अप्रैल 2007 से शुरू हुई 11वीं पंचवर्षीय योजना मार्च 2012 में खत्म हो जाएगी। इस तरह उसके खत्म होने में केवल तीन महीने ही बचे हैं। लेकिन केंद्र सरकार ने इस योजना अवधि के लिए एकीकृत वस्त्र पार्क स्कीम (एसआईटीपी) के तहत जिन 40 पार्कों को मंजूरी दी थी, उनमें से अभी तक केवल सात पार्क ही पूरे हो सके हैं। वाणिज्य के साथ उद्योग व कपड़ा मंत्रालय भी संभालने वाले केंद्रीय मंत्री आनंद शर्मा ने शुक्रवारऔरऔर भी

सरकार ने पेट्रोल से लेकर डीजल, रसोई गैस और केरोसिन के दामों पर छाई धुंध को साफ करने के लिए ऑनलाइन जानकारी उपलब्ध करानी शुरू कर दी है। सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियां – इंडियन ऑयल, हिंदुस्तान पेट्रोलियम व भारत पेट्रोलियम ने पेट्रोल कीमतों के बारे में विस्तृत जानकारी पेट्रोलियम मंत्रालय संबद्ध पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल की वेबसाइट पर डालनी शुरू कर दी है। यहां कच्चे के आयातित मूल्य से लेकर अंडर-रिकवरी व सरकार की तरफ सेऔरऔर भी

एक तरफ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों की तारीख का इंतजार हो रहा है, दूसरी यूपीए सरकार आखिरी वक्त पर राजनीतिक दांव खेलने में लगी है। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उत्‍तर प्रदेश की दो सिंचाई परियोजनाओं के लिए 3124 करोड़ रूपए का पैकेज घोषित कर दिया। केन्‍द्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने उत्‍तर प्रदेश की दो सिंचाई परियोजनाओं को राष्‍ट्रीय परियोजना में शामिल करने का फैसला किया है। इसके तहत सरयू नहर परियोजना और शारदा सहायक परियोजना कीऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का दावा है कि हमारे सभी बैंक मजबूत हैं और हमें अपने बैंकों की क्षमता के बारे में किसी तरह का संदेह नहीं होना चाहिए। मुखर्जी ने शुक्रवार को पीएचडी चैंबर में उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए कहा, “मैं स्पष्ट करना चाहता हूं और बैंकिंग क्षेत्र के बारे में कुछ भ्रम दूर करना चाहता हूं। हमारे सभी बैंक मजबूत हैं। उनकी पूंजी पर्याप्तता और टियर-1 के साथ ही एनपीए (कर्ज में फंसी राशि)औरऔर भी

कहते हैं कि दूध का जला, छाछ भी फूंक कर पीता है। पिछले दिनों पेंशन बिल और कंपनी बिल को राजनीतिक विरोध के चलते वापस लेने पर मजबूर हुई सरकार अब आर्थिक सुधार संबंधी विधेयकों पर आम सहमति बनाने की वकालत करने लगी है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि सरकार आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने के प्रति वचनबद्ध है और आर्थिक महत्व के विधेयकों पर राजनीतिक आम सहमति बनाने में लगी है। लेकिन उन्होंनेऔरऔर भी

उम्मीद और नाउम्मीदी के बीच झूल रहा है बाजार। मंदडिए जाहिरा तौर पर हावी हैं। लेकिन वे जब हर तरफ अपना डंका बजा रहे हैं, तब बाजार चुपचाप उनके हमले से तहस-नहस हालात को संभालने में जुट गया है। मेरे बहुत से दोस्त निफ्टी में 4000 पर पुट ऑप्शन या बेचने के सौदे करके बैठ गए हैं। लेकिन अब उन्हें लग रहा है कि वे ऐसा करके बुरे फंस गए हैं। बाजार ने सुधरने का एक पैटर्न-साऔरऔर भी

हर कोई अक्सर अपने कर्मं की सार्थकता के बारे में सोचता है। मैं भी कभी-कभी सोचता हूं कि जो काम कर रहा हूं, उसकी सार्थकता क्या है। नोट बनाने का लालच तो सब में है। लेकिन इस देश में बचानेवाले कितने हैं और इन बचानेवालों में भी अपने धन को जोखिम में डालने की जुर्रत कितने लोग कर सकते हैं? फिर आखिर मैं किसकी सेवा में लगा हूं? इन लोगों की हालत तो वही है कि गंजेड़ीऔरऔर भी

बीज अगर फलियों की खोल तोड़कर बाहर न निकलें तो सृजन का सिलसिला ही रुक जाए। इसी तरह मानव समाज को आगे बढ़ाने के लिए कुछ लोगों को सुरक्षा का कवच तोड़कर बाहर निकलना ही पड़ता है।और भीऔर भी