ऋण के बोझ और तरलता के संकट से जूझ रहे यूरो ज़ोन के देशों को उबारने के लिए यूरोपीय संघ 700 अरब यूरो का स्थाई वित्तीय सुरक्षा पैकेज देने को राजी हो गया है। माना जा रहा है कि ऋण संकट के चलते इन देशों पर मंडराते राजनीतिक अस्थायित्व के बादल छंट जाएंगे। नया राहत कोष, यूरोपीय स्थिरता प्रणाली (ईएसएम) 440 अरब यूरो के वर्तमान अस्थाई वित्तीय कवच, यूरोपीय वित्तीय स्थिरता कोष (ईएफएसएफ) की जगह ले लेगा।औरऔर भी

दुनिया की एक प्रतिष्ठित पत्रिका फॉरेन पॉलिसी ने अपनी ताजा सालाना रैंकिंग में भारत के पड़ोसी देशों – पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका को दुनिया के ‘सबसे नाकाम देशों’ की सूची में शामिल किया है। सूची में शामिल 60 देशों में पाकिस्तान को 12वें, म्यांमार को 18वें, बांग्लादेश को 25वें, नेपाल को 27वें, श्रीलंका को 29वें और भूटान को 50वें स्थान पर रखा गया है। इस सूची में अफ्रीकी देशों की बहुतायत है। सूची में सबसे ऊपरऔरऔर भी

लोकपाल विधेयक मसौदा समिति की आखिरी बैठक होने के बाद भी सरकार और हज़ारे पक्ष के बीच अहम मुद्दों पर मतभेद बने रहे और साझा मसौदा तैयार नहीं किया जा सका। हज़ारे पक्ष ने जहां सरकार के मसौदे पर ‘गहरी निराशा’ जाहिर की, वहीं केंद्र ने कहा कि वह दोनों पक्षों के मसौदे पर राजनीतिक दलों से राय लेकर उसे कैबिनेट के समक्ष रखेगा। सरकार के मसौदे में प्रधानमंत्री को लोकपाल के दायरे में रखे जाने काऔरऔर भी

दोपहर तक चढ़ रहा बाजार बाद में गिर गया। निफ्टी 1.23 फीसदी बढ़त लेकर 5322.45 तक चला गया। लेकिन मंदड़ियों का हमला जारी रहा तो आखिर में महज 0.34 फीसदी की बढ़त के साथ 5275.85 पर बंद हुआ। लेकिन मुझे कोई भ्रम नहीं, कोई दुविधा नहीं। मंदड़ियों का हमला बाजार का रुख बदल सकता है, मेरी राय नहीं। मॉरीशस के मुद्दे को जरूरत से ज्यादा तान दिया गया। बाजार का हर खिलाड़ी इस हकीकत से वाकिफ हैऔरऔर भी

वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने भले ही पिछले साल सितंबर में नॉर्थ ब्लॉक स्थित अपने कार्यालय की सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। लेकिन जांच के बाद सुरक्षा में सेंध जैसा कोई मामला नहीं पाया गया है। इंडियन एक्सप्रेस में उस पत्र की खबर छपने के बाद वित्त मंत्री ने मंगलवार को कहा कि जांच एजेंसियों को नॉर्थ ब्लाक में उनके कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था में कथित सेंध की जांच में कुछ नहीं दिखा है।औरऔर भी

यूं एक ही दिन में किसी शेयर का आधे से भी कम भाव पर आ जाना अकारण नहीं होता। अगर 7 जनवरी 2009 को सत्यम कंप्यूटर का शेयर 84 फीसदी गिरकर 188.70 रुपए से 30.70 रुपए पर आया था तो इसलिए कि उसी दिन रामालिंगा राजू ने कंपनी में किए गए फ्रॉड की घोषणा की थी। लेकिन 20 जून 2011 को जीटीएल के साथ ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था कि उसका शेयर 339.90 रुपए से 63.5औरऔर भी

किसी मूर्ख को आसानी से खुश किया जा सकता है। बुद्धिमान को खुश करना और भी आसान है। लेकिन अपने ‘ज्ञान’ पर मुग्ध लोगों को ब्रह्मा भी खुश नहीं कर सकते। इसलिए इनके मुंह नहीं लगना चाहिए।और भीऔर भी