चालू वित्त वर्ष 2010-11 में 31 अक्‍टूबर तक के सात महीनों में देश भर में बैंकों व वित्तीय संस्थाओं द्वारा 2,28,884 करोड़ रुपए का कृषि‍ ऋण दि‍या जा चुका है। वि‍त्‍त वर्ष में अभी तीन माह बाकी हैं और पि‍छले दो महीनों के आंकड़ों का संकलन कि‍या जाना है। इस आधार पर कृषि क्षेत्र को 3,75,000 करोड़ रुपए बतौर ऋण देने का लक्ष्‍य पार हो जाने की संभावना है। पिछले वित्त वर्ष 2009-10 में 3,84,514 करोड़ काऔरऔर भी

खाने-पीने की चीजों के दामों में लगातार तेजी से परेशान प्रधानमंत्री मनमोहन सिहं ने महंगाई को थामने के उपायों पर विचार-विमर्श के लिए आज, मंगलवार को राजधानी दिल्ली में एक उच्चस्तरीय बैठक की। लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। इसलिए विचार-विमर्श का सिलसिला कल भी जारी रहेगा। सूत्रों के मुताबिक कोई नतीजा न निकलने की वजह कृषि व खाद्य मंत्री शरद पवार का अड़ियल रवैया रहा है। इसलिए संभव है कि सरकार अगले फेरबदल में पवार सेऔरऔर भी

कल भारी वोल्यूम के साथ निफ्टी के 5800 अंक से नीचे चले जाने के साथ बाजार ने ट्रेडरों और निवेशकों के विश्वास को डिगाकर रख दिया है। मुझे उम्मीद थी कि निफ्टी 5820 के बाद वापस उठेगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसका कारण मुद्रास्फीति और ब्याज दरों के बढ़ने का अंदेशा बताया जा रहा है। पर यह बाजार के इस तरह धराशाई हो जाने का असली कारण नहीं हो सकता। जब वित्त मंत्री ऑन रिकॉर्ड कह रहेऔरऔर भी

स्पैंको लिमिटेड टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी कंपनी है। वह सरकार, बिजली, ट्रांसपोर्ट व टेलिकॉम सेक्टर को अपनी सेवाएं देती है। साथ ही बीपीओ सेवाओं में भी सक्रिय है। पिछले ही हफ्ते शुक्रवार 7 जनवरी को उसे महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी, महावितरण से नागपुर जिले में फीडर सेपरेशन स्कीम के लिए करीब 66 करोड़ रुपए का नया अनुबंध मिला है। लेकिन इस खबर को सकारात्मक रूप से लेने के बजाय उसका शेयर कल सोमवार को बीएसई (कोडऔरऔर भी

मंजिल दूर है। सफर लंबा है। चढ़ाई तीखी है। फिर इतना भारी बोझ क्यों? ईर्ष्या-द्वेष, दुश्मनी, बदला, देख लेंगे, निपट लेंगे। मन में इतना कचरा! अरे, फेंकिए ये बोझ और मुक्त मन से उड़ जाइए।और भीऔर भी