पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी से गए हुए चंद्रशेखर भास्कर भावे को अभी तीन महीने भी नहीं बीते हैं कि उनके पुराने कर्मों की स्थगित पड़ताल शुरू हो गई है। सेबी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि उसका बोर्ड 2003-06 के आईपीओ घोटाले में डिपॉजिटरी सेवा कंपनी, एनएसडीएल को क्लीनचिट देने के अपने फैसले पर पुनर्विचार करने को तैयार है। उक्त तीन सालों में एनएसडीएल के प्रमुख सी बी भावे ही थे। सुप्रीम कोर्ट की एकऔरऔर भी

प्रस्तावित नए कंपनी कानून के अनुसार कंपनियों को अपनी सालाना रिपोर्ट में सामाजिक क्षेत्र पर खर्च की गई राशि के अलावा इस क्षेत्र में किए गए कार्यों का विस्तृत विवरण देना होगा। कंपनी विधेयक 2009 के पारित होने के बाद कंपनियों को अपने शेयरधारकों को समाजिक कार्यों पर खर्च राशि के साथ-साथ यह भी बताना होगा कि कंपनी की सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के तहत धन कहां-कहां खर्च किया गया। कंपनियों के लिए अपने शुद्ध लाभ का 2औरऔर भी

कपड़ा मंत्रालय ने 2010-11 में देश का कपास उत्पादन अनुमान और घटाकर 3.05 करोड़ गांठ कर दिया है। मंत्रालय ने दिसंबर 2010 में हुई बेमौसम बारिश के मद्देनजर यह कदम उठाया है जिसके कारण मंडियों में आवक कम रही थी। इससे कपास के दाम में और लगने के आसार हैं। सरकारी निकाय कपास परामर्शक बोर्ड (सीएबी) ने सत्र अक्तूबर-सितंबर 2010-011 की शुरआत में 3.29 करोड़ गांठ उत्पादन का अनुमान लगाया था। अप्रैल में इसे घटाकर 3.12 करोड़औरऔर भी

सुप्रीम कोर्ट ने सहारा इंडिया रीयल एस्टेट को निर्देश दिया है कि वह ओएफसीडी (ऑप्शनी फुली कनवर्टिबल डिबेंचर) स्कीम के आवेदन का फॉर्मैट और कंपनी की तरफ से धन जुटानेवाले अपने सभी मान्यताप्राप्त एजेंटों की सूची उपलब्ध कराए। सुप्रीम कोर्ट ने सहारा परिवार की इस कंपनी को यह निर्देश तब दिया जब कंपनी ने कहा कि वह निवेशकों द्वारा दिए गए गलत पतों व अन्य ब्यौरों के लिए जवाबदेह नहीं है। प्रधान न्यायाधीश एस एच कपाडिया कीऔरऔर भी

बाजार का बैरोमीटर, निफ्टी 5440 से बढ़कर 5586 पर पहुंच गया जो उस स्पष्ट रुझान की तस्दीक करता है जिसे हम पहले ही बता चुके हैं। असल में, फिजिकल सेटलमेंट के अभाव में पूरे सिस्टम के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। हमने पिछले कॉलम में तथ्यों व आंकड़ों के साथ दिखाया है कि डेरिवेटिव या एफ एंड ओ बाजार 32,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का नहीं है, जबकि इसे 1,15,000 करोड़ रुपए का दिखाया जाता है।औरऔर भी

किसी चीज का दाम जस का तस रहे तो उसी स्तर पर वह महंगी से सस्ती कैसे हो सकती है? लेकिन शेयर बाजार में ऐसा खूब होता है। जैसे, पिरामल ग्लास के शेयर का औसत भाव इस साल जनवरी में 89.95, फरवरी में 93.50, मार्च में 112.90 और अप्रैल में 129..40 रुपए था। लेकिन यह महंगा था क्योंकि इसका पी/ई अनुपात इस दौरान क्रमशः 42.81, 44.50, 53.73 और 61.58 था। यह गणना हर माह ठीक पिछले बारहऔरऔर भी

गुमान रहता है कि हम ये कर डालेंगे, वो कर डालेंगे। हालात से टकराकर हकीकत सामने आती है तो हम जीरो बन जाते हैं। लेकिन यही जीरो जरूरी जज्बे का साथ पाकर आपको फिर से हीरो बना सकता है।और भीऔर भी