वित्तीय क्षेत्र के नियामकों के अधिकार क्षेत्र के एक-दूसरे में घुसने की समस्या बढ़ती जा रही है। अभी यूलिप पर पूंजी बाजार की नियामक संस्था, सेबी और बीमा क्षेत्र की नियामक संस्था, आईआरडीए के बीच मची मार किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है कि बैंकिंग क्षेत्र के नियामक, रिजर्व बैंक ने तय कर दिया है कि निजी क्षेत्र के किसी भी बैंक को क्यूआईपी (क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट) से पहले उससे अनुमति लेनी पड़ेगी। आज रिजर्व बैंक नेऔरऔर भी

बड़ी विचित्र बात है। निवेशक कभी-कभी बहुत डरे रहते हैं और कभी-कभी परले दर्जे की नादानी कर बैठते हैं। हमने गैल इंडिया, पोलारिस, निफ्टी व भारत फोर्ज को खरीदने की सिफारिश की और ये सभी शेयर उफान पर है। आरडीबी इंडस्ट्रीज की चर्चा अब सभी बिजनेस चैनल कर रहे हैं, जबकि इसे सबसे पहले हमने अपनी रिसर्च से खोजकर पेश किया था। सैंडुर में 732 रुपए के भाव पर ऊपरी सर्किट लगा हुआ है। यह भी हमारीऔरऔर भी

सरकार इस बात से चिंतित है कि देश में ब्याज दर वायदा (इंटरेस्ट रेट फ्यूचर्स या आईआरएफ) का कारोबार ठंडा पड़ता जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए रिजर्व बैंक ने सालाना मौद्रिक नीति में प्रस्ताव रखा है कि अब आईआरएफ में 5 साल व दो साल की सरकारी प्रतिभूतियों के साथ ही 91 दिवसीय ट्रेजरी बिलों पर भी आधारित कांट्रैक्ट शुरू किए जाएं। अभी तक केवल दस साल के सरकारी बांड पर आधारित कांट्रैक्टऔरऔर भी

रिजर्व बैंक और बैंकिंग ओम्बड्समैन के दफ्तर को बराबर शिकायतें मिल रही हैं कि बैंक कुछ ऋणों व अग्रिम पर अनाप-शनाप ब्याज और शुल्क ले रहे हैं। बैंक आम ग्राहकों, किसानों व पेंशनभोगियों के साथ उचित बर्ताव नहीं करते। यह हालत तब है जब रिजर्व बैंक ने सालोंसाल से ग्राहकों के साथ उचित बर्ताव सुनिश्चित करने के लिए बहुत सारे उपाय कर रखे हैं। इसलिए अब रिजर्व बैंक ने एक कमिटी बनाने का फैसला किया है जोऔरऔर भी

ब्याज दरों में मामूली बढोतरी हुई। बाजार ने इसे आसानी से पचा भी लिया क्योंकि मौद्रिक नीति से पहले ही गोल्डमैन सैक्स के मामले ने बाजार को करेक्शन का मौका दे दिया था। बाजार अब सामान्य हो चुका है और पटरी पर लौट आया है। रोलओवर कल से शुरू हो रहा है। हमने निफ्टी और गैल इंडिया में खरीद की सलाह दी थी और दोनों अच्छा रिटर्न दे चुके हैं। हमने निफ्टी में 5170 के स्तर परऔरऔर भी

देश की तीसरी सबसे बड़ी सैनिटरीवेयर कंपनी सेरा सैनिटरीवेयर ने वित्त वर्ष 2009-10 में 31.37 रुपए का ईपीएस (प्रति शेयर लाभ) हासिल किया है, जबकि 2008-09 में उसका ईपीएस 21.15 रुपए था। कंपनी के अन-अंकेक्षित परिणामों के मुताबिक वित्त वर्ष 2009-10 में उसकी बिक्री 20 फीसदी बढ़कर 191.39 करोड़ रुपए हो गई है, जबकि शुद्ध लाभ 49 फीसदी बढ़त के साथ 19.53 करोड़ रुपए हो गया है। इससे पहले वित्त वर्ष 2008-09 में उसकी बिक्री 159.52 करोड़औरऔर भी

हमने गोल्डमैन सैक्स की घटना के साथ ही भारतीय बाजार पर पड़नेवाले उसके प्रभाव की भी जानकारी अलग से दी थी। इस पर घबराने की कोई बात नहीं है और जो लोग बाजार गिरने के अंदेशे में शॉर्ट सौदे करना चाहते हैं, हम उनकी जरा-सा भी परवाह नहीं करते। चाहे कुछ भी हो जाए, निफ्टी आनेवाले वक्त में 6400 के स्तर तक पहुंचेगा। इसलिए बाजार में अभी जिस तरह की छोटी-मोटी गिरावट आ रही है, उसे दरअसलऔरऔर भी

केंद्र सरकार ने विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) की एक अधिसूचना के जरिए देश से दालों के निर्यात पर लगा प्रतिबंध 31 मार्च 2011 तक बढ़ा दिया है। लेकिन वाणिज्य मंत्रालय चंद बड़ी व्यापारी फर्मों को फायदा पहुंचाने के लिए आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमिटी (सीसीईए) के जरिए दाल निर्यात की इजाजत दिलवाने की कोशिश में लगा हुआ है। वाणिज्य मंत्रालय ने पहले से ऐसा प्रावधान कर दिया है कि विशेष आर्थिक ज़ोन में लगी इकाइयां दाल समेतऔरऔर भी

अमेरिका में गोल्डमैन सैक्स के फ्रॉड के उजागर होने का असर आज भारतीय शेयर बाजार पर पड़ सकता है और अनुमान है कि बीएसई सेंसेक्स सुबह के कारोबार में 200-250 अंक नीचे जा सकता है। हालांकि दोपहर-बाद इसमें सुधार आने की संभावना है। इससे पहले रिजर्व बैंक की तरफ से मंगलवार को ब्याज दरों में वृद्धि की चिंता बाजार पर छाई हुई थी। अब इस चिंता में गोल्डमैन सैक्स के मामले ने आग में घी का कामऔरऔर भी

देश के विदेशी मुद्रा बाजार में अभी तक केवल फ्यूचर सौदों की ही इजाजत है। लेकिन पूंजी बाजार नियामक संस्था, सेबी मुद्रा के डेरिवेटिव उत्पादों का दायरा बढ़ाने पर विचार कर रही है। इसकी शुरुआत ऑप्शन सौदों से की जाएगी। यह बात आज सेबी के चेयरमैन सी बी भावे ने सिंगापुर में भारतीय वित्तीय बाजार पर आयोजित एक सम्मेलन में कही। इस सम्मेलन का आयोजन प्रमुख उद्योग संगठन सीआईआई (कनफेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री) ने किया था। भावेऔरऔर भी