जिद नहीं लोच, तभी ट्रेडिंग से नोट

बाजार न तो आपको वश में है और न ही आपके विचार हर बार बाजार को पकड़ पाते हैं। इसलिए अहम मसला बाजार पर सवारी गांठना नहीं, बल्कि यह है कि बाजार से कमाने के लिए आप कैसे उसे छकाते हैं। किसी ने बाजार के बर्ताव के बारे में बड़ी अच्छी पंक्तियां लिखी हैं। जरा गौर फरमाइए…

“हम कभी नहीं जानते कि आगे क्या होने वाला है। बाजार लगातार गतिशील है और अनिश्चितता का समुंदर है। अगर हम वाकई उसे मात देना चाहते हैं तो हमें विरोधी विचारों से सीखने में कोई हर्ज नहीं होना चाहिए। वैकल्पिक विचारों के प्रति खुलापन रखने की योग्यता बराबर मुनाफा कमानेवाले ट्रेडर की एक जरूरी पहचान है।”

नए या संघर्षरत ट्रेडरों के साथ एक दौर में होता यह है कि वे किसी खास विचार से चिपक जाते है और उनके अंदाज में लचीलापन नहीं रहता। मैं लगातार डोलते रहने की वकालत नहीं कर रहा। बस, इस तथ्य को सामने ला रहा हूं कि खुद बाजार तर्क व स्पष्टता से नहीं, बल्कि धारणाओं व भावनाओं से चलता है। सफल व विवेकसम्मत ट्रेडिंग के लिए जरूरत के हिसाब से ढलने का नजरिया अपनाना पड़ता है।

बाजार को कहां ‘जाना चाहिए’ इस गफलत में पड़ जाना बहुत आसान है। लेकिन अल्पकालिक ट्रेडर के रूप में आपका काम बाजार का भविष्य बांचना नहीं, बल्कि दिमाग खुला रखकर उसकी दिशा, उसके रुझान को पकड़ना है। यह वैसी बात नहीं है कि किसी चीज को दीवार पर फेंककर देखा जाए कि वह चिपकती है कि नहीं। यह हालात के हिसाब से अपनी समझ व भरोसे से बनाई गई रणनीति है। आपको यह भी बराबर सीखते रहना चाहिए कि आपकी रणनीति कब और कैसे गलत हो जाती है।

यकीनन, गलत होना पूरा अलग ही विषय है और उस पर अलग से लिखा जाना चाहिए। लेकिन असली सवाल तो यह है कि आप सही होने के लिए ट्रेड करते हैं या नोट बनाने के लिए? अगर आप सही होने के लिए ट्रेड करते हैं तो आपको मौके के हिसाब से ढलने या कम से कम दूसरी राय को अपनाने में बड़ी मुश्किल आएगी। वहीं, जब आप नोट बनाने के लिए ट्रेड करते हैं तब आप जरूरत के हिसाब से अपनी राय बदल सकते हैं।

अगर नतीजों का संदर्भ लिया जाए तो एक पक्ष सही रहता तो दूसरा गड़बडा जाता है। आज एसबीआई के साथ यही हुआ। शुद्ध लाभ बाजार की अपेक्षा से ज्यादा है। लेकिन डूबत ऋणों या एनपीए के बढ़ने से निवेशकों व ट्रेडरों की भावना नकारात्मक हो गई। जहां कल उत्साह में लोगबाग लांग हुए पड़े थे, वहीं आज सब एक तरफ से एसबीआई में शॉर्ट होने लगे।

निफ्टी दोपहर सवा दो बजे के बाद अचानक गिरने लगा तो 1.41 फीसदी गिरकर 5214.90 पर पहुंच गया। लेकिन निफ्टी में मेरा 5550 का लक्ष्य अब भी जस का तस है। मैं बड़ी उत्सुकता से निफ्टी के 200 डीएमए (200 दिनों के मूविंग औसत) को पार करने का इंतजार कर रहा हूं क्योंकि मौजूदा स्तर पर जमकर नई शॉर्ट पोजिशन ली जा रही हैं जो तेजड़ियों के लिए अंततः आदर्श माहौल पैदा कर देंगी। मेटल स्टॉक्स को लेकर मैं बहुत ज्यादा आशावान हूं। इस सेक्टर से आप अपने शेयर चुन सकते हैं। मुझे परवाह नहीं है कि छोटी अवधि में किसी स्टॉक में क्या होता है। लेकिन बढ़ने की दिशा को लेकर मुझे कोई शक नहीं है।

जेट एयरवेज को हमने 263 रुपए पर उठाया था। वो गिरकर 225 रुपए पर चला गया तो ट्रेडिंग के लिए और खरीदने का मौका मिल गया। अब जेट एयरवेज 273 रुपए पर है, हमारे खरीद मूल्य से काफी ऊपर। हम अक्सर किसी स्टॉक में यह मानकर घुसते है कि इक्विटी बाजार आपको गलत साबित कर देगा। फिर आप यकीन के साथ अपना दांव बढ़ाते जाते हैं और, फिर करिश्मा हो जाता है। जेट एयरवेज में तीन सौदों ने हमारी लागत घटाकर 235 रुपए कर दी और अब हम एकदम सुरक्षित हो गए हैं।

हम खेलना इसलिए नहीं बंद करते कि हम बूढ़े हो गए हैं। बल्कि, हम बूढ़े इसलिए होते हैं क्योंकि हम खेलना बंद कर देते हैं।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं पड़ना चाहता। इसलिए अनाम है। वह अंदर की बातें आपके सामने रखता है। लेकिन उसमें बड़बोलापन हो सकता है। आपके निवेश फैसलों के लिए अर्थकाम किसी भी हाल में जिम्मेदार नहीं होगा। यह मूलत: सीएनआई रिसर्च का कॉलम है, जिसे हम यहां आपकी शिक्षा के लिए पेश कर रहे हैं)

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