ब्लैकबेरी, बाजार व खबरों की रफ्तार

खबर पक्की है सिटी ने कुछ स्टॉक्स बेच डाले हैं। फिर भी घबराने की कोई जरूरत नहीं। दरअसल, एफआईआई को अपने विदेशी आधार के चलते इस तरह की सूचनाएं पहले मिल जाती है जो हमेशा स्थानीय खिलाड़ियों या घरेलू निवेशकों को काफी नुकसानदेह स्थिति में डाल देती है। आज बाजार में सुबह से ही ज्वार-भाटे की हालत है। महज आधे घंटे में निफ्टी 36 अंक और सेंसेक्स 115 अंक का गोता लगा गया। उसके बाद बाजार जितना गिरा था, उतना ही ऊपर चला गया। ये कोई बड़ी बात नहीं है क्योंकि डेरिवेटिव सौदों में फिजिकल सेटलमेंट न होने से हमारे बाजार में गहराई नहीं है। अभी बहुत छिछला है हमारा बाजार। लेकिन हमें तब तक इसी से काम चलाना पड़ेगा, जब तक कोई अण्णा हजारे इसको मुद्दा बनाकर डट नहीं जाता।

अमेरिका की सुधरती स्थिति भारत से पूंजी के बाहर जाने का प्रमुख कारण थी। लेकिन अब अमेरिकी अर्थव्यवस्था को स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने डाउनग्रेड कर दिया। एफआईआई अब अमेरिका से और कहां जाएंगे? वैसे, डाउनग्रेड और अपग्रेड होता रहता है, आम बात है। इस सटोरिया बाजार में हम खुद को भाग्यशाली मानते हैं जो डाउनग्रेड के पहले हमने लांग पोजिशन नहीं बना रखी है। हम 30 से ज्यादा पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहे किसी भी स्टॉक में लांग होने का जोखिम अच्छी तरह समझते हैं। यह उसी तरह की तरह की बात है कि आप 50 साल के शख्स से शादी करो और उम्मीद करो कि वह 25 साल जैसा जोश-खरोश दिखाएगा।

खैर, अब रोलओवर में केवल सात दिन बचे हैं और बाजार फिर नए चक्र में चला जाएगा। ऐसा हर महीने का चक्कर बन गया है। पुराने बदला सिस्टम में ऐसा कभी नहीं होता था। ये सात दिन काफी तकलीफ से भरे होंगे और बाजार में भयंकर उतार-चढ़ाव की स्थिति रहेगी। इनफोसिस में जमकर शॉर्ट सौदे हो रखे हैं। बारह से ज्यादा ब्रोकिंग हाउसों ने एक साथ डाउनग्रेड कर दिया है तो ऐसा होना था। लेकिन ये सभी शॉर्ट सेलर अगले हफ्ते सेटलमेंट के आखिरी दिन गुरुवार को फंस सकते हैं और उन्हें काफी कैश ढीला करना पड़ सकता है क्योंकि फिजिकल डिलीवरी की व्यवस्था तो एनएसई में है नहीं। असल में इनफोसिस में रिटेल निवेशकों की दिलचस्पी कभी रही नहीं और इसमें एफआईआई व डीआईआई ने ही निवेश कर रखा है। इनमें से कुछ ने शॉर्ट सौदे कर रखे हैं और कुछ इसे अब खरीदकर बटोरने में लगे हैं।

इधर बाजार में हर किसी के पास ब्लैकबेरी होने से खबरों का प्रवाह काफी तेज हो चुका है। मुझे ग्रुपों को उपलब्ध सारी सूचनाएं मिल जा रही हैं और ये खबर बन जाती हैं। एवेरॉन की खबर शुक्रवार को ही घूम रही थी और सोमवार को घोषित होने तक यह पुरानी पड़ चुकी थी। टिमकेन की खबर ईटी नाऊ पर फ्लैश होने से पहले ही सबके पास थी। केयर्न के सौदे की खबर करार के कम से कम दो घंटे पहले बाजार को मिल गई थी। आदित्य बिड़ला ग्रुप की खबर का भी यही हाल रहा। सेबी ने टेलिकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी, टीआरएआई से दरखास्त की है कि वह शेयरों को लेकर चलते एसएमएस के सिलसिले पर रोक लगा दे। लेकिन तेजी से बढ़ते ब्लैकबेरी की मार को यह कैसे रोक पाएगा? मजे की बात यह कि ब्लैकबेरी के संदेश में भेजनेवाले का कोई नाम-पता नहीं रहता। खबर/अफवाह अपने पीछे कोई सबूत छोड़कर नहीं जाती कि वह चली कहां से है।

मैं फिर से दोहराना चाहूंगा कि बाजार की हर डुबकी खरीद का मौका पेश कर रही है। बेहतर होगा कि आप यह बात समझ लें। नहीं तो हमेशा की तरफ आप अपने भाग्य को ही कोसते रह जाएंगे। साथ ही आईपीओ में निवेश करने से बचें क्योंकि ज्यादातर आईपीओ प्री-फिक्स्ड होते हैं। उनका मकसद यही होता है कि पहले से जिन्होंने इसमें निवेश कर रखा है, उन्हें अपना पाप किसी और के मत्थे मढ़ने का मौका मिल जाए।

मुथूत फाइनेंस का इश्यू तो तमाम तरह के जोखिमों का पिटारा है। हालांकि संभावना है कि लिस्टिंग के दिन इसके भाव चढ़ा दिए जाएंगे क्योंकि एंकर निवेशकों ने इसमें पूंजी लगा रखी है। लेकिन एनपीए को नगण्य दिखाने के बावजूद इस कंपनी के धंधे में बहुत लोचा है। सबसे बड़ा लोचा तो यही है कि बंधक रखे गए सोने के घोषित व असली मूल्य में बहुत फर्क हो सकता है क्योंकि इसकी निष्पक्ष ऑडिटिंग नहीं होती।

इसके बजाय आप ऐसा कोई भी अच्छा शेयर खरीद सकते हैं जो अभी 3 से 15 तक के पी/ई अनुपात पर ट्रेड हो रहा है। मुथूत फाइनेंस का आईपीओ 23 के पी/ई अनुपात पर लाया गया है, जबकि ऊंचे जोखिम के चलते इस उद्योग का पी/ई अनुपात मात्र 3 है। इसका इश्यू मूल्य बुक वैल्यू से पांच गुना है जो वाकई बहुत महंगा है। बाजार में अब भी आप तमाम ऐसे शेयर खरीद सकते हैं जो बुक वैल्यू से नीचे चल रहे हैं।

सोने को 1510 डॉलर का पक्का स्टॉप लॉस लगाकर बेच दें। लक्ष्य 1350 डॉलर का हो सकता है। अगर यह कुछ समय तक 1510 डॉलर के स्तर पर बंद होता रहता है तो यह 1600 डॉलर तक भी जा सकता है।

इज्जत उसी को मिलती है जो दूसरों को इज्जत देना जानता है। बातें उसी की सुनी जाती हैं जो दूसरों की बातें अच्छी तरह सुनता है।

(चमत्कार चक्री एक अनाम शख्सियत है। वह बाजार की रग-रग से वाकिफ है। लेकिन फालतू के कानूनी लफड़ों में नहीं उलझना चाहता। सलाह देना उसका काम है। लेकिन निवेश का निर्णय पूरी तरह आपका होगा और चक्री या अर्थकाम किसी भी सूरत में इसके लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। यह कॉलम मूलत: सीएनआई रिसर्च से लिया जा रहा है)

1 Comment

  1. Guru Dev,
    This is regards to your views on Silver & Gold in your article later last week.
    Your opinion was to short with a strict stop loss and keep a watch on Monday & Tuesday.
    I just saw one of your recent article posted a while back where in you gave a STOPLOSS for GOLD. Please SILVER par bhi kuch gyan dijiye.

    Dhanyavaad,
    Abhaari,
    Shishir Pareek

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