वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने राजकोषीय घाटे को कैसे ‘मैनेज’ किया होगा, इसका हल्का-हल्का रहस्य अब सामने आने लगा है। शुक्रवार को केंद्र सरकार ने उर्वरक सब्सिडी के लिए लोकसभा में 8000 करोड़ रुपए की अनुपूरक अनुदान मांग पेश की। इसे मिला देने पर चालू वित्त वर्ष 2010-11 में उर्वरक सब्सिडी का कुल खर्च 66,075 करोड़ रुपए हो जाता है, जबकि वित्त मंत्री ने चार दिन पहले ही पेश किए गए बजट में इस खर्च का संशोधितऔरऔर भी

सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनी एमटीएनएल पिछले कुछ समय से जरूरत से ज्यादा स्टाफ होने की वजह से परेशान है। संचार व सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री गुरूदास कामत ने शुक्रवार को राज्यसभा में बताया कि 31 दिसंबर 2010 की स्थिति के अनुसार महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड (एमटीएनएल) में कुल 44,046 कर्मचारी हैं। कामत ने बताया कि वर्ष 2007-08 में एमटीएनएल की आय 5330 करोड़ रूपए रही और उसने अपने स्टाफ के वेतन व अन्य बकाये पर 1643औरऔर भी

अमेरिका की एक सरकारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत नकली मुद्रा के बढ़ते प्रवाह से जूझ रहा है जिसका प्रमुख स्रोत पाकिस्तान है और इस मुद्रा का इस्तेमाल आतंकवाद व आपराधिक नेटवर्क अपनी गतिविधियां चलाने के लिए करते हैं। इस स्थिति पर चिंता जताते हुए अमेरिकी विदेश विभाग की वर्ष 2011 की अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ नियंत्रण रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘भारत बड़े पैमाने पर नकली मुद्रा के बढ़ते प्रवाह से जूझ रहा है जोऔरऔर भी

मैं कल करीब दर्जन भर दमदार विश्लेषकों के मिला और वे सभी कच्चे तेल की चढ़ाई को लेकर चिंतित हैं। उन्हें लगता है कि कच्चे तेल के दाम जल्दी ही 130-140 डॉलर प्रति बैरल तक चले जाएंगे। इसलिए वे खुद भी शॉर्ट सेलिंग कर रहे हैं और दूसरों को भी ऐसा करने की सलाह दे रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों का अनुमान लगाने के बारे में मेरा रिकॉर्ड काफी अच्छा रहा है। 2005 में जब यहऔरऔर भी

नोवार्टिस फार्मा क्षेत्र की बहुराष्ट्रीय कंपनी है। इंसानों से लेकर जानवरों तक की दवाएं बनाती है। 1996 में सीबा-गेगी और सैंडोज के विलय के बाद वजूद में आई। इसका मुख्यालय स्विटजरलैंड के शहर बासेल में है। अभी कल ही मशहूर फॉर्च्यून पत्रिका में इसे दवा कारोबार में दुनिया की सबसे पसंदीदा कंपनियों में पहले नंबर पर रखा है। लेकिन इसकी भारतीय इकाई नोवार्टिस इंडिया के शेयरों पर खास चमक नहीं आई। कारण वाजिब भी लगता है क्योंकिऔरऔर भी

समय हर जड़त्व से मुक्त कछुआ है। लेकिन हम जड़त्व से ऐसे घिरे हैं कि यथास्थिति नया कुछ करने से रोकती है। सोते-जागते खरगोश की तरह बढ़ते हैं हम। ठान लें तो समय से आगे निकल जाएं।और भीऔर भी

।।प्रणव मुखर्जी।। भारत आज उस मुकाम पर है जहां कुछ भी करना या पाना असंभव नहीं लगता। साथ ही बहुत सारी चुनौतियां भी हमारे सामने हैं जिन्हें सुलझाकर ही हमने इस दशक के अंत तक विकसित देश के रूप में उभर सकते हैं। इसमें सबसे बड़ी चुनौती है युवा भारत की बढ़ती अपेक्षाएं। यह आबादी का वो हिस्सा है जो बेचैन है। फिर भी डटा हुआ है और सामने आनेवाले हर अवसर को पकड़ने को तैयार है।औरऔर भी

सरकारी कंपनियों के कर्मचारियों का औसत सालाना वेतन 2009-10 में 6.09 लाख रुपए रहा है। सार्वजनिक उद्यम विभाग के सर्वे के मुताबिक पिछले चार साल में इनके वेतन में 100 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2009-10 में सरकारी कंपनियों के कर्मचारियों की संख्या 14.91 लाख थी, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में यह संख्या 15.34 लाख थी। इस तरह कंपनियों ने 43,000 कर्मचारी घटा दिए।और भीऔर भी

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबे समय से आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हजारे को लोकपाल विधेयक पर चर्चा करने के लिए आमंत्रित किया है। अन्ना हजारे ने सशक्त लोकपाल विधेयक बनाए जाने में सरकार के विफल होने की स्थिति में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर जाने की धमकी दे रखी है। प्रधानमंत्री कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री ने हजारे को इस विधेयक से संबंधित चर्चा के लिए बुलाया है। इस संबंध मेंऔरऔर भी