जहां तक भारतीय बाजार का ताल्लुक है तो उसको लेकर ज्यादा डरने की जरूरत नहीं है। फिलहाल ट्रेडर भाई लोग सेटलमेंट की शुरूआत में यूरोप व अमेरिका के संकट और भारत सरकार की उधारी बढ़ जाने की खबर पर और ज्यादा शॉर्ट पोजिशन बनाने में जुट गए हैं। इसी वजह से बाजार में गिरावट का दौर चला है। मुझे नहीं समझ में आता है कि ऐसे में बहुत ज्यादा मंदी की धारणा पालने की कोई वजह बनतीऔरऔर भी

एनसीएल इंडस्ट्रीज का नाम पहले नागार्जुन सीमेंट लिमिटेड हुआ करता था। पिछले 25 सालों से आंध्र प्रदेश में नागार्जुन ब्रांड का सीमेंट बेचती है। पिछले साल की जून तिमाही में 2.57 करोड़ रुपए का घाटा उठाया था। लेकिन इस साल की जून तिमाही में 16.95 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। इस बार उसकी बिक्री भी पूरे 84.08 फीसदी बढ़कर 122.14 करोड़ रुपए हो गई है। लेकिन इन नतीजों का खास असर अभी तक उसके शेयरोंऔरऔर भी

अकेले दम पर धन-दौलत, पद, प्रतिष्ठा और शोहरत सब पाई जा सकती है। लेकिन पारिवारिक संबंधों की रागात्मकता के बिना वो खुशी नहीं मिल सकती है जो क्षीर सागर में विराजे विष्णु को हासिल थी।और भीऔर भी

स्पीक एशिया अब भी खुद को एशिया में संप्रभु उपभोक्ताओं का सबसे बड़ा समुदाय बताती है, लेकिन धीरे-धीरे वह खुद को रोजमर्रा के इलेक्ट्रिकल व इलेक्ट्रॉनिक्स सामान बेचनेवाली फर्म के रूप में पेश करने लगी है। इस बीच यह भी खुलासा हुआ है कि घोषित तौर सर्वे के जिस काम से वह कमाई कर रही थी, वह असल में कभी था ही नहीं। वह तो बस लोगों को फंसाने का एक बहाना था और वह मल्टी लेवलऔरऔर भी

अगर आप जाने-अनजाने, किसी के कहने या गलती से या खुद अपने-आप इक्विटी बाजार में आ ही गए हैं तो मौजूदा देशी-विदेशी हालात का खामियाजा आपको भुगतना ही पड़ेगा। शेयर बाजार में ऐसा होता ही है, इससे बचा नहीं जा सकता। असल में इसीलिए शेयर बाजार सबसे ज्यादा जोखिम से भरा माना जाता है। लेकिन अब तो सुरक्षित माने जानेवाले ऋण बाजार ने भी निवेशकों को झटके देना शुरू कर दिया है। सोना जैसा माध्यम तक सुरक्षितऔरऔर भी

कभी सोचा है आपने कि हर निवेशक वॉरेन बफेट बनना चाहता है और भारत ही नहीं, दुनिया भर में हजारों लोग वॉरेन बफेट की तरह निवेश करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन उनमें से इक्का-दुक्का ही यह हुनर और कामयाबी हासिल कर पाते हैं। इसका कोई जादुई नहीं, सीधा-सरल कारण है। पहले कुछ उदाहरणों पर नजर। उन्होंने वॉशिंगटन पोस्ट में जो निवेश किया, वह 38 सालों में 73 गुना हो गया। कोकाकोला में अपना निवेश उन्होंनेऔरऔर भी

जब कभी आप किसी को देते हैं तो आप उसकी नजर में ही नहीं, खुद की नजर में भी बहुत बड़े बन जाते हो। कुछ पल के लिए सही, दाता बनने का इकलौता सुख भी लेते जाने के अनंत सुखों पर भारी पड़ता है।और भीऔर भी

खुदकुशी का ख्याल मन में तभी आता है जब आप देने की नहीं, पाने की मानसिकता में जीते हैं। सोचना शुरू कर दीजिए कि आप औरों को क्या दे सकते हैं। फौरन मरने का ख्याल दुम दबाकर भाग जाएगा।और भीऔर भी