वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का मानना है कि विश्व अर्थव्‍यवस्‍था में सुधार की गति धीमी है। 2008 में वैश्विक अर्थव्‍यवस्‍था में आई मंदी को सुधरने में कुछ लंबा वक्‍त लगेगा। वित्त मंत्री ने मंगलवार को उद्योग संगठन सीआईआई की सालाना आमसभा और राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्‍होंने कहा कि अंतर्राष्‍ट्रीय स्‍तर पर नीति निर्माताओं के लिए यह सबसे कठिन चुनौतियों में से एक है। इस वैश्विक संकट से निपटने के लिए अपनेऔरऔर भी

देश के व्यापार व उद्योग संगठनों, प्रोफेशनल संस्थानों और रिजर्व बैंक व पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी के प्रतिनिधियों ने सरकार को वित्तीय उत्पादों की कलर कोडिंग का सुझाव दिया है। मंगलवार को कॉरपोरेट कार्य मंत्री डॉ. एम वीरप्‍पा मोइली के साथ राजधानी दिल्‍ली में हुई बैठक में निवेशकों की हितों की रक्षा और पूंजी बाजार की पहुंच को बढ़ाने के लिए इस तरह के कई सुझाव सामने आए। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि वित्तीयऔरऔर भी

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियों (ओएमसी) ने सरकार को एक तरह का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि अगर एक्साइज ड्यूटी में कमी या ईंधन की बिक्री पर उन्हें रोजाना हो रहे 49 करोड़ रुपए के नुकसान की भरपाई नहीं की गई तो वे पेट्रोल की कीमत में 9.6 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ा सकती हैं। इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के चेयरमैन आर एस बुटोला ने दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, ‘‘हमने काफी धैर्यऔरऔर भी

दुनिया की दो शीर्ष अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में से विश्व बैंक पर अमेरिका का कब्जा बरकरार है, जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) पर यूरोप का नेतृत्व है। लेकिन रेटिंग एजेंसियों के मामले में अमेरिका का ही बोलबोला है। स्टैंडर्ड एंड पुअर्स, मूडीज़ व फिच तीनों ही प्रमुख एजेंसियां अमेरिका की हैं। इनको चुनौती देने की कोशिश में यूरोप काफी समय से लगा हुआ है। लेकिन अभी तक यह कोशिश किसी अंजाम पर नहीं पहुंच सकी है। असल में,औरऔर भी

मौद्रिक नीति की घोषणा के फौरन बाद चौंककर सेंसेक्स और निफ्टी 1.3 फीसदी तक बढ़ गए। लेकिन धीरे-धीरे नीचे उतरने लगे। अंदेशा है कि अब बाकी बचे साल में शायद ब्याज दरों में और कटौती न की जाए। खुद रिजर्व बैंक गवर्नर दुव्वरि सुब्बाराव ने स्पष्ट किया, “मुद्रास्फीति के बढ़ने का रिस्क अब भी कायम है। कुछ ऐसी ही कारकों ने नीतिगत दरों में और कटौती की गुंजाइश सीमित कर दी है।” बस, यही सफाई शेयर बाजारऔरऔर भी

हर कोई यही उम्मीद कर रहा था कि रिजर्व बैंक रेपो दर में बहुत हुआ तो 0.25 फीसदी कमी कर सकता है। लेकिन रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2012-13 की सालाना मौद्रिक नीति में रेपो दर में 50 आधार अंक या 0.50 फीसटी कटौती कर सबको चौंका दिया है। नतीजतन घोषणा होते ही खटाक से चार मिनट के भीतर शेयर बाजार की प्रतिक्रिया को दर्शानेवाले सेंसेक्स और निफ्टी दिन के शिखर पर पहुंच गए। रिजर्व बैंक नेऔरऔर भी

बहुत साफ-सी बात है कि मूल्य सामाजिक लेनदेन का पैमाना है। मूल्य किसी चीज को उतना ही मिलता है, जितना लोग उसे भाव देते हैं। और, लंबे समय तक भाव पाने के लिए उस चीज की अपनी औकात और दमखम होना जरूरी है। हम लंबे समय में फलने-फूलनेवाली ऐसी ही सामर्थ्यवान और संभावनामय कंपनियां आपके लिए छांटकर लाने की कोशिश करते हैं। साथ ही आपसे अपेक्षा भी करते हैं कि निवेश करने से पहले खुद एक बारऔरऔर भी

यहां अपने ही इतने उलझाव हैं कि दूसरों के बारे में कैसे सोचें? इसी सोच में अपनी ही नाक देखते रह जाते हैं हम। नहीं समझ पाते कि दूसरों के बारे में सोचने-देखने से हमें ऐसा आईना मिलता है जहां हमारी नजर के तमाम धोखे मिट जाते हैं।और भीऔर भी