इस बार देश में दहलन और तिलहन कम बोया गया है। अभी तक दालों की बुआई 140.66 लाख हेक्‍टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह रकबा 142.38 लाख हेक्‍टेयर था। चने की बुआई पिछले वर्ष की इसी अवधि में 92.77 लाख हेक्‍टेयर की तुलना में 87.22 लाख हेक्‍टेयर में की गई है। तिलहन के मामले में पिछले वर्ष के 85.5 लाख हेक्‍टेयर की तुलना में अब तक 80.96 लाख हेक्‍टेयर क्षेत्र में बुआई की जाने कीऔरऔर भी

विश्व अर्थव्यवस्था प्राकृतिक आपदा या आतंकवादी हमले से होनेवाली व्यापक तबाही ज्यादा से ज्यादा एक हफ्ते तक झेल सकती है क्योंकि सरकारों या उद्योग-धंधों ने ऐसी अनहोनी के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं कर रखी है। यह आकलन है दुनिया के एक प्रतिष्ठित चिंतन केंद्र, चैथम हाउस का। चैथम हाउस लंदन का एक संस्थान है जो अंतरराष्ट्रीय मसलों से संबंधित नीतियों पर नजर रखता है। दुनिया भर के नीति-नियामकों के बीच इसकी बड़ी साख है। चैथम हाउस नेऔरऔर भी

सरकार जल्दी ही एकल ब्रांड रिटेल में 100 फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की इजाजत देने की अधिसूचना जारी कर देगी। यह जानकारी उद्योग सचिव पी के चौधरी ने शुक्रवार को दी। अभी तक एकल ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई की इजाजत मिली हुई है। गौरतलब है कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बीते साल 24 नवंबर को हुई अपनी बैठक में एकल ब्रांड रिटेल में 100 फीसदी और मल्टी ब्रांड रिटेल में 51 फीसदी एफडीआई की इजाजतऔरऔर भी

चीन की राजधानी बीजिंग के जो लोग अभी तक प्रदूषण की पूरी जानकारी के लिए अमेरिकी दूतावास पर निर्भर थे, उन्हें अब शहर प्रशासन ही पूरी जानकारी देने लगेगा। बड़े आश्चर्य की बात है कि बीजिंग का प्रशासन अभी तक शहर ने बाशिंदों को प्रदूषण की आधी-अधूरी जानकारी ही देता था। लेकिन लोगों के दबाव के आगे झुकते हुए उसने अब वायु प्रदूषण के बारे में विस्तृत जानकारी देने पर रजामंदी जता दी है। असल में चीनऔरऔर भी

कोयला मंत्रालय ने जिन 14 कोयला ब्लॉकों का आवंटन रद्द किया था, उनमें से छह ब्लॉक संबंधित कंपनियों को वापस लौटा दिए गए हैं। कोयला मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी। जिन छह कोयला ब्लॉकों को लौटाया गया है, उनमें एक दामोदर घाटी निगम, एक तेनुघाट विद्युत निगम व डीवीसी को संयुक्त तौर पर आवंटित ब्लॉक, एक झारखंड राज्य विद्युत बोर्ड को आवंटित ब्लॉक और तीन एनटीपीसी को आवंटित कोयला ब्लॉक शामिल हैं। अधिकारी नेऔरऔर भी

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रमुख क्रिस्टीन लैगार्ड का मानना है कि यूरो मुद्रा का ‘अंत’ इस साल होने के कोई आसार नहीं है। साथ ही उन्होंने बताया कि जल्दी ही आईएमएफ की जारी होनेवाली रिपोर्ट के मुताबिक इस साल विश्व अर्थव्यवस्था की विकास दर सितंबर में घोषित 4 फीसदी के अनुमान से कम रहेगी। फिलहाल दक्षिण अफ्रीका का दौरा कर रहीं लैगार्ड ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “सवाल है कि क्या 2012 यूरोऔरऔर भी

बाजार में ढाई बजे तक गिरावट का माहौल रहा। फिर वह उठने लगा। लेकिन 4794.90 तक जाने के बावजूद कमोबेश कल के समान स्तर 4754.10 पर बंद हुआ। वैसे, इस बार की गिरावट भी मुझे बेहतर लग रही है क्योंकि बहुत सारे स्टॉक्स खास किस्म की चमक दिखा रहे हैं जिसका मतलब है कि उनके जमने की प्रक्रिया जारी है। बाजार जमने में जितना ज्यादा वक्त लगाएगा, उसमें बढ़त का लक्ष्य उतना ही उठता जाएगा। खाद्य मुद्रास्फीतिऔरऔर भी

नई पीढ़ी या अमेरिका-यूरोप के लोग फास्टफूड के पीछे भागें तो समझ में आता है। लेकिन हमें भी सब कुछ पकापकाया पाने की चाहत लग गई है। हम भूल जाते हैं कि ये न तो कोई राजा-महाराजों का जमाना है और न ही हम कोई धन्नासेठ हैं कि जिसे भी चाहें, सेवा में लगाकर अपना काम करवा सकते हैं। अपनी बचत को संभालकर निवेश करने की कला हमें खुद ही सीखनी व विकसित करनी होगी। दूसरा कोईऔरऔर भी

लोगों को जो जरूरत है और लोग जो चाहते हैं, हम उन्हें वही सिखा सकते हैं। साथ ही किसी को कुछ भी सिखाने से पहले जरूरी है यह जानना कि हम खुद दूसरों से कितनी सारी बातें सीख सकते हैं।और भीऔर भी