निफ्टी टूटकर 5225 और सेंसेक्स 17508 तक चला गया। लेकिन मुझे जरा-सा भी गफलत नहीं है। मंदड़िये अपने हमले से बाजार का रुख बदल सकते हैं, मेरी राय नहीं। हालांकि मुझे यह मानने में कोई हिचक नहीं कि अब बाजार की नई तलहटी बनाने का काम मंदड़िये करेंगे क्योंकि इस समय सब कुछ उनके हाथ, उनके शिकंजे में है। इस बीच एलआईसी ने बाजार में खरीद शुरू कर दी है और अगले 30 दिनों में वह 15,000औरऔर भी

फंडामेंटल अमूमन शॉर्ट टर्म या छोटी अवधि में नहीं चलते और टिप्स ज्यादातर लंबी अवधि में नहीं चलतीं। इसलिए टिप्स के पीछे ट्रेडर भागते हैं, जबकि निवेशकों को हमेशा कंपनी का मूलाधार या फंडामेंटल्स देखकर ही निवेश करना चाहिए। लेकिन शेयर बाजार से कमाई वही लोग कर पाते हैं तो समय पर बेचने की कला सीख लेते हैं। यह कला अभ्यास, अनुभव और लक्ष्य बांधने से आती है। अक्सर ऐसा होता है कि कोई शेयर 45 फीसदीऔरऔर भी

विद्या विनय देती हो या नहीं, लेकिन ज्ञान जरूर मुक्त करता है। पर ज्ञान व मुक्ति के अलग-अलग स्तर हैं। जो जितना मुक्त है, उतना संपन्न है। वैसे हर संपन्न व्यक्ति का मुक्त होना जरूरी नहीं।और भीऔर भी

रिजर्व बैंक ग्राहक सेवाओं को लेकर बैंकों के प्रति अपना रुख कड़ा करनेवाला है। बहुत संभावना है कि सेबी के पूर्व चेयरमैन एम दामोदरन की अध्यक्षता में बैंकों की ग्राहक सेवाओं पर गठित समिति हफ्ते भर बाद 15 फरवरी को अपनी रिपोर्ट रिजर्व बैंक को सौंप देगी। वैसे, यह रिपोर्ट के आने में करीब दो हफ्ते की देर हो चुकी है क्योंकि रिजर्व बैंक ने 2 नवंबर 2010 को मौद्रिक नीति की दूसरी त्रैमासिक समीक्षा में कहाऔरऔर भी

केंद्र सरकार के मुताबिक देश में चालू वर्ष 2010-11 के दौरान दाल का आयात पिछले साल के मुकाबले लगभग आधा रहेगा। इसका कारण दाल के उत्पादन में वृद्धि है। वाणिज्य सचिव राहुल खुल्लर ने राजधानी दिल्ली में कहा, ‘‘इस साल दाल का आयात पिछले साल के मुकाबले आधा रहेगा। इसका कारण देश में वर्ष 2010-11 में दाल उत्पादन का अधिक होना है। चालू वर्ष में करीब 1.66 करोड़ टन दाल उत्पादन की उम्मीद है।’’ पिछले वर्ष 2009-10औरऔर भी

बार-बार पलटकर हमला करना मंदड़ियों और तेजड़ियों दोनों की फितरत है। तेजड़िये तीन से चार बार बाजार को ऊपर की तरफ खींचते हैं। लेकिन खरीद से ज्यादा सप्लाई होते ही कदम पीछे खींच लेते हैं। मंदड़ियों का हमला और पीछे हटना भी इसी तरह चलता है। अभी तक मंदड़िये कामयाब रहे हैं क्योंकि राजनीतिक अस्थिरता, मुद्रास्फीति, घोटाले, भ्रष्टाचार और अधिक मूल्यांकन ने उनके लिए माकूल हालात पैदा कर रखे थे। हालांकि मंदड़ियों की कोशिश बदस्तूर जारी है।औरऔर भी

अगर समाज हमारा सही मूल्य नहीं आंकता तो हम-आप कोई भी परेशान हो सकते हैं। इसी तरह पूंजी बाजार में उतरी कंपनियां भी परेशान हो जाती हैं जो बाजार उनका सही मूल्य नहीं आंकता। चार दशकों से ज्यादा वक्त से कंस्ट्रक्शन का बिजनेस कर रही आहलूवालिया कांट्रैक्ट्स इंडिया लिमिटेड (एसीआईएल) भी परेशान है कि सब कुछ के बावजूद उसका शेयर (बीएसई – 532811, एनएसई – AHLUCONT) बढ़ क्यों नहीं रहा। शेयर के बढ़ने से कंपनी को सीधे-सीधेऔरऔर भी

एक ही समय एक ही तरह के लोग एक ही मकसद के लिए एक ही तरह का काम कर रहे होते हैं। अकेले-अकेले। साथ आ जाएं तो जबरदस्त अनुनाद पैदा कर सकते हैं। लेकिन साथ आएं भी तो कैसे?और भीऔर भी

पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी ने 1 मई 2011 से रिटेल के अलावा बाकी सभी निवेशकों के लिए अनिवार्य कर दिया है कि वे पब्लिक (आईपीओ, एफपीओ) या राइट्स इश्यू में आवेदन केवल अस्बा (एप्लिकेशन सपोर्टेड बाय ब्लॉक्ड एमाउंट) सुविधा के तहत ही कर सकते हैं। अस्बा ऐसी सुविधा है जिसमें आवंटन होने तक निवेशक की रकम उसके बैंक खाते में ही पड़ी रहती है। शेयरों का आवंटन होने के बाद ही वह रकम कंपनी के खातेऔरऔर भी

व्यापक दक्षता आधार और पहले शुरुआत करने का लाभ भारत को आज भी आउटसोर्सिंग क्षेत्र में मिल रहा है और यह दुनिया की कई प्रमुख कंपनियों का पसंदीदा ठिकाना बना हुआ है। यह बात ग्लोबल मैनेजमेंट कंसल्टेंसी फर्म ए टी केयर्नी की रिपोर्ट में कही गई है। ए टी केयर्नी के वैश्विक सेवा स्थल सूचकांक (जीएसएलआई) 2011, सूची में भारत, चीन और मलयेशिया क्रमशः पहले, दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। ये तीनों देश वर्ष 2003 मेंऔरऔर भी