लक्ष्मी विलास बैंक बुधवार को बीएसई में 2.41 फीसदी बढ़कर 91.35 रुपए और एनएसई में 2.64 फीसदी बढ़कर 91.45 रुपए पर बंद हुआ है। यह अभी 52 हफ्ते के उच्चतम स्तर 124.80 और न्यूनतम स्तर 70 रुपए के लगभग बीच में है। असल में हुआ यह कि बीते वित्त वर्ष 2009-10 की चौथी तिमाही में इसे 240.22 करोड़ रुपए की आय पर 20.77 करोड़ रुपए का घाटा लग गया। इसी वजह से पूरे वित्त वर्ष 2009-10 मेंऔरऔर भी

न्यू टेक इंडिया (Nu Tek India) की बुक वैल्यू अभी 50.82 रुपए है, जबकि मंगलवार को उसका शेयर बीएसई में 1.23 फीसदी की बढ़त के साथ 33 रुपए और एनएसई में 0.61 फीसदी की बढ़त के साथ 33 रुपए पर बंद हुआ है। वित्त वर्ष 2009-10 में उसने 185.98 करोड़ रुपए की आय पर 15.87 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है और उसका ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) 4.82 रुपए है। इस आधार पर उसका पी/ई अनुपातऔरऔर भी

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) के प्रबंधन द्वारा आरडीबी इंडस्ट्रीज पर आज के लिए सर्किट फिल्टर हटाने का ‘अपेक्षित’ नतीजा दिख गया। शेयर 50 फीसदी से ज्यादा गिरकर नीचे में 75.05 रुपए पर पहुंच गया। दोपहर 12 बजे के आसपास यह 47.25 फीसदी की गिरावट के साथ 79.95 पर चल रहा था और इसमें 10.57 लाख शेयरों के सौदे हो चुके थे। यह आरडीबी इंडस्ट्रीज के शेयरों में 12 सालों के दौरान आई सबसे बड़ी गिरावट है। ऐसीऔरऔर भी

सुब्रोस लिमिटेड पच्चीस साल पुरानी कंपनी है। इसे 1985 में जापान की सुजुकी कॉरपोरेशन और डेंसो कॉरपोरेशन ने सूरी बंधुओं के साथ मिलकर बनाया था। रमेश सूरी कंपनी के कार्यकारी चेयरमैन हैं और श्रद्धा सूरी उसकी प्रबंध निदेशक है। कंपनी कार से लेकर बसों तक के एसी बनाती है। उसके पास देश में ऑटो एयर कंडीशनिंग सिस्टम बनाने की सबसे बड़ी और इकलौती एकीकृत इकाई है। उसके तीन संयत्र नोएडा (उ.प्र.), मानेसर (हरियाणा) और पुणे (महाराष्ट्र) मेंऔरऔर भी

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने सोमवार को बाजार बंद होने के बाद शाम पौने पांच बजे एक नोटिस जारी कर एक्सचेंज के ट्रेडिंग सदस्यों को सूचित किया है कि मंगलवार, 22 जून को आरडीबी इंडस्ट्रीज के शेयरों पर कोई सर्किट फिल्टर नहीं लगेगा ताकि सदस्य इस शेयर में ‘रीयलिस्टिक प्राइस लेवल’ पर सौदे कर सकें। फिर अगले ही वाक्य में जैसे कोई जीभ दबाकर बोलता है, वैसे ही बीएसई ने अपनी नोटिस में लिखा है कि ट्रेडिंगऔरऔर भी

सूर्या रोशनी में सब कुछ है। नाम है, धंधा है, ब्रांड है। 1973 में बनी पुरानी कंपनी है। बिजली के नए से नए लैंप व ट्यूबलाइट के साथ ही वह स्टील के पाइप व स्ट्रिप भी बनाती है। प्रबंधन चौकस है। 2009-10 में उसने 1938.93 करोड़ रुपए के कारोबार पर 45.17 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया है। उसकी प्रति शेयर बुक वैल्यू अभी 88.71 रुपए है और प्रति शेयर लाभ (ईपीएस) है 16.23 रुपए। लेकिन शेयरऔरऔर भी

यह दास्तान है एचडीएफसी म्यूचुअल फंड को साल 2007 में 13 अप्रैल से 31 जुलाई के बीच लगाए करीब 2.38 करोड़ रुपए के फटके की। इसमें चार किरदार हैं। एचडीएफसी म्यूचुअल फंड की संचालक एसेट मैनेजमेंट कंपनी के असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट – इक्विटीज निलेश कापडिया, उनके सहपाठी व ट्रेडर राजीव रमणीक लाल संघवी और संघवी से जुड़े दो अन्य ट्रेडर चद्रकांत पी मेहता और दीप्ति पारस मेहता। निलेश जून 2000 से अभी तक एचडीएफसी म्यूचुअल फंड कीऔरऔर भी

यूं तो मुझे टेक्निकल एनालिसिस और उसके आधार पर शेयरों की चाल के बारे में की गई भविष्यवाणियों का कोई सिर-पैर नहीं समझ में आता। लेकिन आज मैं एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की फर्म के चुनिंदा टेक्निकल अनुमान पेश करना चाहता हूं। यह फर्म भारत व चीन पर खास ध्यान दे रही है और भारत में इसका वास्ता निजी क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक से जुड़ी ब्रोकरेज फर्म से है। यह हर दिन अल-सुबह करीब 40-50 शेयरों कीऔरऔर भी

जिंदगी में पहले से ही सब कुछ पता हो तो वह कितनी बोरिंग हो जाएगी? फिर भी हम कल क्या होनेवाला है, इसका पता लगाने में जुटे रहते हैं। यही हाल शेयर बाजार का है। पारदर्शिता कितनी भी बढ़ जाए, पहले से सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है कि कल ठीक-ठीक क्या होनेवाला है, कौन-से शेयर बढ़ेंगे, कौन-से गिरेंगे। जानने की इच्छा के बीच अज्ञात का थ्रिल। इसी भाव से शेयर बाजार को देखिए। अच्छा लगेगा। आज केऔरऔर भी

क्वेंटेग्रा सोल्यूशंस आईटी कंसलटेंसी और सॉफ्टवेयर उद्योग से जुडी कंपनी है। इसका शेयर बीएसई में कल 3.74 फीसदी बढ़कर 12.75 रुपए पर बंद हुआ है। वित्त वर्ष 2009-10 में इसने 40.34 करोड़ रुपए की आय पर 18.08 करोड़ रुपए का घाटा उठाया है। लेकिन जानकारों का कहना है कि कंपनी में काफी संभावनाएं हैं। कंपनी में अभी 140 करोड़ रुपए का छिपा हुआ मूल्य है। इसलिए इस पर दांव लगाया जा सकता है। बस, अभी एक मुश्किलऔरऔर भी