तिरुपति के मशहूर मंदिर तिरूमाला तिरूपति देवस्थानम की प्रतिष्ठित श्री सेवा परियोजना को हासिल करने के लिए टीसीएस और विप्रो जैसी तीन कंपनियां दौड़ में लगी हैं। ये कंपनियां सूचना प्रौद्योगिकी सेवा उपलब्ध कराएंगी जिससे श्रद्धालुओं को बेहतर सेवा मिल सकेगी। फिलहाल मंदिर श्रद्धालुओं को ई-सेवा, ई-एकोमोडेशन, ई-सुदर्शनम और ई-हुंडी जैसी चार प्रमुख ई-सेवाएं उपलब्ध करा रहा है। श्री सेवा परियोजना मंदिर प्रशासन को कमरा व लड्डू जैसी सेवा उपलब्ध कराने में मदद करेगी। तिरूमाला तिरूपति देवस्थानमऔरऔर भी

एस्सार समूह की फाइनेंस कंपनी इंडिया सिक्यूरिटीज में उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सब्सिडियरी ईटीएचएल कम्युनिकेशंस होल्डिंग्स के विलय को शेयरधारकों की मंजूरी मिल गई है। मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर कल, 26 चेन्नई में कंपनी के शेयरधारकों की बैठक हुई जिसमें विलय के प्रस्ताव को मंजूर कर लिया गया। इसका सीधा-सीधा लाभ यह होगा कि ईटीएचएल कम्युनिकेशंस होल्डिंग्स के 5042.75 करोड़ रुपए के रिजर्व सीधे इंडिया सिक्यूरिटीज के खाते में आ जाएंगे। दूसरे, एस्सार समूह ने ईटीएचएलऔरऔर भी

कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय ने तय किया है कि अगर कंपनी के किसी अनुबंध को उसके शेयरधारक आमसभा में विशेष प्रस्ताव लाकर पारित कर देते हैं तो मंत्रालय उसे अपना अनुमोदन ऑनलाइन दे देगा। ऐसा समय की अनावश्यक बरबादी को रोकने के लिए किया गया है। इसके लिए कंपनी एक्ट, 1956 की धारा 297 के तहत प्रावधान किया गया है जिसे 24 सितंबर, 2011 से लागू कर दिया जाएगा। नई प्रक्रिया के तहत तय शुल्‍क देकर अब अनुमोदनऔरऔर भी

कृषि मंत्रालय ने भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के किसी तरह के वित्‍तीय संकट में होने से इनकार किया है। इस तरह की खबरें छपने के बाद कि एफसीआई अनाज की खरीद के लिए राज्‍यों और उनकी एजेंसियों को भुगतान नहीं कर पा रहा है, मंत्रालय ने सफाई पेश की है। उसका कहना है कि एफसीआई को गेहूं और धान की खरीद पर बोनस व अतिरिक्‍त आवंटन वगैरह के कारण बजट में आवंटन रकम से ज्यादा खर्च करनाऔरऔर भी

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कॉटन और कॉटन यार्न पर डीईपीबी (ड्यूटी इनटाइटलमेंट पासबुक) स्कीम की सुविधा पूर्व तिथि से बहाल कर दी है। वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने बताया कि कॉटन यार्न पर यह सुविधा 1 अप्रैल 2011 और कॉटन पर 1 अक्टूबर 2010 से बहाल की गई है। उन्होंने कहा, “मैं पिछले कुछ दिनों में कॉटन व कॉटन यार्न उद्योग की स्थिति की समीक्षा की। इन दोनों ही उद्योग क्षेत्रों को अंतरराष्ट्रीय व घरेलू बाजारऔरऔर भी

वि‍त्‍त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा है कि‍ मुद्रास्फीति को स्वीकार्य स्तर पर लाना जरूरी है और रि‍जर्व बैंक द्वारा ब्याज दर आधा फीसदी बढ़ाने से मुद्रास्फीति की अपेक्षा को थामने में मदद मिलेगी। उन्होंने मौद्रिक नीति की पहली तिमाही समीक्षा की पहल पर टिप्पणी करते हुए कहा कि रिजर्व बैंक ने रेपो दर को 7.50 फीसदी से 8 फीसदी कर मंहगाई में और कमी लाने का ठोस संकेत दि‍या है। वि‍त्‍त मंत्री ने कहा कि ‍इसऔरऔर भी

तिहाड़ जेल में बंद पूर्व टेलिकॉम मंत्री ए राजा ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और गृह मंत्री पी चिदंबरम को भी लपेटा है। राजा ने कहा है कि स्पेक्ट्रम की ब्रिकी को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की मौजूदगी में मंजूरी दी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि डीबी रियल्टी को स्पेक्ट्रम बेचने की मंजूरी तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने भी दी थी। इस बीच जहां प्रमुख विपक्षी दल बीजेपी ने जहां सरकार परऔरऔर भी

बढ़ती मुद्रास्फीति को काबू में लाना रिजर्व बैंक की प्राथमिकता है। इसके लिए कड़ी मौद्रिक नीति को अपनाना जरूरी है, भले ही आर्थिक विकास को धक्का पहुंच जाए। रिजर्व बैंक ने मौद्रिक नीति की पहली त्रैमासिक समीक्षा से ठीक पहले आर्थिक हालात की स्थिति बयां करते हुए यह बात कही है। इसलिए माना जा रहा है कि इस बार भी वह नीतिगत दरों (रेपो व रिवर्स) में 0.25 फीसदी वृद्धि कर सकता है। अभी रेपो दर 7.50औरऔर भी

देश में भले ही स्विटजरलैड के बैंकों में रखे काले धन को लेकर राजनीतिक माहौल बना दिया गया हो, लेकिन भावना से परे हटकर देखें तो यह रकम बहुत मामूली है। स्विटजरलैंड के केंद्रीय बैंक के मुताबिक उनके देश के बैंकों में रखे गए विदेशी नागरिकों के कुल धन में भारतीयों का हिस्सा महज 0.07 फीसदी है। यह पाकिस्तान से भी कम है। जैसे अपना केंद्रीय बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक है, वैसे ही स्विटजरलैंड का केंद्रीय बैंक,औरऔर भी

महंगाई ने आम आदमी की जेब में सुराख कर दी है। तमाम चीजों के साथ भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक ‘रेशम की डोरी’ के दाम भी बढ़ गए हैं। लेकिन राखी के कारोबार पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है। रक्षाबंधन अभी करीब तीन हफ्ते दूर है। 13 अगस्त को इस बार पड़ रहा है रक्षाबंधन। लेकिन भाइयों और बहनों के बीच की भौगोलिक दूरियों के चलते देश भर के बाजार अभी से तरह-तरह कीऔरऔर भी