पिछले बारह महीने से अटकी हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी (एचसीसी) की लवासा सिटी परियोजना को आखिरकार केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने सशर्त मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी इस शर्त पर दी गई है कि परियोजना को महाराष्ट्र प्रदूषण बोर्ड से स्वीकृति लेनी होगी और पूरे कंस्ट्रक्शन के दौरान पर्यावरण संबंधी तमाम कानूनों का पालन करना होगा। मंत्रालय ने बुधवार को अपनी बेवसाइट पर डाले गए दस पेज के आदेश में कहा है, “अगर भविष्य में पाया गया किऔरऔर भी

जिसका डर था, वही हुआ। अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी मूडीज इनवेस्टर सर्विस ने बुधवार को भारतीय बैंकिंग प्रणाली पर अपना नजरिया स्थिर से नकारात्मक कर दिया। ऐसा तब है, जब ज्यादातर भारतीय बैंक अभी लागू बासेल-2 मानकों को ही नहीं, दो साल बाद 2013 से लागू होनेवाले बासेल-3 मानकों को भी पूरा करते हैं। मूडीज ने जारी बयान में कहा है कि आर्थिक विकास दर के घटने और सरकारी उधारी के बढ़ने से बैंकों के पास निजी क्षेत्रऔरऔर भी

इटली के प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी ने इस्तीफा देने का फैसला कर दिया है। लेकिन इसके बाद इटली में लंबी राजनीतिक अनिश्चितता देखने को मिल सकती है। बर्लुस्कोनी की पार्टी चुनाव कराना चाहती है, वहीं विपक्ष राष्ट्रीय एकता की सरकार चाहता है। निचले सदन में हुए मतदान के दौरान बहुमत पाने में नाकाम रहे बर्लुस्कोनी ने कहा कि वह संसद में बजट सुधार पास होने के बाद अपना पद छोड़ देंगे। यूरोपीय साझीदारों ने इटली से इन सुधारोंऔरऔर भी

पेट्रोल की कीमतें बढ़ने और कर्ज महंगा होने का असर कारों की बिक्री पर साफ दिखने लगा है। अक्टूबर में घरेलू बाजार में कारों की बिक्री 23.77 फीसदी घटकर 1,38,521 इकाइयों की रही, जो अक्टूबर 2010 में 1,81,704 कारों की थी। इसमें देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी की हड़ताल ने भी आग में घी डालने का काम किया। यह बीते दस सालों में कारों की बिक्री में आई सबसे तेज गिरावट है। सोसाइटीऔरऔर भी

हमारी राजनीतिक पार्टियां इस कदर अंधी हैं कि उन्हें दिखाई नहीं देता कि इस साल केवल जुलाई-सितंबर की तिमाही में ही सरकारी तेल कंपनियों को 14,079.30 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। बुधवार को इंडियन ऑयल ने सितंबर तिमाही के नतीजे घोषित किए तो पता चला कि बिक्री साल भर पहले की तुलना में 15.81 फीसदी बढ़कर 89145.55 करोड़ रुपए हो जाने के बावजूद उसे 7485.55 करोड़ रुपए का घाटा उठाना पड़ा है। इससे पहले दो अन्यऔरऔर भी

बाजार न तो आपको वश में है और न ही आपके विचार हर बार बाजार को पकड़ पाते हैं। इसलिए अहम मसला बाजार पर सवारी गांठना नहीं, बल्कि यह है कि बाजार से कमाने के लिए आप कैसे उसे छकाते हैं। किसी ने बाजार के बर्ताव के बारे में बड़ी अच्छी पंक्तियां लिखी हैं। जरा गौर फरमाइए… “हम कभी नहीं जानते कि आगे क्या होने वाला है। बाजार लगातार गतिशील है और अनिश्चितता का समुंदर है। अगरऔरऔर भी

साल 1992 में देश में हाइड्रोकार्बन की खोज व उत्पादन का काम निजी क्षेत्र के लिए खोला गया और सेलन एक्सप्लोरेशन टेक्नोलॉजी तभी से धरती के भीतर से इन्हें निकालने का काम कर रही है। उसे शुरू में सरकार से गुजरात में खोजे गए तीन तेल क्षेत्रों – बकरोल, इंदरोरा व लोहार को विकसित करने का काम मिला। इसके बाद गुजरात में ही दो और तेल क्षेत्रों – ओग्नाज व कर्जीसन का काम भी मिल गया। कंपनीऔरऔर भी

हम में से ज्यादातर लोग जिंदगी भर बच्चे बने रहते हैं तो अभिभावक कैसे बन पाएंगे! जब तक बड़े होते है तब तक बच्चे भी बड़े हो चुके होते हैं तो पीढ़ियों के नाम पर आपस की ही होड़ शुरू हो जाती है।और भीऔर भी