यूरो का अंत इस साल नहीं होगा: आईएमएफ

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रमुख क्रिस्टीन लैगार्ड का मानना है कि यूरो मुद्रा का ‘अंत’ इस साल होने के कोई आसार नहीं है। साथ ही उन्होंने बताया कि जल्दी ही आईएमएफ की जारी होनेवाली रिपोर्ट के मुताबिक इस साल विश्व अर्थव्यवस्था की विकास दर सितंबर में घोषित 4 फीसदी के अनुमान से कम रहेगी।

फिलहाल दक्षिण अफ्रीका का दौरा कर रहीं लैगार्ड ने शुक्रवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “सवाल है कि क्या 2012 यूरो के अंत का साल होगा? मेरा उत्तर है, मैं ऐसा नहीं सोचती। यह मुद्रा खुद में 2012 के दौरान खत्म नहीं होने जा रही है।”

उन्होंने आगे कहा, “क्या ग्रीस 2012 में यूरो ज़ोन छोड़ देगा? यूरो में शामिल देशों ने बार-बार अपने दृढ़ निश्चय की पुष्टि की है। हम इसका केवल समर्थन ही कर सकते हैं।” लेकिन उनका कहना था कि यूरो संकट का नकारात्क असर अफ्रीका और बाकी दुनिया पर पड़ रहा है। आईएमएफ 25 जनवरी के आसपास अपनी रिपोर्ट जारी करेगा जिसमें विश्व अर्थव्यवस्था के विकास के अनुमान को घटाया जा सकता है।

लैगार्ड ने बताया, “विकास दर का अनुमान नीचे लाया जा सकता है। हम 25-26 जनवरी के आसपास वास्तविक आंकड़े पेश करेंगे। हमें इसके लिए तैयार रहना चाहिए कि अगर हम यूरोपीय संकट को हल नहीं कर पाए तो 2012 की यात्रा कतई आसान नहीं होने जा रही।”

वैसे बता दें कि कल ही गुरुवार को आईएमएफ के अर्थशास्त्रियों ने कहा था कि यूरोप की हालत और बिगड़ने का ज्यादा असर एशियाई अर्थव्यवस्था पर नहीं पड़ेगा। उनका कहना था कि यूरोपीय अर्थव्यवस्था की कमजोरी का असर एशियाई अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है, लेकिन एशिया में इस संकट से निपटने की पूरी क्षमता है।

हालांकि आईएमएफ के एशिया-प्रशांत विभाग के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि एशिया की व्यापार पर अधिक निर्भरता की वजह से 2012 एक कठिन साल होगा। एशिया दुनिया का व्यापार पर सबसे अधिक निर्भर क्षेत्र है। यह धातु और चावल जैसे जिंसों से लेकर इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद और कारों तक का निर्यात करता है।

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