सेटलमेंट के चक्र के अंत में एक बार फिर बाजार में निराशा का आलम है। निफ्टी सुबह खुलने के कुछ देर बाद ही 5804 तक पहुंच गया। फिर 3 बजे तक गिरते-गिरते 5706 तक चला गया। हालांकि आखिरी आधे घंटे में उसमें सुधार देखा गया और यह 5749.50 पर बंद हुआ। लेकिन निफ्टी के जिस 5300 के स्तर को हम काफी पीछे छोड़ आए हैं, अब उसके फिर से वहां तक गिरने की बात हो रही है।औरऔर भी

बाजार एक बार फिर डेरिवेटिव सौदों में ली गई पोजिशंस के हिसाब से चला। निफ्टी 0.83 फीसदी गिरकर 5785.45 पर पहुंच गया। ऐसा इसलिए क्योंकि डेरिवेटिव सौदों के गढ़ नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में अभी तक फिजिकल सेटलमेंट नहीं है। हमें बाजार की इस गति का पहले से अंदाजा था। इसीलिए हमने केवल बचाव वाली कॉल्स ही दी थी। फिर भी तेजी का रुझान कायम है। कल नए सेटलमेंट की शुरुआत के साथ नई पोजिशन ली जाएंगी।औरऔर भी

एक अच्छी खबर है जो पूंजी बाजार में खुशी ला सकती है। नॉर्थ ब्लॉक के मेरे सूत्रों ने बताया है कि आखिरकार वित्त मंत्रालय ने आईपीओ की लिस्टिंग के पहले दिन होनेवाले खेल पर चिंता जताई है। अमूमन लिस्टिंग के बाद शेयर धड़ाम से गिरते हैं जिससे लाखों-करोड़ों निवेशकों की पूंजी स्वाहा हो जाती है। यहां तक कि सरकार को भी अपनी कंपनियों के आईपीओ रिटेल व असली निवेशकों को बेचने में समस्या होती है। दुखद बातऔरऔर भी

पिछले हफ्ते बाजार के बराबर बढ़ने के बाद हमने अंदेशा जताया था कि रोलओवर के चलते इस हफ्ते बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर चलेगा। सोमवार को बाजार लहरों की तरह उठता-गिरता रहा। मंगलवार को उसके गिरने-उठने का ग्राफ किसी माला के आकार का रहा। हालांकि दोनों ही दिन सुबह की गिरावट शाम तक आते-आते संभल गई। इस उथल-पुथल से खास फर्क नहीं पड़ता। इसकी वजह रोलओवर है और बड़े रोलओवर होने अभी बाकी हैं। निफ्टी 5810-5820 केऔरऔर भी

रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) में आई करीब तीन फीसदी की गिरावट ने बाजार को थोड़ा दबाकर रख दिया। फिर भी चुनिंदा स्टॉक्स, खासकर बी ग्रुप के स्टॉक्स में बढ़त जारी है। गौर करने की बात यह है कि पिछले छह महीनों में दो चीजें हुई हैं। एक, जो प्रवर्तक ऊंचे मूल्यों पर भी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचने को तैयार नहीं थे, उन्हें अब समझ में आ गया है कि फंड जुटाने का सबसे सस्ता व अच्छा तरीकाऔरऔर भी

कंपनियों के नतीजों का मौसम खत्म होने को है। अब तक तस्वीर यह बनी है कि जहां इनफोसिस और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी तमाम बड़े स्तर की कंपनियां बाजार की अपेक्षाओं को पूरा करने में नाकाम रही हैं, वहीं पोलारिस, एचसीएल टेक्नो व हिंदुस्तान जिंक जैसे मध्यम स्तर की कंपनियों ने उम्मीद के बेहतर नतीजे हासिल किए हैं। कुल मिलाकर कॉरपोरेट क्षेत्र का लाभार्जन बीते वित्त वर्ष 2010-11 में पहले से 20 फीसदी ज्यादा रहेगा। लेकिन चालू वित्तऔरऔर भी

बाजार पर तेजी का जुनून इस कदर सवार है कि कच्चे तेल के बढ़ते दाम, मुद्रास्फीति और अमेरिकी अर्थव्यवस्था को डाउनग्रेड किया जाना भी उसे रोक नहीं पा रहा। आज लगता है कि वे ट्रेडर व निवेशक कितने बौड़म थे जो सेंसेक्स के 17,000 के स्तर पर कच्चे तेल, मुद्रास्फीति और वैश्विक चिंताओं का भय दिखाकर हमें समझा रहे थे कि यह 14,000 तक गिर जाएगा। ऐसा न कभी होना था, न ही हुआ क्योंकि लाभार्जन केऔरऔर भी

बाजार में मिड कैप स्टॉक्स की चर्चा जोरशोर से चल पड़ी है। हर 5 सेकंड पर कोई न कोई सूचना आ जाती है और इनमें से ज्यादातर खबर बन जाती हैं। यह न केवल बाजार के लिए, बल्कि निवेशकों के लिए भी शुभ संकेत है। बी ग्रुप के शेयरों में रैली शुरू हो गई है। उन तमाम रिटेल निवेशकों को अब इनसे निकलने का मौका मिल जाएगा जिन्होंने इन्हें ऊंचे भाव पर खरीदा था। दरअसल, यह एकऔरऔर भी

खबर पक्की है सिटी ने कुछ स्टॉक्स बेच डाले हैं। फिर भी घबराने की कोई जरूरत नहीं। दरअसल, एफआईआई को अपने विदेशी आधार के चलते इस तरह की सूचनाएं पहले मिल जाती है जो हमेशा स्थानीय खिलाड़ियों या घरेलू निवेशकों को काफी नुकसानदेह स्थिति में डाल देती है। आज बाजार में सुबह से ही ज्वार-भाटे की हालत है। महज आधे घंटे में निफ्टी 36 अंक और सेंसेक्स 115 अंक का गोता लगा गया। उसके बाद बाजार जितनाऔरऔर भी

इनफोसिस ने भारत के बारे में धुरंधरों का नजरिया बदल दिया है। जानीमानी निवेश व ब्रोकिंग फर्म सीएलएसए और कुछ दूसरे विश्लेषकों ने भारतीय बाजार को डाउनग्रेड कर दिया है। लेकिन जान लें कि इनफोसिस में बिकवाली इसलिए नहीं हुई कि उसके नतीजे उम्मीद से कमतर थे, बल्कि इसकी कुछ दूसरी वजहें थीं। इसके फ्यूचर्स में औकात से ज्यादा कर लिए गए सौदे काटे जा रहे हैं। अभी तो हम इनफोसिस में अच्छा-खासा मूल्य देख रहे हैंऔरऔर भी