर बाज़ार में सब डेरिवेटिव-मय हो चला है। कल एनएसई में कैश सेगमेंट का टर्नओवर 9781 करोड़ रुपए रहा तो डेरिवेटिव्स का 2,14,958 करोड़ रुपए का। कैश टर्नओवर डेरिवेटिव्स का मात्र 4.59 फीसदी! अगर संस्थाओं से हटकर बाकी निवेशकों की बात करें तो उनके 100 रुपए में से 90 रुपए डेरिवेटिव्स में जाते हैं और दस रुपए कैश सेगमेंट में जिसमें से केवल दो रुपए के सौदे डिलीवरी के लिए होते हैं। अब ट्रेडिंग गुरुवार की…औरऔर भी

कामयाब ट्रेडर कंपनी या अर्थव्यवस्था के मूलभूत पहलुओ पर ट्रेड नहीं करता। लेकिन वो इनसे वाकिफ ज़रूर रहता है। यह जानना ज़रूरी है कि अर्थव्यवस्था की समग्र तस्वीर क्या है और कंपनी की क्या स्थिति है, भले ही हम उसके आधार पर रोज़-ब-रोज़ के ट्रेड न करें। भावों की चाल और सौदों का वोल्यूम देखकर हम चार्ट पर लोगों की भावनाओं को पकड़ते हैं। याद रखें। लोग झूठ बोल सकते हैं, चार्ट नहीं। अब ट्रेडिंग बुधवार की…औरऔर भी

मेरे एक मित्र हैं। बता रहे थे कि कैसे उन्होंने एक सेमिनार में ट्रेडिंग सिखानेवाले इंस्ट्रक्टर की धज्जियां उड़ा दीं। उसने कहा कि कम-से-कम एक घंटे शांत रहें। लेकिन इन्होंने अपने सवालों से इतना तंग किया कि उसे ट्रेनिंग सेशन छोड़कर जाना पड़ा। मेरा कहना है कि सीखने के लिए विनम्रता ज़रूरी है और गुरु तो एक चींटी भी हो सकती है। ट्रेडिंग में आपके हुनर का इकलौता पैमाना है कि आप कितना कमाते हो। अब आगे…औरऔर भी